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कैग रिपोर्ट: राजस्थान में प्रधानमंत्री आवास योजना में बने 50% घरों में नहीं है शौचालय

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Image Credits: India Today

September 1, 2020

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कैग की एक रिपोर्ट में प्रधानमंत्री आवास योजना- ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के कार्यान्वयन में कमियों का उल्लेख करते हुए यह पाया है कि इस योजना के तहत बने लगभग आधे प्रमाणित घरों में शौचालय नहीं है, जबकि साल 2018 में ही राज्य को ‘खुले में शौच से मुक्त’ घोषित किया गया था.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक राजस्थान में कैग ने सात जिलों- बारां, बीकानेर, भरतपुर, दौसा, जोधपुर, टोंक और उदयपुर की 59 ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना- ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) योजना के तहत बने 590 घरों का अपने अधिकारीयों को भजे कर प्रत्यक्ष रूप से जांच किया और पाया कि 290 घरों (49.15 फीसदी) में शौचालय नहीं है.

गौर करने की बात है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने किसी घर को तभी ‘पूर्ण’ माना जाएगा जब उसमें शौचालय बना होगा और ये ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा साल 2016 में जारी दिशानिर्देशों में कहा गया है.

नियमानुसार इस आवास योजना के लाभार्थियों को स्वच्छ भारत मिशन- ग्रामीण, मनरेगा या अन्य योजना के तहत शौचालय मुहैया कराया जाना था. अब कैग ने अपनी रिपोर्ट में पाया है कि इन घरों में शौचालय नहीं बने हैं.

ये स्थिति तब है जब पूरे राज्य को साल 2018 में खुले में शौच से मुक्त घोषित किया जा चुका है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत राष्ट्रीय स्वच्छता केंद्र का उद्घाटन करते समय कहा कि 60 महीने में करीब-करीब 60 करोड़ भारतीय शौचालय की सुविधा से जुड़ गए। इस साल स्वतंत्रता दिवस समारोह में भी प्रधामंत्री मोदी ने शौचालय बनवाने के उपलब्धियों पर ज़ोर दिया था.

कैग ने घर में बिजली कनेक्शन की भी जांच की और कैग ने अपने सर्वे में यह भी पाया कि 590 घरों में से सिर्फ 232 घरों (39.32 फीसदी) में बिजली का कनेक्शन था. यानी 358 घरों (60.68 फीसदी) में बिजली कनेक्शन नहीं था.

इन लाभार्थियों के पास एलपीजी कनेक्शन न होने पर प्रकाश डालते हुए रिपोर्ट में कहा गया है, ‘590 घरों के संयुक्त भौतिक सत्यापन के दौरान यह भी पुष्टि हुई है कि केवल 399 घरों (67.63 प्रतिशत) में एलपीजी कनेक्शन था और 191 (32.37 प्रतिशत) घरों में एलपीजी कनेक्शन नहीं था.’

इसके अलावा कैग ने पाया है कि 590 में से 517 घरों में पीने के लिए स्वच्छ पानी की व्यवस्था थी. हालांकि इसमें से सिर्फ 26 घरों में पाइप के जरिये पानी की व्यवस्था था. वहीं बाकी के 73 घरों में अभी भी साफ पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन सत्यापित 590 लाभार्थियों में से 391 लाभार्थी योजना के तहत बने पक्के घर में रह रहे थे और बाकी के 183 लाभार्थी अभी इसे रहने के लिए इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं.

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