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वाराणसी के इस डिजिटल गाँव में डॉक्टर अब बस एक ‘क्लिक’ की दुरी पर है

तर्कसंगत

Image Credits: AHS

September 17, 2020

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कोरोना महामारी में जहाँ स्वास्थ्य सेवाओं को अत्यधिक  परेशानियों का  सामना करना पड़ रहा है. वहीँ हमारे बीच कुछ ऐसी अच्छी खबरें भी है जो स्वाथ्य सेवा के आसान पहुँच के लिहाज से एक अच्छे भविष्य की उम्मीद जगाती है.

ताज़ा खबर है उत्तर प्रदेश के गौरा जिले की जहाँ गाँवालों को डॉक्टर से परामर्श लेने के लिए लाइन नहीं लगनी बल्कि कंप्यूटर पर क्लिक करना होता है और डॉक्टर हाज़िर.

वाराणसी के पास लगभग 2,500 निवासियों के गौरा जिले में टेली कंसल्टेशन की सुविधा शुरू हुई है. इस नयी डिजिटल कंसल्टेशन का फायदा ये है कि छोटी मोटी बिमारियों के लिए गान वालों को अपने घर से ज़ायदा दूर नहीं जाना पड़ेगा. अपने घर और गाँव के आराम में रहते हुए वो डॉक्टर से ऑनलाइन परामर्श ले सकते हैं.

 

टेली कंसल्टेशन क्या है?

अभी के समय में टेली कंसल्टेशन प्राइमरी केयर का एक रूप है, जहां रोगी गैर-आपातकालीन चिकित्सा समस्याओं के बारे में एक डिजिटल ग्राम केंद्र में डॉक्टर की सलाह लेता है, जिसके लिए डॉक्टर को वहां मौजूद होने की आवश्यकता नहीं होती है. इसका मतलब ये नहीं कि टेली कंसल्टेशन कहीं से भी फिजिकल कंसल्टेशन का एक दूसरा विल्कप है, मगर जहाँ मरीज़ को इमरजेंसी में इलाज की ज़रूरत नहीं होती वहां ये डॉक्टर और मरीज़ दोनों के लिए ही लाभकारी है.

गाँव वालों के लिए ये इस कारण से ज़्यादा लाभकारी है क्योंकि उन्हें गाँव में  रहते हुआ डॉक्टर से परमर्श करने को मिलता है. डॉक्टर की प्रिक्रिप्शन भी उन्हें ऑनलाइन मिल जाती है, जिसे वे डिजिटल ग्राम केंद्र में ही डाउनलोड कर सकते हैं.

 

मरीज़ों को हो रहा है फायदा

माला देवी मौर्य जिनकी उम्र 50 के आस पास है ने हिंदुस्तान टाइम्स को  बताया कि उन्हें इस सुविधा से काफी लाभ हुआ है.  एंग्जायटी की बीमारी थी. डिजिटल विलेज सेण्टर के हेड संजय मौर्य  कहने पर उन्होनें इस सुविधा का लाभ उठाना चाहा. माला की शुरुआती झिझक को दूर करने में मदद करने के लिए संजय मौर्य ने डिजिटल गांव की वेबसाइट https://www.digital-village.in/digital-health-services पर लॉग ऑन किया और परामर्श के लिए एक ऑनलाइन चिकित्सक का चयन किया.

इसके बाद उन्होनें ऑनलाइन डॉक्टर से परामर्श किया माला देवी ने डॉक्टर को बताया कि जनवरी माह से उन्हैं ये बीमारी थी. पास के शहर में जा कर उन्होनें डॉक्टर से जाँच कराइ. डॉक्टर ने दवा दी जिससे उन्हें फायदा हुआ मगर पांच दिन बाद से फिर यही परशानी हुई. टेली कंसल्टेशन के द्वारा डॉक्टर ने इस बारसंजय मौर्य की मदद से उनकी रक्तचाप और प्लस रेट नपवाया. उसके आधार पर फिर नयी दवाइयां दी.

माला देवी बता है कि वो अब पहले से काफी बेहतर हैं, उन्हें उस बात की और भी ख़ुशी है कि इस बार उन्हें डॉक्टर का परामर्श अपने दरवाज़े पर ही मिल गया.

 

दो महीने में 40 लोगों ने उठाया फायदा

संजय मौर्य बताते हैं कि पिछले दो महीने में लगभग 40 लोगों ने टेली कंसल्टेशन का फायदा उठाया है. इस सुविधा के माध्यम से लोग आयुर्वेदिक, एलोपैथी, होमियोपैथी आदि इलाज आढ़ती का फायदा उठा रहे हैं.

डिजिटल सेण्टर पर गाँव वालों को दवाइयां भी मुफ्त में मिलती है, और जो दवाई आवाहन उपलब्ध नहीं होती वो मरीज़ को बाहर के दूकान से लेनी होती हैं.

संजय मौर्य ने लगभग 593 परिवारों को इस सिवुधा के बारे में बताया है. जो मरीज़ डिजिटल सेण्टर असमर्थ होता है वो खुद पोर्टेबल मशीने लेकर उसके घर पहुँच  जाते हैं और डॉक्टर से परामर्श प्राप्त करने में मरीज़ की मदद करते हैं.

 

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