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मिलिए पुणे की सस्टेनेबिलिटी आर्टिस्ट से जो लगी है पर्यावरण को बचाने में — वन टी बैग एट ए टाइम!

Sonali

September 10, 2020

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कहते है कला की कोई सीमा या परिभाषा नहीं होती — उसी प्रकार कलाकारों की कोशिशें भी असीम होती हैं — कोई हीरे-मोतियों का इस्तेमाल करता हैं तो कोई कचरे का! 

ॠतु दुआ एक ऐसी ही कलाकार हैं जिन्होंने स्थायी कला (sustainable art) के क्षेत्र में अपना लोहा मनवाया है और यह साबित किया हैं कि सुंदरता और कला हर चीज़ में हैं — बस देखने वाले के नज़रिये पर निर्भर करता है। आज, यह सुपर वुमन न केवल फेंकी हुई चाय बैग (tea bag) से कला का निर्माण करती है, बल्कि अपने चैनलों और प्रदर्शनियों के माध्यम से टिकाऊ कला और हरी कला (sustainable art and green art) को बढ़ावा भी देती है। उन्हें ‘आर्टिस्ट ऑफ़ दी ईयर 2019’ का ख़िताब भी दिया गया है।

 

जीवन में कला का प्रवेश 

कला के प्रति ॠतु की रुचि उनके माता-पिता के ज़रिये बचपन से ही हो गयी थी। बाकि बच्चों की तरह उन्हें भी नई चीजें बनाना बेहद पसंद था। उन्होंने इंग्लिश में ऑनर्स और इकोनॉमिक्स में मास्टर्स कर बैंकिंग सेक्टर में नौकरी की। शादी के कुछ सालों बाद वे विदेश चली गईं और पढ़ाने लगीं। वे एक देश से दूसरे देश जाती रही और अपनी नौकरी भी बदलती रही — लेकिन एक भी दिन ऐसा नहीं था कि वे कला से अछूती रही हो। वे हमेशा कुछ न कुछ बनाती रहती और फिर एक दिन, उन्होंने अन्य सभी नौकरियाँ छोड़ दीं और वही करना जारी रखा जो उन्हें पसंद था — कला द्वारा निर्माण करना। 

 

 

सस्टेनेबल आर्ट को अपनाना

ऋतु को धरती से बेहद प्यार है। वे ख़ुद को प्रकृति से प्यार करने वाली, पेड़ो को गले लगने वाली इंसान बताती हैं, जिन्हें जैविक उपचार, पृथ्वी तत्व, जेन जैसे घरेलू स्थान, योग और ध्यान बेहद पसंद है। उनके लिए प्रकृति अनमोल और चमत्कारिक है। उन्हें नयी जगह घूमना, जगह की विशिष्टता का पता लगाना, उसकी संस्कृति, परंपराएँ, भाषाएँ, जातीय घटक, भोजन, अटारी, हस्तशिल्प, जलवायु, इलाक़ा आदि के बारे में जानना बेहद पसंद हैं। उन्हें भुला दिए गये विचारों को अपनी कला में बाँधना अच्छा लगता है। “मुझे लगता है कि एक कलाकार का काम संभावनाओं का प्रदाता होना होता है — लोगों को वह चीजें दिखाना जिन्हें वे जानते नहीं हैं। कला और स्थिरता को जोड़ने के लिए रचनात्मकता और अपरंपरागत दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है, एक चुनौती जो मुझे पसंद है। मैं अपने दैनिक जीवन में भी कला और सस्टेनेबिलिटी के माध्यम से पुराने-फेंके चीज़ों का पुनर्नवीनीकरण करती हूँ,” ॠतु सस्टेनेबल आर्ट के लिए उनका प्यार पूछने पर कहती है। 

 

कला के ज़रिये बदलाव लाना 

“मैं प्रकृति से अपनी सारी प्रेरणा और संदर्भ प्राप्त करती हूँ। मुझे पत्तियों, टहनियों, शाखाओं, जड़ों, बीजों और फूलों का अपनी कला में उपयोग करने का बहुत शौक है। मुझे कूड़े के भाव में फेंके जाने वाले टी बैग्स से अनूठी कला बनाना बड़ा पेचीदा, चुनौतीपूर्ण और दिलचस्प लगता है। इन फेंके हुए टी बैग्स को कलाकारी के रूप में एक नया और असाधारण जीवन देना एक चित्ताकर्षक प्रक्रिया है,” ऋतु मानती हैं कि सस्टेनेबल आर्टिस्ट्स का काम एक गंभीर उद्देश्य और मिशन है। 

 

 

भारत में सस्टेनेबल आर्ट की स्थिति

शहरी भारत (लगभग 377 मिलियन लोग) प्रत्येक वर्ष 62 मिलियन टन नगरपालिका ठोस अपशिष्ट (Municipal Solid Waste-MSW) उत्पन्न करता है। इसमें से लगभग 43 मिलियन टन (70%) एकत्र किया जाता है और 11.9 मिलियन टन (20%) को रीसायकल किया जाता है। लैंडफिल साइटों में लगभग 31 मिलियन टन (50%) डंप किया जाता है। तो स्थिति काफ़ी गंभीर है। ऐसे कई कलाकार हैं जो सस्टेनेबिलिटी के प्रति जागरूकता पैदा करने और हमारी धरती के प्रति प्यार और चिंता दिखाने की दिशा में काम कर रहे हैं। 

 

जब चाय की पत्तियों ने बदली जीवन की दिशा

ॠतु रीसाइकल्ड टी बैग्स के साथ की अपनी यात्रा, अपनी कहानी ‘मेरी चाय तमाशा’ (My Chai Tamasha) को याद करते हुए कहती हैं, “मुझे उन सामग्रियों की अप्रत्याशितता से प्यार है जिन्हें हम कचरा समझ कर फेंक देते हैं। उनकी अजीब आकृतियाँ, बनावटें, रंग मुझे उनकी अनसुनी कहानियाँ सुनते हैं। इन चाय की पत्तियों के साथ भी कुछ ऐसा ही सामना हुआ मेरा — एक दिन चाय पीते हुए मेरी नज़र अचानक टी बैग पर बन रहे चाय के खूबसूरत शेड्स (shades) पर पड़ी। चाय के छींटों और विभिन्न रंगों ने मानो मुझे मोहित कर लिया था — मानो मुझसे थोड़ा-सा प्यार और डस्टबिन में न फेंकने की गुहार लगा रहे हो। तो बस, मैंने उनके साथ अपना सफ़र शुरू कर लिया! शुरू में काफ़ी असफलताएँ मिली लेकिन मैं अपनी ही ग़लतियों से सीख रही थी और आख़िर में लघु कलाकृतियां (miniature artworks) बनाने में सक्षम रही। हर टी बैग की अलग कहानी हैं और प्रत्येक कलाकृति अलग हैं।”

 

 

जिन चाय की पत्तियों को, टी बैग्स को लोग अक्सर कूड़ेदान में फेंक देते हैं, उनके साथ कला का निर्माण करके ॠतु को बेहद तृप्ति और ख़ुशी मिलती हैं। उनके मुताबिक हर टी बैग एक कहानी है — इसकी उत्पत्ति से ले कर अंतिम उपभोग तक हर पत्ती में कहानी का वास हैं। शायद इसी वज़ह से उन्हें अपनी चाय, अपने टी बैग्स और प्रत्येक कार्य से जुड़े विशिष्ट अनुभव से इतना प्यार है। 

जब ॠतु से उनके जीवन में रहे किसी मलाल के बारे में पूछा तो उन्होंने बड़े शानदार तरीके से कहा कि वे जीवन में पीछे की ओर जाने और पछतावा करने के बजाय उम्मीद के साथ आगे बढ़ने में विश्वास करती हैं। “मुझे लगता है कि किसी भी प्रकार की चिंता भविष्य को बदल नहीं सकती है और न ही किसी प्रकार का अफ़सोस आपके अतीत को बेहतर बना सकता है। रिस्क और अनिश्चितता तो एक कलाकार के दोस्त होते है और मुझे अपने काम में सभी तरह की संभावनाएँ और आज़माइशे पसंद हैं,” वे आगे कहती हैं। 

 

 

“मैं अपनी कला पद्धति को निरंतर विकसित करने की कोशिश करती हूँ। मेरे स्टूडियो में अभी कई चीजें चल रही हैं। मैं अपनी आगामी परियोजनाओं के लिए प्रकृति से बीज, बीजपोड, पत्ते, फूल और इसी तरह के कई प्राकृतिक चीज़ें एकत्र कर रही हूँ। वर्तमान में, मैं एक चंदवा की तरह स्थापना कार्य (canopy-like installation work) पर काम कर रही हूँ, जिसमें बहुत सारे रद्दी कपड़े के टुकड़े, प्रकृति से कुछ मिली हुई वस्तुएँ और मेरे पसंदीदा रीसाइकल्ड टी बैग होंगे,” ॠतु भविष्य की योजना बताते हुए कहती हैं। 

ॠतु का मानना ​​है कि कला संचार का एक रूप है — दुनिया के साथ साझा करने के लिए स्वयं की एक रूपरेखा है। वह कलाकारों को संघर्ष करने, जोखिम उठाने, कड़ी मेहनत करने, आगे बढ़ने और उस कारण को याद करने के लिए प्रोत्साहित करती है जो वे अपनी कला के लिए कर रहे हैं। 

 

 

अन्य महिला उद्यमियों को संदेश

“एक फूल बगीचे में अन्य फूलों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के बारे में नहीं सिर्फ़ खिलने के बारे में सोचता है। हम महिलाएँ शारीरिक, सामाजिक और भावनात्मक रूप से लगातार दैनिक जीवन का नेतृत्व करती हैं। हम बनाते हैं, प्यार और पोषण करते हैं, हम मजबूत, साहसी और दयालु हैं — महिलाएँ हमेशा से एक प्रेरणा रही हैं। लेकिन मुसीबत में सिर्फ़ दो ही उपाय होते है — या तो उनका सामना करे या फिर नया रास्ता खोजे! जीवन में सब एक-सा या आसान नहीं होता है। यह हम पर निर्भर करता हैं कि हम क्या करते हैं ख़ुद और दूसरों के लिए। यह बेशक आसान नहीं लेकिन अविश्वसनीय रूप से कठिन भी नहीं। इसलिए, फ़ैसले बनाएँ और आगे बढ़ें। 

 

मेरी कहानी अनमोल है और आपकी भी!”

ऋतु की बात बिलकुल सही है। हमें जीवन में कभी-कभी जटिल चयन करने पड़ते हैं — मुश्किल है पर नामुमकिन नहीं — ज़रुरत बस सबकी भलाई सोचने की है। ऋतु के लिए उनकी कला ही सबकी भलाई है और हम आशा करते हैं कि वे इस क्षेत्र में काफ़ी आगे जाएं और अनगिनतों को प्रेरित करें। 

उनसे जुड़ने के लिए आप उनके फ़ेसबुक अकाउंट या इंस्टाग्राम अकाउंट या वेबसाइट पर जा सकते हैं। 

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