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यहाँ जानिए कि शशि थरूर NDA सरकार को No Data Available वाली सरकार क्यों बोल रहे हैं ?

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Image Credits: Twitter/ShashiTharoor/Wikimeida

September 25, 2020

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मानसून सत्र के दौरान केंद्र सरकार ने कई सवालों के जवाब में कहा था कि उसके पास इनसे जुड़े आंकड़े उपलब्ध नहीं है। इसे लेकर विपक्ष ने भी सरकार को घेरा था। लेकिन सरकार ने कई सारे आंकड़ों के बारे में ये जवाब दिया कि उनके पास उपलब्ध आंकड़े नहीं हैं.

ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि हाल के दिनों में सरकार ने किन-किन सवालों के जवाब में कहा है कि उसके पास इसके आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।

प्रवासी मजदूर

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने लोकसभा में बताया है कि प्रवासी मजदूरों की मौत पर सरकार के पास आंकड़ा नहीं है, ऐसे में मुआवजा देने का ‘सवाल नहीं उठता है’

कोरोनावायरस के बीच हो रहे पहले संसदीय सत्र में मंत्रालय से पूछा गया था कि क्या सरकार के पास अपने गृहराज्यों में लौटने वाले प्रवासी मजदूरों का कोई आंकड़ा है? विपक्ष ने सवाल में यह भी पूछा था कि क्या सरकार को इस बात की जानकारी है कि इस दौरान कई मजदूरों की जान चली गई थी और क्या उनके बारे में सरकार के पास कोई डिटेल है? साथ ही सवाल यह भी था कि क्या ऐसे परिवारों को आर्थिक सहायता या मुआवजा दिया गया है?

इसी तरह RTI के जवाब में कहा गया कि सरकार के पास लॉकडाउन के कारण अलग-अलग जगहों पर फंसे प्रवासी मजदूरों का आंकड़ा नहीं है।

 

नौकरी/बेरोज़गारी

प्रवासी मजदूरों को लेकर विपक्ष की तरफ से एक सवाल और पूछा गया था, जिसमें कहा गया कि कोरोना लॉकडाउन के चलते कितने मजदूरों ने अपनी नौकरियां गंवाईं हैं। साथ ही ये भी पूछा गया कि लॉकडाउन के बाद बेरोजगारी के क्या आंकड़े हैं। लेकिन सरकार की तरफ से इस बारे में भी कोई जवाब नहीं मिला। सरकार ने कहा कि अभी उनके पास इसके आंकड़े मौजूद नहीं हैं

 

कोरोना की चपेट में आने वाले स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, संसद में कोरोना वायरस से प्रभावित हुए डॉक्टर, नर्स और अन्य स्वास्थ्यर्मियों से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी चौबे ने कहा था कि केंद्र सरकार के पास इसके आंकड़े नहीं हैं क्योंकि स्वास्थ्य का मामला राज्यों के अंतर्गत आता है और केंद्रीय स्तर पर ये आंकड़े नहीं जुटाए जाते।

इससे पहले स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने भी कोरोना वायरस पर संसद में अपने बयान में जान गंवाने वालों डॉक्टरों का कोई जिक्र नहीं किया था।

केंद्र सरकार के जबाव पर भारतीय चिकित्सा संघ (IMA) भड़क गया है। मामले पर बयान जारी करते हुए उसने कहा है कि ये सरकार की उदासीनता को दिखाता है और लोगों के लिए खड़े हुए राष्ट्रीय नायकों को त्यागने के बराबर है। IMA ने अपने जबाव में बताया कि कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में अब तक 382 डॉक्टर अपनी जान गँवा चुके हैं।

कोरोना से मृत पुलिसकर्मी और सफाई कर्मचारियों

मानसून सत्र के दौरान सरकार ने संसद को बताया कि उसके पास महामारी के दौरान अस्पतालों और मेडिकल कचरे की सफाई से जुड़े स्वास्थ्य और सुरक्षा खतरों के कारण जान गंवाने वाले सफाई कर्मचारियों का आंकड़ा नहीं है। अस्पताल और स्वास्थ्य राज्यों का मामला है।

इसी तरह गृह मंत्रालय ने मानसून सत्र के दौरान संसद को बताया कि उसके पास कोरोना के खिलाफ लड़ाई में अपनी जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों का रिकॉर्ड नहीं है

किसानों की खुदकुशी

एक और अहम डेटा को लेकर सरकार ने जवाब देने से इनकार किया है। वो है किसानों की आत्महत्या का डेटा। देशभर में कितने किसानों ने आत्महत्या की है इसे लेकर भी सरकार के पास कोई जवाब नहीं है। सरकार का तर्क है कि राज्य सरकारें एनसीआरबी के साथ आंकड़े शेयर नहीं कर रही हैं। इसके लिए केंद्र की तरफ से राज्यों को चिट्ठी भी लिखी गई, लेकिन उसका कोई जवाब नहीं आया है। दिसंबर, 2018 में कर्ज के कारण किसानों की आत्महत्या से जुड़े सवाल पर सरकार ने कहा था कि उसके पास 2016 के बाद से ऐसे आंकड़े उपलब्ध नहीं है। NCRB ने किसानों की आत्महत्या के आंकड़े जारी किए, लेकिन आत्महत्या का कारण नहीं बताया।

 

RTI कार्यकर्ताओं और पत्रकारों की हत्या से जुड़े आंकड़े

इसी तरह सरकार ने संसद में एक सवाल के जवाब में कहा था कि उसके पास RTI कार्यकर्ताओं की हत्या से जुड़े आंकड़े भी नहीं है वहीं पत्रकारों की हत्या से जुड़े सवालों पर भी सरकार का ऐसा ही जवाब था। जुलाई, 2018 में तत्कालीन गृह राज्य मंत्री हंसराज अहीर ने कहा था कि NCRB हत्याओं के आंकड़े इकट्ठा करता है, लेकिन इसमें पत्रकार और दूसरे पेशों के आधार पर वर्गीकरण नहीं होता।

 

आंगनवाड़ी से बाहर हुई महिला

कोरोनोवायरस के बाद आंगनवाड़ी कार्यबल से बाहर निकलने वाली महिलाओं की संख्या पर सितंबर 2020 में, केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने संसद को बताया कि मंत्रालय कोरोनोवायरस लॉकडाउन के बाद आंगनवाड़ी कार्यबल से बाहर निकलने वाली महिलाओं की संख्या पर डेटा बनाए नहीं रखता है

 

लिंचिंग से हुई मौतों की संख्या

द न्यूज मिनट की खबर के अनुसार, मार्च, 2018 में तत्कालीन गृह राज्यमंत्री हंसराज अहीर ने राज्यसभा को बताया था कि केंद्र सरकार लिंचिंग के कारण देश में हुई मौतों की संख्या नहीं बता सकती क्योंकि ऐसे कोई आंकड़े उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा था कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ऐसे आंकड़े इकट्ठा नहीं करता। NCRB की 2017 की रिपोर्ट, जो 2019 में जारी हुई, उसमें भी लिंचिंग के कारण हुई मौतों का जिक्र नहीं था।

प्लाज्मा बैंक की जानकारी

सितंबर 2020 में, स्वास्थ्य के लिए MoS अश्विनी चौबे ने राज्यसभा को सूचित किया कि चूंकि कोरोनोवायरस पॉजिटिव रोगियों को प्लाज्मा थेरेपी प्रदान करने के लिए (प्लाज़्मा) बैंकों को स्थापित करने की पहल राज्यों ने की है, ऐसे में प्लाज्मा बैंकों का कोई केंद्रीय डेटाबेस नहीं रखा गया है।

लॉक डाउन में कितनी लड़कियों ने स्कूल छोड़ा

वहीं कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे के एक सवाल के जवाब में स्मृति ईरानी ने बताया कि सरकार के पास यह आंकड़ा भी नहीं है कि लॉकडाउन के कारण कितनी लड़कियों ने स्कूल छोड़ दिया है। यह जवाब इसी महीने संसद में दिया गया है।

MSME बंद के आंकड़े

सितंबर 2020 में MoS, MSMEs के प्रताप चंद्र सारंगी से पूछ गया कि मार्च से अगस्त 2020 तक बंद हुए छोटे और मध्यम व्यवसायों की संख्या कितनी है?  तो उन्होनें कहा कि केंद्र के पास कोई डेटा नहीं है।

लॉकडाउन में आत्महत्याओं की संख्या

डीएमके की कनिमोझी द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में, सरकार ने 20 सितंबर, 2020 को जवाब दिया कि यह शिक्षा प्रदान करने के प्रति ‘अत्यंत संवेदनशील’ है, लेकिन दावा किया कि लॉकडाउन में छात्र आत्महत्याओं का डेटा नहीं मिला है।

संसद के मानसून सत्र की शुरुआत सरकार के ऐसे ही कुछ जवाबों से हुई। जिनमें सरकार ने ज्यादातर सवालों के जवाब में कहा कि उसके पास आंकड़े मौजूद नहीं हैं। सरकार के इन जवाबों को लेकर अब विपक्षी नेता लगातार मोदी सरकार पर हमलावर हैं।

अब कांग्रेस नेता शशि थरूर ने बीजेपी सरकार पर एक कार्टून के जरिए तंज कसा है। उन्होंने एक बार फिर बिना आंकड़ों की सरकार का जिक्र करते हुए एनडीए का मतलब- “नो डेटा अवेलेबल” बताया।

 

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