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सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक देश में बने शौचालयों को लेकर बड़ा चौंकाने वाला खुलासा हुआ है

तर्कसंगत

Image Credits: ABP

September 24, 2020

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कैग की संसद में पेश एक ऑडिट रिपोर्ट में सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज द्वारा स्कूलों में बनाए गए शौचालयों में कई अनियमितताएं पाई गई हैं। इस बात का खुलासा कैग की एक रिपोर्ट में हुआ है। जिसे संसद में पेश किया गया। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 11 फीसदी शौचालयों के बारे में कोई जानकारी नहीं है वो बने हैं या नहीं बने। जबकि 30 फीसदी ऐसे शौचालय हैं जिसमें गंदगी या पानी नहीं होने इस्तेमाल में नहीं है।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सितंबर, 2014 में ‘स्वच्छ विद्यालय अभियान’ शुरू किया था, ताकि शिक्षा अधिकार अधिनियम की अनिवार्यता को पूरा किया जा सके। मंत्रालय ने सभी स्कूलों में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग टॉयलेट को अनिवार्य बना दिया था। लेकिन फंड की कमी, खराब रख-रखाव और शौचालयों में पानी की खराब उपलब्धता को बड़ी चुनौतियों के रूप में पहचाना गया। केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSE) को एक साल की अवधि में इस अंतर को पाटने के लिए कहा गया।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक 53 CPSE ने इस प्रोजोक्ट में हिस्सा लिया और 1,40,997 शौचालय (toilet) बनाए गए। कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 3 मंत्रालयों में से 7 CPSE  ने 1,30,703 शौचालय बनाए जिसमें 2,162.60 करोड़ रुपये खर्च हुए। इन मंत्रालय में बिजली मंत्रालय, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय और कोयला मंत्रालय शामिल हैं।

CAG ने NTPC, PGCIL, NHPC, PFC, REC, ONGC और Coal India द्वारा बनाए गए शौचालयों की जांज की। जिसमें 15 राज्यों में बनाए गए 2,695 शौचालय का सर्वे किया। जिसमें कैग रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑडिट सैंपल में 2,695 शौचालयों में से CPSE ने 83 शौचालय नहीं बनाए, हालांकि इन शौचालयों को बनाया हुआ दिखाया गया है। बाकी 2,612 शौचालयों में 2000 शौचालयों का कोई अता पता नहीं है। जब कि 86 शौचालयों का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। कुल मिलाकर ऑडिट रिपोर्ट में सामने आया है कि 11 फीसदी शौचालय नहीं बने जिसमें अधूरा निर्माण भी शामिल है। कैग के मुताबिक, 1,967 स्कूल कोएजूकेशन (लड़के-लड़कियां दोनों एक साथ पढ़ते हैं) थे। इन स्कूलों में 99 स्कूलों में शौचालय चालू नहीं थे। जबकि 436 स्कूलों में सिर्फ एक शौचालय का इस्तेमाल हो रहा था। लड़के और लड़कियों को अलग से शौचालय मुहैया कराने के लिए 535 स्कूलों में यह लक्ष्य अभी तक पूरा नहीं किया गया है। यह 1,967 स्कूलों में 27 फीसदी है।

कैग के मुताबिक, 2,326 स्कूलों में बने शौचालयों में से 1,679 यानी करीब 72 फीसदी शौचालय में पानी की सुविधा नहीं थी। जबकि 1,279 यानी करीब 55 फीसदी शौचालयों में हाथ धोने की सुविधा नहीं थी। इसके साथ ही शौचालय ढंग से नहीं बनाए गए। लिहाजा उनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा था।

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