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LIC में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच सकती है सरकार, छोटे निवेशकों को मिलेगा डिस्काउंट

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Image Credits: Business Line

September 9, 2020

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केंद्र सरकार ने देश की सबसे बड़ी इंश्योरेंस कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) का आईपीओ लाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। सरकार LIC की 25 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के साथ ही छोटे निवेशकों और कर्मचारियों को डिस्काउंट देने पर विचार कर रही है। यह देश का सबसे बड़ा आईपीओ साबित हो सकता है।

CNBC आवाज़ को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, देश की सरकारी बीमा कंपनी एलआईसी का आईपीओ भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO साबित हो सकता है। भारतीय जीवन बीमा निगम की 25 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की योजना के तहत सरकार रिटेल इन्वेस्टर्स को बोनस और डिस्काउंट देने पर विचार कर रही है। डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज ने एलआईसी में हिस्सेदारी बेचने का ड्राफ्ट तैयार किया है और इसे सेबी, इरडा और नीति आयोग समेत संबंधित मंत्रालयों के पास भेजा गया है।

मनी कण्ट्रोल के मुताबिक सरकार LIC में अलग अलग किस्तों में कुल 25% तक हिस्सेदारी बेच सकती है. लिस्टिंग के बाद 3 साल के भीतर minimum public sharholding 25% करना जरूरी है. शुरुआत में ही LIC बोनस शेयर भी जारी कर सकती है। रिटेल इन्वेस्टर्स और कर्मचारियों के लिए 10% तक डिस्काउंट मिल सकता है। LIC Act 1956 में Capital और Management से जुड़े 6 बड़े बदलाव का प्रस्ताव है। कैबिनेट ड्राफ्ट नोट जारी, जल्द मंजूरी मिलेगी। संसद के अगले सत्र में मनी बिल के तौर पर एक्ट में बदलाव पेश हो सकता है।

डेक्कन क्रॉनिकल ने रिपोर्ट में बताया कि छोटे निवेशकों और कर्मचारियों के लिए 5 प्रतिशत शेयर रिजर्व किए जा सकते हैं। हालांकि, शेयर्स को रिजर्व रखने का फैसला कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा। प्रारंभिक दिनों में बोनस शेयर की सुविधा भी दी जा सकती है। एलआईसी की हिस्सेदारी बेचने के लिए सरकार द्वारा एलआईसी एक्ट 1956 में भी बदलाव किया जाएगा। यह एक स्वायत्त संस्था है और इसका संचालन एलआईसी एक्ट 1956 के तहत किया जाता है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद एलआईसी एक्ट में संशोधन के प्रस्ताव को सरकार संसद में पेश करेगी।

मोदी सरकार को कोरोना काल में एलआईसी के आईपीओ से बड़ी रकम जुटने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि इस दौर में कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च बढ़ने और टैक्स में कमी होने के अंतर की भरपाई एलआईसी की हिस्सेदारी को बेचने से पूरी हो जाएगी। शायद यही वजह है कि सरकार ने एलआईसी की 25 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का फैसला लिया है, जबकि पहले 10 फीसदी स्टेक ही बेचने की योजना थी।

 

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