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CAIT रिपोर्ट: कोरोना के कारण 1.75 करोड़ छोटे कारोबार बंद होने की कगार पर

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Image Credits: Zoom News

September 14, 2020

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भारत का घरेलू व्यापार कोविड19 के कारण सदी के अपने सबसे बुरे दिनों से जूझ रहा है. निकट भविष्य में तत्काल राहत का कोई संकेत नहीं होने से इसने देशभर के व्यापारियों को घुटने के बल खड़ा कर दिया है. देश की अर्थव्यवस्था पर यह टिप्पणी करते हुए कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने कहा कि केंद्र और राज्य दोनों सरकारों से कोविड से राहत पाने के लिए कोई समर्थन पैकेज न मिलने के कारण देश भर में लगभग 25% छोटे कारोबारियों की लगभग 1.75 करोड़ दुकानें बंद होने के कगार पर हैं, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे विनाशकारी होगा.

फाइनेंसियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय घरेलू व्यापार जो दुनिया भर में सबसे बड़ा स्वयं संगठित क्षेत्र है लेकिन गलत तरीके से असंगठित क्षेत्र के रूप में वर्णित किया गया है. यह दुनिया भर में सबसे व्यापक व्यापार में से एक है जिसमें 7 करोड़ से अधिक व्यापारी शामिल हैं, जो 40 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं और 60 लाख करोड़ का वार्षिक कारोबार करते हैं. भारत के घरेलू व्यापार में लगभग 8 हजार से अधिक मुख्य वस्तुओं का व्यापार होता है और प्रत्येक मुख्य व्यापार श्रेणी के अंतर्गत अनेक प्रकार की व्यापारिक श्रेणियों में भारत का व्यापार समाहित है. बैंकिंग क्षेत्र अब तक इस क्षेत्र को औपचारिक वित्त प्रदान करने में विफल रहा है क्योंकि केवल 7% छोटे व्यवसाय बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से वित्त प्राप्त करने में सक्षम हैं. शेष 93% व्यापारी अपनी वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अन्य अनेक अनौपचारिक स्रोतों पर निर्भर हैं.

 

आर्थिक पैकेज में नहीं मिला कुछ भी

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया और राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि कोरोना ने भारतीय घरेलू व्यापार का खून चूस लिया है जो वर्तमान में अपने अस्तित्व के लिए कड़ा संघर्ष कर रहा है. कोविड से पहले के समय से देश का घरेलू व्यापार बाजार बड़े वित्तीय संकट से गुजर रहा था और कोविड के बाद के समय में व्यापार असामान्य और उच्च स्तर के वित्तीय दबाव में आ गया है. व्यापारी अपने व्यापार को पुनर्जीवित करने के लिए खुद को अत्यधिक विकलांग महसूस कर रहे हैं. केंद्र सरकार द्वारा घोषित 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज में छोटे व्यवसायों के लिए एक रुपये का भी प्रावधान नहीं था और न ही देश की किसी राज्य सरकार ने छोटे व्यवसायों के लिए कोई वित्तीय सहायता दी.

 

दुकानें बंद होने से बढ़ेगी बेरोजगारी

भरतिया और खंडेलवाल ने कहा कि भारत में 1.75 करोड़ दुकानें यदि बंद होती हैं तो इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों की व्यापारियों की पूरी तरह से उपेक्षा और उदासीनता जिम्मेदार होगी. निश्चित रूप से भारत में बेरोजगारों की संख्या में इजाफा होगा, जिससे जहां अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगेगा वहीं प्रधानमंत्री मोदी के लोकल पर वोकल और आत्मनिर्भर भारत अभियान को बड़ा नुकसान होगा. उन्होंने आगे कहा कि व्यापारियों पर केंद्र और राज्य सरकार के करों के भुगतान, औपचारिक और अनौपचारिक स्रोतों, ईएमआई, जल और बिजली के बिल, संपत्ति कर, ब्याज के भुगतान, मजदूरी के भुगतान से लिए गए ऋण की मासिक किस्तों के भुगतान को पूरा करने का बहुत बड़ा वित्तीय बोझ है. कैट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से व्यापारियों के इस ज्वलंत मुद्दे का तत्काल संज्ञान लेते हुए व्यापारियों के लिए एक पैकेज नीति की घोषणा करने और उन्हें अपने व्यवसाय के पुनरुद्धार में मदद करने की नीति घोषित करने का आग्रह किया है.

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