मेरी कहानी

मेरी कहानी: ‘मैं अपने परिवार में कॉलेज जाने वाली पहली सदस्य हूँ’

तर्कसंगत

September 13, 2020

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दक्षिणी दिल्ली के कुसुमपुर पहाड़ी की झुग्गियों में एक 18 वर्षीय लड़की मानसी रहती है। उनके पिता जो उत्तर प्रदेश के निवासी हैं, किसानों के परिवार से आते हैं। खास बात ये है कि इस परिवार में आज तक किसी ने भी कॉलेज में पढाई नहीं की। मगर अब मानसी अपने परिवार की इस कमी को पूरी करने जा रही हैं।

आशा कम्युनिटी हेल्थ एंड डेवलपमेंट सोसाइटी के सरासर दृढ़ संकल्प और कोशिशों के बाद, मानसी कॉलेज जाने वाली अपने परिवार में पहली सदस्य होने जा रही है।

मानसी बताती है “1990 के दशक के मध्य में, मेरे पिता उत्तर प्रदेश के अपने गाँव को छोड़ कर दिल्ली आ गए। यहाँ आ कर कुसुमपुर पहाड़ी के कई अन्य झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले परिवारों की तरह, हमारे पास भी रहने के लिए प्लास्टिक से बनी एक झोंपड़ी थी।

उन्होंने एक माली के रूप में नौकरी मिली और प्रति दिन 20 रूपये की कमाई पर काम  शुरू कर दिया। आज भी वह एक माली के रूप में काम करते हैं और प्रति माह 8000 रूपये कमाते है.  छह सदस्यों के अपने परिवार का भरण पोषण करने वाले वो एकमात्र कमाऊ है।

एक सीमित आमदनी के साथ, हमारे लिए पूरे घर और प्रत्येक व्यक्ति की व्यक्तिगत ज़रूरतों को पूरा करना मुश्किल था। मेरे भाई-बहनों ने और मैंने त्योहारों के दौरान कभी भी नए कपड़े नहीं मिले। क्योंकि ये बलिदान हमारे रोजमर्रा के जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए थे।

समय के साथ, मैं आशा सामुदायिक स्वास्थ्य और विकास सोसाइटी के लोगों से परिचित हुई। वो स्लम बस्तियों का दौरा किया करते थे  और उन्होनें ही मुझे अपने 12 वें बोर्ड की तैयारी में मदद की। बाद में, उन्होंने मुझे अपने सेंटर पर आने के लिए कहा, जहाँ जा कर मैं अपनी पढ़ाई से जुड़ी दिक्क्तों में उनकी मदद लिया करती थी।

मैंने नियमित रूप से केंद्र में भाग लेना शुरू किया और पाया कि आशा वर्कर्स द्वारा ट्यूशन क्लासेस ने मेरी पढाई को और आसान बना दिया और मुझे अपने विषयों में अच्छा स्कोर करने में मदद मिली। केंद्र में आयोजित मॉक परीक्षा की तैयारी से मुझे अपनी घबराहट और डर पर काबू पाने में मदद मिली।

एक अच्छी तरह से तैयारी ने मुझे परीक्षाओं में 84.5% स्कोर करने में मदद की। चूँकि मेरे घर में कोई भी ज़्यादा पढ़ा लिखा नहीं है तो कैरियर का महत्व क्या होता है?  उसके महत्व को समझने में मैंने आशा टीम की ओर रुख किया, और उन लोगों ने मुझे हर स्तर पर मेरी मदद की।

उनकी सहायता से, मैंने दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए पंजीकरण किया और कला और फिर एलएलबी में डिग्री हासिल करने के लिए वकील बनने के अपने सपने को पूरा करने की उम्मीद की। मैं एक वकील बनने की ख्वाहिश रखती हूं जो सच्चाई के लिए लड़ता है और स्लम परिवारों को न्याय दिलाने में मदद कर सकता है।”

आशा सामुदायिक स्वास्थ्य और विकास सोसाइटी समग्र समुदाय-आधारित स्वास्थ्य सेवा, सशक्तीकरण, वित्तीय समावेशन, शिक्षा और पर्यावरण सुधार के लिए प्रशिक्षण, पुनर्वास और प्रोत्साहित करने और अपने बुनियादी मानवाधिकारों का आनंद लेने के लिए प्रोत्साहित करती है।

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