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अब स्वदेशी फाइटर जेट बनाने वाली HAL में सरकार बेच रही है अपनी हिस्सेदारी

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Image Credits: Business Line/The Print

August 27, 2020

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देश की सरकारी एयरोस्पेस और डिफेंस कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) में से सरकार अपनी 15 फीसदी हिस्सेदारी बेचने जा रही है.

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार अपनी यह हिस्सेदारी ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के जरिये बेच रही है, जिसकी आधार कीमत (बेस प्राइस) 1,001 रुपये प्रति शेयर तय की गई है. इसके माध्यम से सरकार की 5,020 करोड़ रुपये जुटाने की योजना है.

ओएफएस के लिए फ्लोर प्राइस 1001 रुपये प्रति इक्विटी शेयर तय किया गया है. ये ऑफर फॉर सेल 27-28 अगस्त तक खुला रहेगा. बता दें कि ओएफएस का इस्तेमाल शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों के प्रमोटर्स अपनी हिस्सेदारी को कम करने के लिए करते है. सेबी के नियमों के मुताबिक जो भी कंपनी ओएफएस जारी करना चाहती है, उसे जारी करने से दो दिन पहले इसकी सूचना सेबी के साथ-साथ नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) को देनी होती है.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया एचएएल ने विनियामकी हलफनामे में कहा है कि ओएफएस के माध्यम से सरकार ने 33,438,750 इक्विटी शेयरों को बेचने का प्रस्ताव रखा है, जो एचएएल में सरकार के कुल शेयर का 10 फीसदी हिस्सा है. इसके साथ ही सरकार ने 16,719,375 इक्विटी शेयरों को भी बेचने का प्रस्ताव रखा है, जो कि पांच फीसदी हैं.

हिंदुस्तान एयरनॉटिक्स ने 31 मार्च 2020 को समाप्त वित्त वर्ष में 21,100 करोड़ रुपये का कारोबार किया था. इससे पिछले वित्त वर्ष 2018-19 में कंपनी का कारोबार 19,705 करोड़ रुपये था. हालांकि कंपनी के यह आंकड़े अस्थायी और गैर-लेखापरीक्षण किए हुए हैं. कंपनी ने एक बयान में कहा था कि 2019-20 में उसके सूचीबद्ध होने के बाद लगातार दूसरी बार उसके राजस्व में करीब सात फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है.

कंपनी ने कहा था कि 2019-20 के दौरान नकदी की कमी, परिचालन में रुकावट और कर्मचारियों की हड़ताल के बावजूद उसका प्रदर्शन बेहतर रहा है. इस दौरान कंपनी ने 31 नए विमानों व हेलीकॉप्टरों और 117 नए इंजनों का निर्माण किया. वहीं 199 विमानों और हेलीकॉप्टरों की ओवरहॉलिंग और 490 इंजनों का रखरखाव किया गया.

एचएएल में सरकार की 89.97 फीसदी हिस्सेदारी है, जिसे मार्च 2018 में सूचीबद्ध किया गया था. एचएएल एक नवरत्न कंपनी है. जून 2007 में इसे ये दर्जा मिला था. उत्पादन के लिहाज से यह रक्षा क्षेत्र की सबसे बड़ी सरकारी कंपनी है.

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