पर्यावरण

रिपोर्ट: जम्मू कश्मीर, लद्दाख में 2000 से 2012 के बीच 70.32 गीगा टन बर्फ पिघल गई

तर्कसंगत

Image Credits: India TV

September 9, 2020

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हिमालयी रेंज में स्थित कश्मीर और लद्दाख में ग्लेशियर को लेकर चिंताजनक बात सामने आई है। एक स्टडी में पता चला है कि हिमालय में 1,200 से अधिक ग्लेशियर साल 2000 और 2012 के बीच औसतन 35 सेंटीमीटर के दर से पिघल रहे हैं।

इसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख  प्रदेशों में स्थित करीब 12,243 ग्लेशियर बड़ी तेजी से पिघल रहे हैं।

ग्लेशियर पर किए गए अध्ययन के अनुसार ये सभी ग्लेशियर प्रत्येक वर्ष औसतन 35 सेंटीमीटर तक पिघल रहे हैं और ग्लेशियरों का इस रफ्तार से पिघलना बड़ी चिंता का विषय है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक जर्नल ऑफ साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित इस अध्ययन को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख इलाके में नियंत्रण रेखा (LOC) और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के क्षेत्रों सहित सभी क्षेत्रों में किया गया था।

रिपोर्ट के लिए 12,243 ग्लेशियर की प्रवृत्ति, बदलाव और स्थिति के बारे में रिसर्च किया गया है। इसके लिए सैटेलाइट डाटा का भी इस्तेमाल किया गया है। ऐसे में इसमें गलती की गुंजाइश बहुत कम है।

ये रिसर्च  कश्मीर यूनिवर्सिटी के जियो इंफार्मेटिक डिपार्टमेंट के तारिक अब्दुल्ला, डॉ इरफान रशीद और प्रोफेशर शकील रोमशो द्वारा किया गया है. अध्ययन में सामने आया है कि साल 2000 से 2012 के बीच में हिमालय की पीर पंजाल रेंज में ग्लेशियर सबसे अधिक तेजी यानी प्रति वर्ष एक मीटर के हिसाब से पिघल रहे हैं। काराकोरम रेंज के ग्लेशियरों में यह रफ्तार सालाना 10 सेंटीमीटर की है।

यह अध्ययन रिपोर्ट यूनाइटेड किंगडम (UK) आधारित नेचर रिसर्च साइंटिफिक जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

कश्मीर यूनिवर्सिटी के जियो इंफार्मेटिक डिपार्टमेंट के तारिक अब्दुल्ला, डॉ इरफान रशीद सहित अनुसंधान टीम ने NASA द्वारा साल 2000 में और जर्मन अंतरिक्ष एजेंसी DLR द्वारा 2012 में किए गए दो उपग्रह प्रेक्षणों का उपयोग किया। उन्होंने पूरे ऊपरी सिंधु बेसिन पर ग्लेशियर की मोटाई में परिवर्तन का निर्धारण करने के लिए 12,000 से अधिक ग्लेशियरों को मिलाकर इस डाटा का पता लगाया है। यह इस तरह का दुनिया का पहला अध्ययन है।

रोमशो ने बताया कि अध्ययन के अनुसार जम्मू-कश्मीर और लद्दाख क्षेत्र में 2000 से 2012 के बीच कुल 70.32 गीगा टन बर्फ पिघल गई। यदि यह स्थिति जारी रही तो आने वाले समय में भारी पेयजल संकट से जूझना पड़ेगा।

रोमशो ने स्टडी में बताया कि कुछ ग्लेशियर काराकोरम रेंज में आगे बढ़ रहे हैं या स्थिर हैं। ग्रेटर हिमालयन रेंज, जंस्कार रेंज, शम्सबरी ग्लेशियर, लेह पर्वतमाला जैसी अन्य पर्वत श्रृंखलाओं में ग्लेशियर पिघल रहे हैं, लेकिन दर परिवर्तनीय है। शम्सबरी ग्लेशियर की 128 सेंटीमीटर मोटी परत हर साल पिघल जाती है। ग्लेशियर की परत हिमालय की जंस्कार रेंज में भी कम हो रही है। इस क्षेत्र में हर साल 117 सेंटीमीटर परत पिघल रही है।

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