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प्रवासी मजदूर पर सरकार का असंवेदनशील बयान कहा ‘फेक न्यूज़ के कारण मजदूरों ने किया पलायन’

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Image Credits: NDTV

September 16, 2020

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लॉकडाउन के दौरान करोड़ों प्रवासी मजदूरों के पलायन के पीछे सरकार ने फेक न्यूज से फैले डर को वजह बताया है। सरकार ने यह भी कहा कि चूंकि कोरोना संक्रमण बहुत तेजी से फैलता है इसलिए सरकार ने वैश्विक अनुभवों के आधार पर 24 मार्च को कुछ ही घंटों के नोटिस पर राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन लागू किया था।

फेक न्यूज़ था कारण

एनडीटीवी के अनुसार लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस सांसद माला रॉय ने सरकार से सवाल किया मजदूरों को पैदल अपने घर क्यों जाना पड़ा? इसके जवाब में नित्यानद राय ने कहा कि प्रवासी मजदूरों का बड़ी संख्या में पलायन इसलिए हुआ क्योंकि लॉकडाउन की अवधि को लेकर फैली फेक न्यूज से उनमें डर बैठ गया था। साथ ही ये मजदूर खाने, पीने के पानी, स्वास्थ्य सेवाओं और अपने आसरे जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर भी चिंतित थे।

लॉकडाउन के लिए पर्याप्त समय नहीं

वहीं कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सरकार से लॉकडाउन को लेकर सवाल किया। उन्होंने पूछा कि सरकार ने कुछ ही घंटों का नोटिस देकर लॉकडाउन क्यों लागू किया था?

इसके लिखित जवाब में राय ने कहा कि 7 जनवरी को जब कोरोना का प्रकोप शुरू हुआ था, तभी से सरकार ने लोगों के लिए एडवायजरी जारी करने और क्वारंटाइन सेंटर्स आदि के इंतजाम करने शुरू कर दिए थे ताकि इस खतरनाक वायरस के संक्रमण को रोका जा सके।  राय ने कहा कि जानकारों ने वैश्विक अनुभवों के आधार पर सुझाव दिया कि संक्रमण को रोकने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग के प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि 16-23 मार्च के बीच अधिकतर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने स्थिति की समीक्षा के आधार पर जरूरत के हिसाब से पूर्ण या आंशिक लॉकडाउन लागू किए थे।

उन्होंने यह भी दावा किया कि लॉकडाउन के कारण भारत में कोरोना संक्रमण काफी हद तक काबू में रहा है।

इस जवाब से पहले केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने सोमवार को लोकसभा में जानकारी दी थी कि प्रवासी मजदूरों की मौत पर सरकार के पास आंकड़ा नहीं है, ऐसे में मुआवजा देने का ‘सवाल नहीं उठता है’। दरअसल, सरकार से पूछा गया था कि कोरोना वायरस लॉकडाउन में अपने परिवारों तक पहुंचने की कोशिश में जान गंवाने वाले प्रवासी मजदूरों के परिवारों को क्या मुआवजा दिया गया है? सरकार के इस जवाब पर विपक्ष की ओर से खूब आलोचना और हंगामा हुआ। श्रम मंत्रालय ने माना है कि लॉकडाउन के दौरान 1 करोड़ से ज्यादा प्रवासी मजदूर देशभर के कोनों से अपने गृह राज्य पहुंचे हैं।

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