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रिपोर्ट: कोरोना के कारण 15.5 लाख करोड़ रुपये के कॉरपोरेट लोन जोख़िम में

तर्कसंगत

September 9, 2020

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कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन की वजह से कॉरपोरेट सेक्टर का 15.52 लाख करोड़ रुपये का कर्ज जोखिम में आ गया है. यह राशि उद्योग जगत को दिए गए बैंकों के कुल कर्ज का 29.4 फीसदी है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ऋण पुनर्गठन के लिए वित्तीय मापदंड बनाने वाली केवी कामथ समिति, ने कहा है कि बैंकिंग ऋण का 23.71 लाख करोड़ रुपये या बैंकिंग क्षेत्र के ऋण का 45 प्रतिशत है, कोविड-19 के अर्थव्यवस्था में आने से पहले ही ख़तरे में था।

इसका मतलब है कि बैंकिंग क्षेत्र के 37 .72 लाख करोड़ रुपये यानि कि लगभग 72 प्रतिशत ऋण खतरे में है। यह कुल गैर-खाद्य बैंक ऋण का लगभग 37 प्रतिशत है।

कामथ पैनल ने कहा है कि खुदरा व्यापार, थोक व्यापार, सड़क और वस्त्र जैसे क्षेत्रों में कंपनियों को मंदी का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक कोविड के पहले ही  एनबीएफसी, बिजली, इस्पात, रियल एस्टेट और अन्य कई सेक्टर मंदी से जूझ रहे थे।

महामारी से प्रभावित 15.5 लाख करोड़ रुपये के ऋण में से सबसे ज्यादा खतरा खुदरा और थोक व्यापार को है, क्योंकि इनके 5.42 लाख करोड़ रुपये के बैंक लोन प्रभावित हुए हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि सड़कों के क्षेत्र में 1.94 लाख करोड़ रुपये और कपड़ा क्षेत्र के लिए 1.89 लाख करोड़ रुपये के ऋण भी प्रभावित हुए हैं। महामारी से प्रभावित होने वाले अन्य प्रमुख उद्योगों में और जिन बैंकों के पास निवेश का जोखिम है, उनमें इंजीनियरिंग (1.18 लाख करोड़ रुपये), पेट्रोलियम और कोयला उत्पादन (73,000 करोड़ रुपये), बंदरगाह (64,000 करोड़ रुपये), सीमेंट (57,000 करोड़ रुपये) शामिल हैं। रसायन (54,000 करोड़ रुपये) और होटल और रेस्तरां (46,000 करोड़ रुपये) है।

रिपोर्ट के अनुसार, कोविड-19 से पूर्व जो क्षेत्र खतरे में रहे, उनमें से बैंकों के प्रमुख बकायेदारों में एनबीएफसी (7.98 लाख करोड़ रुपये), बिजली (5.69 लाख करोड़ रुपये), स्टील (2.66 लाख करोड़ रुपये), रियल एस्टेट (2.29 लाख करोड़ रुपये) और निर्माण (1,03 लाख करोड़ रुपये) तथा अन्य शामिल हैं.

वित्तीय क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि विभिन्न क्षेत्रों में कोविड के बाद पूँजी को खतरा समझ में आता है मगर कोविड से पहले बैंकिंग क्षेत्र का लगभग 45 प्रतिशत कर्ज के खतरे में था, एक प्रमुख चिंता का विषय है।

“इस रिपोर्ट में दिखाया गया है कि कुल ऋण जोखिम का 45 प्रतिशत पूर्व-कोविद के तनाव में था। यह समझने में एक उपयोगी अभ्यास है कि कैसे व्यवस्थित रूप से हम इस स्थिति को हल कर सकते थे” श्रीनाथ श्रीधरन (वरिष्ठ बीएफएसआई अफसर) ने  इंडियन एक्सप्रेस से कहा।

 

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