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कंगना के दफ्तर तोड़ने के बाद आरटीआई में BMC की कार्रवाई को लेकर ये जानकारी सामने आयी है

तर्कसंगत

Image Credits: Navbharat/Zee News

September 11, 2020

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BMC ने नोटिस मिलने के 24 घंटे में कंगन रनौत की ऑफिस तोड़ कर सुर्खियां बटोरी। इस तेज़ तर्रार कदम उठने के बाद BMC पर कई सवाल खड़े हुए. इसे रंजिश में उठाया गया कदम भी बताया गया. अब आरटीआई की एक रिपोर्ट ने इस BMC को लेकर एक खुलासा हुआ है जो वाकई चौंकाने वाला है.

खुलासा ये हुआ है कि बीते 2016 से 2019 तक बीएमसी को मिली अवैध निर्माण की कुल शिकायतों में से केवल लगभग 10 प्रतिशत पर बीएमसी ने कार्रवाई की है.

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट की माने तो RTI से पता चला है कि जनवरी 2016 से लेकर जुलाई 2019 के बीच BMC को अवैध निर्माण से जुड़ी 94,000 से ज्यादा शिकायतें मिली थी, जिसमें से उसने लगभग 5,400 शिकायतों पर कार्रवाई की है.

सामाजिक कार्यकर्ता शकील शेख ने पिछले साल RTI दायर कर यह जानकारी मांगी थी.

शहर में अवैध और अनाधिकृत निर्माण कार्यों पर नजर रखने और निपटने के लिए BMC ने 2016 में ‘रिमूवल ऑफ एन्क्रोचमेंट ट्रेकिंग मैनेजमेंट सिस्टम (RETMS)’ शुरू किया था.

RTI में पता चला है कि RETMS पर 2016-19 के बीच अवैध निर्माण से जुड़ी कुल 94,851 शिकायतें आई. इनमें से 42,697 ऐसे ही दूसरे मामलों की शिकायतें थीं. बाकी बची 52,124 शिकायतों में से BMC ने केवल 5,462 (10.47 फीसदी) पर कार्रवाई की.

आरटीआई कार्यकर्त्ता शेख ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि BMC ने केवल कंगना रनौत के मामले में ही इतनी त्वरित करवाई दिखाई है वरना इस तरह के कई सारे मामलों में तो कोई करवाई नहीं होती मगर कागज़ पर अवैध निर्माण को तोड़ने का दावा किया जाता है.

उन्होनें बताया कि पिछले कुछ सालों में शहर में कई सारी बिल्डिंग ढह गयी है. उनमें से अधिकतर अवैध निर्माण के दायरे में थी मगर BMC ने उन पर अभी समय रहते करवाई नहीं की.

वहीं भाजपा विधायक अमीत सातम ने भी इस मामले लेकर निशाना साधते हुए कहा कि BMC को अन्य मामलों में भी इसी तेजी से काम करना चाहिए.

उन्होंने कहा कि कंगना के मामले में BMC की कार्रवाई शर्मनाक है। इसने तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया. बांद्रा में खड़ी इमारतों में अवैध निर्माण हुआ है, BMC उनके खिलाफ कार्रवाई कब करेगी?

बता दें कि BMC की इस कार्रवाई का कई लोगों ने विरोध किया है.

 

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