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‘वन नेशन वन इलेक्शन’ के लिए कॉमन मतदाता सूचि की तैयारी में मोदी सरकार

तर्कसंगत

Image Credits: News18

August 30, 2020

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी कई बार देश में एक साथ चुनाव करवाने की बात कह चुके हैं। इसके लिए धीरे-धीरे अब सरकार कदम भी आगे बढ़ा रही है। आगामी दिनों में लोकसभा, विधानसभा और निकाय चुनावों में मतदाता सूची एक हो सकती है। इस पर तेजी से काम चल रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस महीने एक बैठक भी की थी, जिसमें इसको लेकर विस्तार से चर्चा हुई।

 प्रधानमंत्री मोदी के प्रधान सचिव पीके मिश्रा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में लोकसभा और विधानसभा से लेकर स्थानीय निकायों आदि के चुनाव के लिए एक कॉमन मतदाता सूची तैयार करने की संभावनाओं पर विचार किया गया।

दो विकल्प पर चर्चा

इंडियन एक्सप्रेस पर छपी रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक में दो विकल्पों पर चर्चा की गई।

पहला विकल्प अनुच्छेद 243K और 243ZA में संवैधानिक संशोधन करना है ताकि इससे पूरे देश में चुनावों के लिए एक ही मतदाता सूची अनिवार्य हो जाए।दूसरा विकल्प है यह राज्य सरकारों को इस बात के लिए राजी कर लिया जाए वो अपने कानूनों में बदलाव करते हुए स्थानीय निकायों और पंचायतों के लिए चुनाव आयोग की मतदाता सूची को स्वीकार कर लें।सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट सचिव राजीव गौबा, विधान सचिव जी. नारायण राजू, पंचायती राज सचिव सुनील कुमार और चुनाव आयोग के तीन सदस्यों ने इस चर्चा में हिस्सा लिया था।

क्या है इन अनुच्छेद में?

 

आपको बता दें कि अनुच्छेद 243 K और 243 ZA पंचायत और निकाय चुनाव से संबंधित है। इसके तहत राज्य चुनाव आयोग को इस चुनाव में मतदाता सूची से लेकर तमाम चीजों की शक्तियां मिलती हैं। वहीं अनुच्छेद 324 (1) चुनाव आयोग को संसद और विधानसभा चुनाव को लेकर सारी शक्तियां देता है। आम भाषा में कहें तो राज्य चुनाव आयोग पंचायत और निकाय चुनावों की मतदाता सूची तैयार करने के लिए स्वतंत्र है। इसमें केंद्रीय चुनाव आयोग किसी तरह का दखल नहीं दे सकता है।

फिलहाल अधिकतर राज्य अपने यहां पंचायत और स्थानीय निकायों के चुनावों के लिए केंद्रीय चुनाव आयोग की तरफ से जारी की गई मतदाता सूची का इस्तेमाल करते हैं।हालांकि, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा, असम, मध्य प्रदेश, केरल, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर इन चुनावों के लिए अपनी अलग मतदाता सूची का उपयोग करते हैं।बैठक में कैबिनेट सचिव को राज्यों से सलाह-मशविरा कर अगला कदम उठाने का सुझाव देने को कहा गया है।कॉमन मतदाता सूची बनाने का वादा भाजपा ने अपने चुनावी घोषणापत्र में किया था।

यह पार्टी के उस वादे की दिशा में एक कदम है, जिसमें भाजपा ने पूरे देश में एक साथ लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय निकायों के चुनाव कराने की बात कही है।हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब कॉमन मतदाता सूची को लेकर चर्चा हो रही है। विधि आयोग ने 2015 में दी गई अपनी 255वीं रिपोर्ट में भी इसकी बात की थी।वहीं एक ही देश में दो मतदाता सूची होने से भ्रम की भी स्थिति रहती है, क्योंकि कई बार केंद्रीय चुनाव आयोग की सूची में तो आपका नाम रहेगा, लेकिन जब आप राज्य चुनाव आयोग की सूची देंखेगे, तो हो सकता है आपका नाम उसमें से गायब रहे। ये समस्या इसलिए होती है कि क्योंकि दो एजेंसियां एक ही सूची को अलग-अलग ढंग से तैयार करती हैं। वहीं पीएम के प्रधान सचिव पीके मिश्रा अब इस मामले में राज्यों से बात करेंगे। साथ ही उन्हें एक ही मतदाता सूची के लिए राजी करेंगे।

एक पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहा कि कॉमन मतदाता सूची आने से न सिर्फ करदाताओं के पैसों की बचत होगी बल्कि चुनावों के आयोजन में लगी एजेंसियों का भी काम आसान होगा। हालांकि, उन्होंने अलग-अलग राज्यों और केंद्र सरकार के बीच मौजूदा माहौल को देखते हुए इसे लेकर आसानी से सहमति बनने पर संदेह जताया है। उनका कहना है कि इस मुद्दे पर आम सहमति बनाना केंद्र के लिए चुनौतीपूर्ण काम होगा।

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