ख़बरें

वीडियो देखें, कोर्ट के आदेश के बावजूद हैदराबाद और रांची में निकला मुहर्रम का जुलूस

तर्कसंगत

August 31, 2020

SHARES

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में रविवार को कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करते हुए मुहर्रम का जुलूस निकाला गया। इस जुलूस में सैकड़ों लोग शामिल हुए और इस दौरान न केवल सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं, बल्कि कई लोगों ने तो मास्क तक नहीं पहन रखे थे।

सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर पुलिस भी मौजूद थी और लोगों ने उसके सामने ही नियमों की धज्जियां उड़ाईं।

देशभर में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। मार्च से अब तक यहां संक्रमण के कुल मामले 35 लाख से अधिक हो गए हैं, वहीं इस वैश्विक महामारी से मरने वालों की संख्या भी 63 हजार को पार कर गई है। केंद्र सरकार लगातार लोगों से दिशानिर्देशों का पालन करने की अपील कर रही है और सार्वजनिक कार्यक्रमों से बचने के साथ ही सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए भी कह रही है।

 

 

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार ये जुलूस तेलंगाना हाई कोर्ट के उस आदेश का उल्लंघन करते हुए निकाला गया जिसमें उसने कोरोना वायरस महामारी के कारण हैदराबाद में मुहर्रम का जुलूस निकालने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने भी पिछले हफ्ते मुहर्रम का जुलूस निकालने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा था कि इससे अराजकता पैदा होगी और एक समुदाय को कोरोना वायरस फैलाने के लिए निशाना बनाया जाएगा।

‘न्यू इंडियन एक्सप्रेस‘ की रिपोर्ट के अनुसार, मुहर्रम का ‘बीवी का आलम’ जुलूस हैदराबाद के डाबेरपुरा इलाके से शुरू हुआ और चारमीनार, गुलजार हुज और दारुलशिफा से होते हुए चर्मघाट पर खत्म हुआ।

इस जुलूस के साथ सैकड़ों लोग चलते हुए नजर आए और मातम मनाते हुए नजर आए और उनमें से कोई भी सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन नहीं कर रहा था। जुलूस के दौरान किसी में भी कोरोना वायरस के संक्रमण का डर नहीं दिखा।

रांची में भी निकला जुलूस

कोरोना वायरस के फैलते संक्रमण के मद्देनजर लागू निषेधाज्ञा के बावजूद मुहर्रम  का धार्मिक जुलूस निकाले जाने पर लोअर बाजार थाने में एफआइआर दर्ज किया गया है। चर्च रोड के जाफरिया मस्जिद से मुहर्रम का मातमी जुलूस निकाली गई थी। इसे लेकर दंडाधिकारी राकेश वर्मा के आवेदन पर केस दर्ज किया गया है। प्राथमिकी के अनुसार दंडाधिकारी के रूप में राकेश वर्मा की ड्यूटी विधि व्यवस्था को लेकर कर्बला चौक के समीप पुलिस बल के साथ थी।

लेकिन इसी दौरान दिन के करीब एक बजे जफरिया मस्जिद के पास निषेधाज्ञा होने के बावजूद मुहर्रम का जुलूस निकाली गई। प्राथमिकी के अनुसार दंडाधिकारी को इस बात की भी जानकारी मिली कि जुलूस में मौलाना तहजीबबुल हसन, अंजुमन कॉलोनी निवासी नवाब, नन्हे, मल्लाह टोली निवासी नेहाल, कलाल टोली निवासी हैदर, जिसान सहित अन्य लोग धार्मिक जुलूस में शामिल हुए। नामजदों के अलावा 40 से 50 लोगों को आरोपित बनाया गया है।

मुहर्रम इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना होता है। हालांकि, मुसलमानों के लिए ये महिना सबसे पवित्र होता है। मुसलमान समुदाय के लिए यह महीना बेहद ही पाक होता है और इसे गम के महीने के तौर पर मनाया जाता है। शिया मुसलमानों के लिए ये महीना खास महत्व रखता है। वैसे तो इस पूरे महीने को ही खास माना जाता है लेकिन इस महीने का 10वां दिन सबसे अधिक खास होता है, जिसे रोज-ए-अशुरा कहते हैं। इस दिन को मुस्लिम समुदाय मोहम्मद हुसैन के नाती हुसैन की शहादत के तौर पर मनाता है।

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...