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एनसीआरबी रिपोर्ट: 2019 में 42,840 किसान, मजदूरों ने की आत्महत्या

तर्कसंगत

September 3, 2020

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देश में बेरोजगारी और आर्थिक तंगी के कारण हर साल आत्महत्याओं के मामले सामने आते हैं।

आपको जानकर हैरानी होगी कि साल 2019 में देश में कुल 1,39,123 लोगों ने आत्महत्या की है। जिसमें 42,840 लोग किसान, खेतीहर मजदूर और दिहाड़ी मजदूर शामिल हैं। उस हिसाब से देखा जाये तो पिछले साल हर दिन तकरीबन 117 किसानों और दिहाड़ी मजदूरों ने आत्महत्या की है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) द्वारा जारी किए गए आपराधिक आंकड़ों में देश की यह भयावह तस्वीर सामने आई है।

10,000 किसानों ने की आत्महत्या

इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार NCRB के रिपोर्ट मं बताया गया है कि साल 2019 में कृषि क्षेत्र से जुड़े कुल 10,281 लोगों ने मौत को गले लगाया है। यह कुल आत्महत्याओं का 7.4 प्रतिशत हिस्सा है। इनमें 5,957 किसान और 4,324 खेतीहर मजदूर थे। इन किसानों में से 5,563 पुरुष और 394 महिलाएं थी। इसी तरह खेतीहर मजदूरों में 3,749 पुरुष और 575 महिलाएं थी।

साल 2018 में कृषि क्षेत्र से जुड़े 10,349 लोगों ने आत्महत्या की थी।

2015 में, NCRB ने आत्महत्या के कारणों सहित किसान आत्महत्याओं पर विस्तृत डेटा प्रकाशित किया था। हालांकि, ब्यूरो द्वारा सोमवार को जारी की गई रिपोर्ट ने इन वर्गीकरणों को छोड़ दिया और इसके बजाय पुरुषों और महिलाओं के मामले में ब्रेक-अप दिया।

रिकॉर्ड के अनुसार कृषि क्षेत्र से जुड़े सबसे अधिक 38.2 प्रतिशत लोगों ने महाराष्ट्र में आत्महत्याएं की है। इसी तरह कर्नाटक में 19.4 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश में 10 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में 5.3 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ तथा तेलंगाना में 4.9 प्रतिशत लोगों ने आत्महत्या की है।

हालांकि, इस अवधि में पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, उत्तराखंड, मणिपुर, चंडीगढ़, दमन और दीव, दिल्ली, केन्द्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप और पुदुचेरी में इस क्षेत्र के किसी भी व्यक्ति ने आत्महत्या नहीं की।

दिहाड़ी मजदूरों ने भी की सबसे ज़्यादा आत्महत्या

रिकॉर्ड के अनुसार साल 2019 में हुई कुल आत्महत्याओं में से सबसे अधिक यानी 23.4 प्रतिशत आत्महत्या दैनिक वेतनभोगियों ने की थी। 2019 में कुल 32,559 दैनिक वेतनभोगियों ने आत्महत्या जैसा गंभीर कदम उठाया था। इसके उलट साल 2018 में 30,132 दैनिक वेतनभोगियों ने आत्महत्या की थी। ऐसे में 2019 में इस श्रेणी में आत्महत्या का ग्राफ बढ़ा है।

इसी तरह 15.4 प्रतिशत गृहिणियां, 11.6 प्रतिशत स्वरोजगार करने वाले, 10.1 प्रतिशत बेरोजगार, 9.1 प्रतिशत पेशेवर या वेतनभोगी, 7.4 प्रतिशत छात्र और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोग और 0.9 प्रतिशत सेवानिवृत्त लोगों ने आत्महत्या की थी।

इसी तरह 14.7 प्रतिशत लोग अन्य व्यक्तियों की श्रेणी में शामिल हैं।

शिक्षित लोगो की संख्या ज़्यादा

NCRB के डाटा से इस बात का भी खुलासा हुआ है कि साल 2019 में आत्महत्या करने के मामले में शिक्षित लोग सबसे आगे रहे हैं। रिकॉर्ड के अनुसार आत्महत्या करने वाले 23.3 प्रतिशत यानी 32,427 लोग मैट्रिकुलेशन या माध्यमिक स्तर तक शिक्षित थे।

इसी तरह 19.6 प्रतिशत यानी 27,323 लोग मध्यम शिक्षित, 16.3 प्रतिशत यानी 22,649 प्राथमिक शिक्षित, 14 प्रतिशत यानी 19,508 उच्च माध्यमिक स्तर, 12.6 प्रतिशत यानी 17,588 निरक्षर और 3.7 प्रतिशत यानी 5,185 स्नातक स्तर या उससे अधिक शिक्षित थे।

4 लाख लोगों ने की आत्महत्या

NCRB के रिकॉर्ड के अनुसार भारत में 2017-2019 के बीच कुल 4,03,526 लोगों ने आत्महत्याएं की हैं।

इनमें सबसे ज्यादा आत्महत्या साल 2019 में 1,39,123 लोगों ने की थी। इसी तरह साल 2018 में 1,34,516 और 2017 में 1,29,887 लोगों ने आत्महत्या की थी। इसके हिसाब से साल 2019 में प्रतिदिन औसतन 381, साल 2018 में 368 और साल 2017 में 355 लोगों ने आत्महत्या की थी। यह देश के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

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