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भारत की इजरायल से दो और फाल्कन एरियल वार्निंग सिस्टम खरीदने की तैयारी लगभग पूरी

तर्कसंगत

mage Credits: NDTV/Zee News

August 28, 2020

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सरकार वायुसेना के लिये दो फाल्कन हवाई चेतावनी एवं नियंत्रण प्रणाली (Falcon Aerial Warning and Control System) इजराइल  से करीब एक अरब डॉलर में खरीदने को मंजूरी देने के अंतिम चरण में है.

हिंदुस्तान टाइम्स‘ की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने पिछले हफ्ते ही प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी और अब आखिरी मुहर के लिए इसे सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) के सामने रखा गया है।

 

AWACS और उसकी खूबी

AWACS लॉन्ग रेंज रडार सर्विलांस सिस्टम होता है जिसका इस्तेमाल वायु सुरक्षा के लिए किया जाता है। ये लगभग 370 किलोमीटर तक की दूरी में किसी भी वायु गतिविधि को पकड़ सकता है। AWACS काफी नीचे उड़ान भर रहे विमानों को भी पकड़ सकता है और किसी भी मौसम में काम करने में सक्षम है। इसमें लगा हुआ कंप्यूटर दुश्मनों की कार्रवाई और उनकी गतिविधियों को रिकॉर्ड करता है। इसे विरोधी पकड़ नहीं सकते है।

चीन और पाकिस्तान के पास है हमसे ज़्यादा

टाइम्स ऑफ़ इंडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय वायुसेना के पास अभी पांच AWACS हैं। इनमें से तीन फॉल्कन AWACS हैं, वहीं दो को DRDO के रडार की मदद से विकसित किया गया है।

भारत के मुकाबले चीन के पास 28 और पाकिस्तान के पास 7  AWACS हैं, जिनका वे युद्ध की स्थिति में हवाई सुरक्षा के लिए कर सकते हैं। पड़ोसियों के मुकाबले कम AWACS होने के कारण भारत में पिछले कुछ समय से इनकी संख्या बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही थी।

बालाकोट के बाद ज़रूरत

लाइव मिंट के मुताबिक अधिकारियों के अनुसार, ज्यादा AWACS होने की जरूरत असल में बालाकोट एयर स्ट्राइक के के बाद महसूस की गई थी क्योंकि पाकिस्तान अपने AWACS को 24*7 उत्तर और दक्षिण के सेक्टरों में तैनात करने में समर्थ रहा था, जबकि भारत दोनों जगहों को प्रतिदिन केवल 12 घंटे ही कवर कर सका।

अब LAC पर चीनी सेना के आक्रामक रवैये और भारतीय सीमा में अतिक्रमण और घुसपैठ के बाद AWACS की और ज्यादा जरूरत महसूस की गई।

इजराइली ‘अवाक्स’ के अलावा वायुसेना के पास फिलहाल दो स्वदेश विकसित हवाई पूर्व चेतावनी एवं नियंत्रण (एईडब्ल्यू ऐंड सी) प्रणाली भी है. इसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने विकसित किया हे. बालाकोट में भारतीय वायुसेना की कार्रवाई पर पाकिस्तान द्वारा की गई प्रतिक्रिया के बाद वायुसेना ने सरकार को दो और फाल्कन अवाक्स खरीदने की प्रक्रिया तेज करने की जरूरत से अवगत कराया था, ताकि हवाई रक्षा के क्षेत्र में कमियों को दूर किया जा सके.

 रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल के दो फॉल्कन रडार की कीमत लगभग एक अरब डॉलर होगी, वहीं बाकी के एक अरब डॉलर इनके लिए रूसी A-50 प्लेटफॉर्म खरीदने में खर्च होंगे। रडार और प्लेटफॉर्म को इजरायल में जोड़ा जाएगा और पूरे सिस्टम की डिलीवरी में दो से तीन साल का समय लग सकता है। CCS अगले हफ्ते इस पूरे प्रस्ताव को मंजूरी दे सकती है।

 

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