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सुदर्शन न्यूज़ के ‘UPSC जिहाद’ के दावे पर आईएएस और आईपीएस एसोसिएशन का फूटा गुस्सा

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Image Credits: Wikimedia

August 28, 2020

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भारतीय पुलिस सेवा (IPS) एसोसिएशन ने 28 अगस्त को सुदर्शन न्यूज के प्रमुख सुरेश चव्हाणके की आलोचना उनकी एक ट्वीट के लिए की जिसमें उन्होनें सिविल सर्विस में मुसलमानों की बढ़ती संख्या पर सवाल उठाते हुए एक शो का प्रचार किया था. साथ ही दावा किया था कि वो इस बात का अपने शो पर पर्दाफाश करेंगे.

 

 

समाचार चैनल सुदर्शन न्यूज ने गुरुवार को 28 अगस्त को प्रसारित होने वाले अपने एक शो का ट्रेलर जारी किया है. इसमें चैनल के एडिटर-इन-चीफ सुरेश चव्हाणके ‘नौकरशाही में मुसलमानों की घुसपैठ के षड्यंत्र का बड़ा खुलासा’ करने का दावा कर रहे हैं.

 

ट्रेलर सामने आने के बाद से ही इसे लेकर चौतरफा आलोचना शुरू हो गई है और कार्यक्रम का लहजा सांप्रदायिक होने के कारण इस पर तत्काल कार्रवाई की मांग की जा रही है.

टीज़र में वो पूछते दिख रहे हैं कि “हाल ही में मुस्लिम IPS और IAS अधिकारियों की संख्या कैसे बढ़ी है?”  “क्या होगा अगर ‘जामिया के जिहादी’ देश में सत्ता के पदों पर आसीन हो जाए?”

चव्हाणके ने 26 अगस्त को हैशटैग ‘यूपीएससी जिहाद’ के साथ सिविल सर्विसेज में “मुसलमानों की घुसपैठ” पर “एक्सपोज़” कहते हुए आगामी शो का प्रोमो ट्वीट किया था।

भारतीय पुलिस फाउंडेशन ने भी वीडियो पर प्रतिक्रिया दी और इसे शुद्ध जहर के रूप में संदर्भित किया।

उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘आईएएस/आईपीएस में शामिल होने वाले अल्पसंख्यक व्यक्तियों के खिलाफ नोएडा के टीवी चैनल पर चलाई जा रही हेट स्टोरी खतरनाक कट्टरता है. हम इसे रीट्वीट नहीं कर रहे हैं क्योंकि यह पूर्णतया जहर है. हमें उम्मीद है कि न्यूज ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड अथॉरिटी, यूपी पुलिस और संबंधित सरकारी अथॉरिटी सख्त कार्रवाई करेगी.’

जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय ने भी ट्वीट किया

वहीं, सुरेश चव्हाणके ने आईपीएस एसोसिएशन के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है और कहा कि मुद्दे को जाने बगैर वे इस तरह की टिप्पणी कर रहे हैं. चव्हाणके ने कहा है कि यदि संगठन चाहता है तो वे उनके शो में आकर अपनी बात रख सकते हैं.

भारत में विभिन्न सिविल सेवाओं की परीक्षाओं की जिम्मेदारी केंद्रीय लोक सेवा आयोग की है, जो राष्ट्रीय स्तर पर एक लंबी प्रक्रिया में इन्हें आयोजित करवाता है. भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) और भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) में जाने के इच्छुक उम्मीदवार इनमें हिस्सा लेते हैं.

हालांकि इन परीक्षाओं में उम्र, शैक्षणिक योग्यता, इम्तिहान देने के प्रयासों के बारे में कई नियम हैं, लेकिन किसी भी धर्म के भारतीय इसमें भाग ले सकते हैं.

यहां तक कि यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर सिविल सेवा परीक्षा के विषयों की लिस्ट में इस्लामिक स्टडीज का उल्लेख नहीं है. यहां यूपीएससी के विषयों की लिस्ट दी गई है, जिससे यह साबित होता है कि इस्लामिक स्टडीज को यूपीएससी सिलेबस में शामिल करने का दावा करने वाली वायरल खबर फेक और निराधार है.

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