पर्यावरण

मिलिए इस जोड़ी से जो एग्रीकल्चर वेस्ट से पावर प्लांट के लिए फ्यूल बना रहे हैं

तर्कसंगत

September 16, 2020

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प्रकृति पर प्रदूषण की मार से हम सभी वाकिफ हैं. भारत देश में प्रदूषण और भी ज़्यादा है जिसके अपने अलग अलग कारण हैं. ऐसे कई कारणों में से एक कारण है कृषि अपशिष्ट या एग्रीकल्चर वेस्ट का.

हर साल अक्टूबर-नवंबर के दौरान हवा की गुणवत्ता में भारी गिरावट आती है और ये तब होता है जब पंजाब और हरियाणा के किसानों द्वारा एग्रीकल्चर वेस्ट जलाने का काम किया जाता है।

इस तरह के प्रदूषण को दूर करने के लिए और इसके कारण बढ़ते वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए, आयुषी और अरु मंगला ने 2017 में अपने उद्यम RY Energies की शुरुआत की।

अपने इस पहल के द्वारा समाधान के रूप में, उन्होंने किसानों को एग्रीकल्चर वेस्ट जलाने से रोकने की कोशिश की और साथ  ही बिजली संयंत्रों को एक बेहतर बायोमास फ्यूल देने का विकल्प प्रदान करने का निर्णय लिया।

हालाँकि स्टबल बर्निंग का अभ्यास सबसे पुराना और  सस्ता तरीका है जिसके माध्यम से वे एग्रीकल्चर वेस्ट से छुटकारा पा सकते हैं, लेकिन यह पर्यावरण के लिए टिकाऊ नहीं है।

 

 

तर्कसंगत के साथ बातचीत में, आयुषी कहती हैं, ” उत्तर भारत में वायु की गुणवत्ता बिगड़ने में एग्रीकल्चर वेस्ट एक प्रमुख कारण है। अकेले पंजाब और हरियाणा में सालाना लगभग 35 मिलियन टन एग्रीकल्चर वेस्ट जलाया जाता है। समस्या की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रत्येक टन फसल अवशेषों को जलाने पर लगभग 3 किलो पार्टिकुलेट मैटर, 60 किलोग्राम CO2, 1,460 किलोग्राम CO2, 199 किलोग्राम राख और 2 किलोग्राम SO2 निकलता है। इस हानिकारक प्रथा पर अंकुश लगाना कितना महत्वपूर्ण है। ”

 

RY Energies के दोनों संस्थापक को यह विचार उनके कॉलेज के दिनों में आया। दोनों ने किसानों के लिए एक स्थायी विकल्प बनाने की दिशा में काम करने में रुचि के साथ, वे इस पर एक साथ काम करना शुरू कर दिया। वे किसानों के संपर्क में आए और एग्रीकल्चर वेस्ट जलाने के नुकसान के बारे में उन्हें समझाने की कोशिश की।

ReneYou Greentech नाम की अपनी तरह की एक इकाई किसानों, पर्यावरण और बायोमास-आधारित बिजली संयंत्रों और उद्योगों के लिए एक अनुकूल समाधान बनाने के लिए व्यावसायिक बायोमास  प्रदान करती है, जो फसल के कचरे जैसे की पुआल आदि की सोर्सिंग करके इसे दोबारा से इस्तेमाल लायक बनती हैं।

इनके द्वारा बनाया गए बायोमास फ्यूल, जो बिजली संयंत्रों और उद्योगों में ईंधन या कच्चे माल के रूप में उपयोग करने के लिए आपूर्ति की जाती है, जिससे एग्रीकल्चर वेस्ट  के खुले में जलाने से रोका जा सकता है।

तर्कसंगत से बात करते हुए आयुषी कहती हैं “हमारे पेशेवर बायोमास आपूर्ति श्रृंखला किसानों के लिए एक विन विन सोल्युशन है, जहां हम उनके खेतों को समय पर एग्रीकल्चर वेस्ट से खाली करके उनकी मदद करते हैं। हमने अब तक अपने संचालन के माध्यम से लगभग 110 किसानों की मदद की है।”

उनका संगठन टीईआरआई के (द एनर्जी एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट) बायोमास स्टार्टअप इंडिया एजुकेशन एलायंस प्रोग्राम के तहत मेंटरशिप प्राप्त कर रहा है और इसे दिल्ली सरकार द्वारा मान्यता भी दी गई है। वे दोनों अब नवीनतम तकनीकों का उपयोग करना चाहते हैं जिसके माध्यम से वे स्टबल बर्निंग की समस्या का स्थायी दीर्घकालिक समाधान ला सके।

तर्कसंगत इन दो युवा नेताओं के प्रयासों की सराहना करता है जो स्वच्छ वातावरण के लिए प्रयासरत हैं।

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