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जिन्होनें पुलिस के बगल में खड़े होकर कहा था कि ‘हम पुलिस की भी नहीं सुनेंगे’ उन्होनें चार्जशीट में किया इंकार

तर्कसंगत

September 22, 2020

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दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 28 जुलाई को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के मामले में भाजपा नेता कपिल मिश्रा से पूछताछ की थी।

पूछताछ के दौरान मिश्रा ने कहा कि उन्होंने मौजपुर दौरे के दौरान कोई भाषण नहीं दिया था। दिल्ली पुलिस द्वारा पिछले सप्ताह कड़कड़डूमा अदालत में दायर की चार्जशीट में ये बातें कही गई हैं। गौरतलब है कि मिश्रा पर फरवरी में भड़काऊ भाषण देने का आरोप है और उनकी भूमिका सवालों के घेरे में है।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पूछताछ में कपिल ने कहा कि उन्होंने कोई भाषण नहीं दिया था और वो वहां हालात का जायज़ा लेने गए थे. ये भी कहा कि उनका मकसद एंटी- CAA (नागरिकता संशोधन कानून) का विरोध करने वालों के खिलाफ धरना देना था.

दरअसल, नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में दंगे भड़कने के एक दिन पहले यानी 23 फरवरी को कपिल मिश्रा का एक वीडियो सामने आया था. जिसमें वो CAA का सपोर्ट करने वाले लोगों को मौजपुर ट्रैफिक सिग्नल के पास संबोधित करते दिख रहे थे. उनके बगल में DCP (नॉर्थ-ईस्ट) वेद प्रकाश सूर्या खड़े थे. इस वीडियो में कपिल कह रहे थे,

“वो (प्रदर्शनकारी) दिल्ली में मुश्किलें खड़ी करना चाहते हैं. इसलिए उन्होंने सड़कें जाम कर दीं. इसलिए उन्होंने यहां दंगे जैसे हालात पैदा कर दिए. हमने पत्थरबाज़ी नहीं की है. DCP हमारे सामने खड़े हैं और आप सभी लोगों की तरफ से, मैं उनसे ये कहना चाहता हूं कि अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप जब तक भारत में हैं, हम इलाके को शांति से रहने दे रहे हैं. उसके बाद, अगर सड़कें खाली नहीं हुईं, तो हम आपकी (पुलिस की) नहीं सुनेंगे. हम भी सड़कों पर आ जाएंगे.”

कड़कड़डूमा कोर्ट में जो चार्जशीट फाइल हुई है, उसमें कपिल मिश्रा से उनके इसी संबोधन और मौजपुर विज़िट को लेकर सवाल किए गए थे. पूछताछ के दौरान मिश्रा ने पुलिस कहा कि नागरिकता कानून के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों के कारण उस इलाके के लोगों को परेशानियां हो रही थी। मिश्रा ने बताया कि उन्होंने कोई भाषण नहीं दिया था। वो केवल पुलिस से तीन दिनों के भीतर रास्ता खाली कराने को कह रहे थे।

उन्होंने बताया कि मौजपुर पहुंचने से पहले उन्होंने DCP को बुलाया था। उनके वहां तक पहुंचने से पहले ही कई जगहों पर दंगे शुरू हो चुके थे।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, चार्जशीट में कपिल मिश्रा ने बार-बार ये मेंशन किया है कि उन्होंने वहां कोई भाषण नहीं दिया था, वो बस ‘पुलिस से कह रहे थे कि सड़कें खाली करवा दी जाएं’। ये पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने दंगों से पहले पूर्वोत्तर दिल्ली ज़िले का दौरा किया था, जवाब में उन्होंने कहा कि उनका घर यमुना विहार में है, जो इसी ज़िले में पड़ता है। कपिल मिश्रा मिश्रा से 23 फरवरी की उनकी विज़िट के दौरान उनकी व्यक्तिगत टिप्पणियों के बारे में भी पूछा गया। उन्होंने कहा,

“वहां पहुंचने पर, मुझे बताया गया कि 2:45 पर ही पत्थरबाज़ी शुरू हो गई थी और लोग मेरे सामने दौड़ रहे थे, मुझे ये बताया गया कि भीड़ पत्थरबाज़ी कर रही है। वहां पहुंचने से पहले मैंने DCP सूर्या से भी बात की थी।”

कपिल मिश्रा ने 23 फरवरी को ट्वीट करके ये भी कहा था कि उन्होंने दिल्ली पुलिस को तीन दिन का अल्टिमेटम दिया है। तब तक जाफराबाद और चांद बाग रोड खाली करवा दी जाएं, नहीं तो फिर वो पुलिस की भी नहीं सुनेंगे।

भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने पुलिस को दिए अपने बयान में आगे कहा, “नागरिकता कानून के विरोधी प्रदर्शनकारियों ने कबीरनगर और जाफराबाद में पहले ही पत्थरबाजी शुरू कर दी थी। पुलिस ने जहां वो खड़े थे, वहां से 300 मीटर की दूरी पर रोका था। वो DCP से तीन दिनों में सड़क खाली करने का कहकर लौट गए क्योंकि वहां रहने वाले लोगों को सड़क बंद होने के कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था।”

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