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कोलकाता यूनिवर्सिटी वाहट्स ऍप, मेल के ज़रिये प्रश्नपत्र भेजेगी आप किताब खोल कर लिख लेना, हो गयी परीक्षा !!

तर्कसंगत

Image Credits: HT Bangla

September 4, 2020

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सुप्रीम कोर्ट और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के निर्देश के बाद कलकत्ता यूनिवर्सिटी ने ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन के फाइनल ईयर के स्टूडेंट्स के लिए नई पहल की है। इसके तहत स्टूडेंट्स को अब परीक्षा के लिए कॉलेज नहीं जाना होगा, वे घर बैठे ही परीक्षा दे सकेंगे। संबंधित कालेजों की ओर से स्टूडेंट्स को वॉट्सऐप या मेल के जरिए प्रश्नपत्र भेजे जाएंगे। फर्स्टपोस्ट के मुताबिक स्टूडेंट्स के पास घर बैठे किताब खोलकर उन सवालों का जवाब देने के लिए 24 घंटे का वक्त होगा। परीक्षा की तारीख 1 अक्टूबर से 18 अक्टूबर तय की गयी है।

स्टूडेंट मेल से या वॉट्सऐप के जरिए अपने जवाब भेज सकते हैं। इसके साथ ही दूर-दराज के इलाकों में जहां इंटरनेट, बिजली या कंप्यूटर की सुविधा नहीं है, वहां के स्टूडेंट अपनी कापी लिखकर कॉलेज में जाकर जमा कर सकते हैं। लेकिन, इसके लिए भी 24 घंटे का ही वक्त होगा। वह चाहे तो अपनी कॉपी को स्कैन कर उसे वॉट्सऐप से भी भेज सकते हैं। यही नहीं, स्टूडेंट्स की सहूलियत के लिए ऐसा पहली बार होगा जब उसी कॉलेज के शिक्षक ही अपने स्टूडेंट्स की कॉपियों की जांच करेंगे।

 

ममता बनर्जी नहीं थी राज़ी

हालांकि, पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार कोरोना का हवाला देकर इन परीक्षाओं के आयोजन के पक्ष में नहीं थी। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद परीक्षा करवाना मजबूरी हो गया। जिसके बाद अब यह तरीका अपनाया जा रहा है। सरकार ने इन परीक्षाओं को 1 अक्टूबर से 18 अक्टूबर तक आयोजित कराने और 31 अक्टूबर तक रिजल्ट जारी करने का फैसला किया है। शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और राज्य के तमाम विश्वविद्यालयों के वाइस-चांसलरों की बैठक में यह फैसला लिया गया है।

 

इस परीक्षा का कोई मतलब नहीं है

हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार  शिक्षकों के एक वर्ग का कहना है कि इससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होगी। कलकत्ता विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के महासचिव एस.चौधरी कहते हैं, “मौजूदा हालात में केंद्र और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए परीक्षा आयोजित करना अनिवार्य है। लेकिन, ओपन बुक तरीके से किसी स्टूडेंट के बारे में सही आकलन करना मुश्किल है। इसके अलावा स्टूडेंट्स की कॉपियां उसी कॉलेज के शिक्षक ही देखेंगे। इससे मूल्यांकन प्रभावित होगा।

 

ये परीक्षा के अलावा और कुछ भी हो सकता है

प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रिंसिपल अमल कुमार मुखोपाध्याय ने हालांकि कहा कि घर से पेपर लिखना एक परीक्षा के अलावा कुछ भी हो सकता है। “इतनी जल्दी की जरूरत कहाँ थी? संबंधित अधिकारी COVID-19 की स्थिति में सुधार के लिए थोड़ी देर इंतजार कर सकते थे। लिखित परीक्षा से अधिक महत्वपूर्ण कोरोनोवायरस है” मुखोपाध्याय ने कहा।

 

वाईस चांसलर की सफाई

छात्रों के लिए ‘ओपन बुक सिस्टम’ शुरू करने की  फैसले पर सवाल उठने लगे, जिसके बाद इसके कुलपति ने स्पष्ट किया कि ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है, और इस मुद्दे पर उनके बयान को गलत ठहराने के लिए मीडिया के एक वर्ग को दोषी ठहराया है।

“ओपन बुक परीक्षा प्रणाली एक तकनीकी शब्द है। मैंने कभी इसका इस्तेमाल नहीं किया, लेकिन मीडिया के एक हिस्से ने मेरी कही गयी बात को गलत तरीके से बयान किया। मैंने कहा कि सभी संबद्ध कॉलेजों को परीक्षा शुरू होने के निर्धारित समय से कुछ समय पहले मेल पर प्रश्न पत्र मिल जाएगा। फिर वे उम्मीदवारों को मेल पर व्हाट्सएप पर व्यक्तिगत रूप से पेपर भेज सकते हैं, ”उन्होनें पीटीआई को बताया।

उन्होंने कहा कि छात्रों को भी मेल या व्हाट्सएप पर जवाब वापस भेजना होगा।

उन्होनें आगे कहा “यदि नेट कनेक्टिविटी में कोई समस्या है, तो वह 24 घंटों के भीतर संबंधित शीट्स पर उत्तर लिख सकते हैं और उन्हें एक सीलबंद कवर में जमा कर सकते हैं। खुली किताब प्रणाली की कोई अवधारणा ही नहीं है …“साथ ही, यह 24-घंटे की समय का मतलब यह नहीं है कि छात्रों को दूसरों से परामर्श करने या किताबों को संदर्भित करने के लिए मिलता है। यदि किसी छात्र ने इन सभी महीनों में इस विषय का अध्ययन नहीं किया है, तो यह उसके लिए संभव नहीं है कि वह किसी प्रश्न का उत्तर खोज सके और तुरंत लिख सके, ”कुलपति ने जोर दिया।

 

विद्यार्थियों में ख़ुशी की लहर

विश्वविद्यालय के फैसले से स्टूडेंट्स में खुशी है, लेकिन खुद जाकर कॉलेज में कॉपी जमा करने वाली बात से उन्हें आपत्ति है। उत्तर 24-परगना जिले के बांग्लादेश सीमा से सटे बनगांव इलाके में रहने वाले विनय कुमार मंडल कहते मीडिया से कहते हैं, “हमारे इलाके में बिजली और इंटरनेट की दिक्कत है। ऐसे में कॉपी जमा करने के लिए यहां से तीन-चार घंटे का सफर कर कोलकाता जाना बहुत मुश्किल है। अभी न तो लोकल ट्रेनें चल रही हैं और न ही कोई बस। हर परीक्षा के बाद टैक्सी किराए पर लेकर कोलकाता जाना-आना बेहद खर्चीला है। ऊपर से हर परीक्षा के 24 घंटे के भीतर ऐसा करना होगा। इससे बेहतर होता कि ऑफलाइन परीक्षा के लिए कालेज में ही बुला लिया जाता।

लेकिन कालेजों के आस-पास रहने वाले स्टूडेंट्स को इस तरीके से कोई परेशानी नहीं है। इसकी वजह यह है कि शहरों में बिजली या इंटरनेट की कोई खास समस्या नहीं है। कोलकाता के एक कालेज में एम.एम.अंतिम वर्ष के नयन पाल बताते हैं, “हम घर बैठे परीक्षा दे सकते हैं। इससे संक्रमण का खतरा नहीं रहेगा।

 

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की थी याचिका

ज्ञात हो कि यूजी और पीजी की लास्ट ईयर / सेमेस्टर की परीक्षाओं को स्थगित करने की मांग वाली याचिका सुप्रीमकोर्ट से ख़ारिज होने के बाद वेस्ट बंगाल गवर्नमेंट ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों को लास्ट ईयर की इन परीक्षाओं को 01 अक्टूबर से 18 अक्टूबर के बीच आयोजित कराने और परीक्षा परिणाम 31 अक्टूबर तक जारी करने के लिए कहा था.

 

तर्कसंगत का तर्क

भारतीय शिक्षा प्रणाली में ओपन बुक एग्जाम का सिस्टम ही समझ से परे है। अक्सर इस तरह के स्थिति में उत्तर पुस्तिका की जांच सही से नहीं हो पाती। कारण कि मूल्यांकन करने वालों को भी पता है की सब ने किताब से देख कर जवाब दिए होंगे तो उस प्रश्न के जवाब की समझ किसे ज़्यादा बेहतर से है उसकी समझ आप नहीं लगा सकते। नतीजा कि सब को एक जैसे अंक दे दिए जाते हैं।

एक सवाल ये भी है कि अगर प्रश्नपत्र ऑनलाइन भेजे ही जा रहे हैं तो उन्हें पूरा कर के भेजने में 24 घंटे का समय क्यों दिया जा रहा है? अमूमन परीक्षा 3 स 4 घंटे में समाप्त होती है तो उस स्थिति में 24 घंटे का समय देना काफी ज़्यादा है। कोलकाता से दूर रहने वाले छात्रों के लिए जहाँ इंटरनेट की व्यवस्था नहीं है उन्हें कम समय सीमा में जवाब भेजने के निर्देश से दिक्कत आ सकती है।

 

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