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टाइम पत्रिका में दुनिया के 100 प्रभावशाली लोगों में प्रधानमंत्री मोदी के साथ शाहीन बाग़ की बिलकिस बानो का भी नाम

तर्कसंगत

Image Credits: NewsClick/GoNews

September 23, 2020

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अमरीका की जानी-मानी पत्रिका टाइम ने दुनिया के 100 प्रभावशाली लोगों की लिस्ट जारी की है, जिसमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कुछ और भारतीय नाम भी शामिल हैं. जिनके नाम जान कर आप हैरत में पड़ सकते हैं.

पीएम मोदी के अलावा, इस लिस्ट में अभिनेता आयुष्मान खुराना, शाहीन बाग आंदोलन से सुर्खियों में आईं बिलकिस दादी और गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई शामिल हैं.

यहां खास बात यह है कि टाइम मैगजीन ने शाहीन बाग आंदोलन के दौरान ‘दादी’ के नाम से मशहूर हुईं बिलकिस को भी दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में शामिल किया है. 82 वर्षीय दादी बिलकिस उस वक्त सुर्खियों में आईं थीं जब उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ दिल्ली के शाहीन बाग आंदोलन में धरना पर बैठकर ध्यान आकर्षित किया था.

हालाँकि टाइम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिस्ट में शामिल करते हुए उनके बारे में जो संक्षिप्त लेख लिखा है, उसमें उनके बारे में तल्ख़ टिप्पणी की गई है.

पत्रिका ने लिखा है, “लोकतंत्र के लिए मूल बात केवल स्वतंत्र चुनाव नहीं है. चुनाव केवल यही बताते हैं कि किसे सबसे ज़्यादा वोट मिले. लेकिन इससे ज़्यादा महत्व उन लोगों के अधिकारों का है, जिन्होंने विजेता के लिए वोट नहीं किया. भारत पिछले सात दशकों से दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बना हुआ है. यहाँ की 1.3 अरब की आबादी में ईसाई, मुसलमान, सिख, बौद्ध, जैन और दूसरे धार्मिक संप्रदायों के लोग रहते हैं. ये सब भारत में रहते हैं, जिसे दलाई लामा समरसता और स्थिरता का एक उदाहरण बताकर सराहना करते हैं.”

टाइम लिखता है, “नरेंद्र मोदी ने इस सबको संदेह के घेरे में ला दिया है. हालाँकि, भारत में अभी तक के लगभग सारे प्रधानमंत्री 80% हिंदू आबादी से आए हैं, लेकिन मोदी अकेले हैं जिन्होंने ऐसे सरकार चलाई जैसे उन्हें किसी और की परवाह ही नहीं. उनकी हिंदू-राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी ने ना केवल कुलीनता को ख़ारिज किया बल्कि बहुलवाद को भी नकारा, ख़ासतौर पर मुसलमानों को निशाना बनाकर. महामारी उसके लिए असंतोष को दबाने का साधन बन गया. और दुनिया का सबसे जीवंत लोकतंत्र और गहरे अंधेरे में चला गया है.”

बिल्क़ीस बानो ‘शाहीन बाग़ की दादी’ के नाम से भी जानी जाती हैं. वे शाहीन बाग़ में सीएए को वापस लेने की माँग के साथ क़रीब 100 दिन चले प्रदर्शन में शामिल रहीं. 82 वर्षीय दादी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और गूगल के CEO सुंदर पिचाई जैसे नामों के साथ इस सूची में जगह मिली है.

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बिल्क़ीस बानो उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर ज़िले की रहने वाली हैं. उनके पति क़रीब दस साल पहले गुज़र गये थे जो खेती-मज़दूरी करते थे. बिल्क़ीस बानो फ़िलहाल दिल्ली में अपने बहू-बेटों के साथ रहती हैं.

टाइम मैग्ज़ीन ने बिल्क़ीस बानो के लिए लिखा है कि “वे भारत में वंचितों की आवाज़ बनीं. वे कई बार प्रदर्शन स्थल पर सुबह आठ बजे से रात 12 बजे तक रहा करती थीं. उनके साथ हज़ारों अन्य महिलाएं भी वहाँ मौजूद होती थीं और महिलाओं का इस प्रदर्शन को ‘प्रतिरोध का प्रतीक’ माना गया.”

मैग्ज़ीन ने लिखा है कि बिल्क़ीस बानो ने सामाजिक कार्यकर्ताओं, ख़ासकर छात्र नेताओं को जिन्हें जेल में डाल दिया गया, उन्हें लगातार उम्मीद बंधाई और यह संदेश दिया कि ‘लोकतंत्र को बचाये रखना कितना ज़रूरी है.’

शाहीन बाग़ प्रदर्शन के दौरान एक दफ़ा भारत के गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि ‘सीएए पर हम (मोदी सरकार) एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे.’ इसके जवाब में बिल्क़ीस बानो ने कहा था, “अगर गृहमंत्री कहते हैं कि वे एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे, तो मैं कहती हूँ कि हम एक बाल बराबर भी नहीं हटेंगे.”

बिल्किस दादी बोलने में भी किसी से पीछे नहीं थीं और प्रदर्शनों के दौरान ‘इंडियन एक्सप्रेस’ से बात करते हुए उन्होंने कहा था, “हम बूढ़े हैं और हम ये अपने लिए नहीं कर रहे. ये हमारे बच्चों के लिए है. इसके अलावा और किस कारण से हम अपने जीवन की सबसे ठंडी सर्दियां दिन-रात खुले में बिताएंगे.

बहरहाल टाइम मैगज़ीन ने प्रधमंत्री मोदी को कवर पेज पर ‘Divider In Chief’ के नाम से भी सम्बोधित किया था जिसे लेकर काफी हंगाम हुआ था.

 

मोदी

 

पत्रिका ने साथ ही लिखा था, ”क्या दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र मोदी सरकार को आने वाले और पांच साल बर्दाश्त कर सकता है?”

उस वक़्त बीजेपी ने आरोप लगाया था कि ये लेख प्रधानमंत्री मोदी की छवि को मलिन करने की एक कोशिश है. पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने तब कहा था कि 2014 में भी कई विदेशी पत्रिकाओं ने मोदी की आलोचना करने वाले लेख छापे थे.

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