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SBI,RBI, LIC आदि सरकारी बैंक और संस्थानों ने कर्मचारियों के वेतन से लगभग 205 करोड़ PM Cares Fund में दिए

तर्कसंगत

September 28, 2020

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प्रधानमंत्री के पीएम केयर फण्ड में सरकारी शिक्षण संस्थाओं के अलावा सात पब्लिक सेक्टर बैंक, सात अलग वित्तीय संस्थान, LIC और RBI ने मिलकर 204.75 करोड़ दान दिया है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार  भारत की सबसे पुरानी और विश्वशनीय बिमा कम्पनी LIC, GIC और नेशनल हाउसिंग बैंक ने मिलकर 144.5 करोड़ रूपये दान किये। इतने सारे पैसे उन पैसे से अलग है जो CSR यानि कि कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के नाम पर दी जाती है।

इंडियन एक्सप्रेस की RTI को मिले जवाब के अनुसार अब 15 सरकारी बैंक और संस्थानों द्वारा दी गयी कुल रकम 349.25 करोड़ हो जाती है।

 

LIC का सबसे बड़ा योगदान

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और संस्थानों की सूची, जिन्होंने आरटीआई प्रश्नों का जवाब दिया है उसमें एलआईसी ने अकेले 113.63 करोड़ रुपये विभिन्न श्रेणियों के तहत दिए हैं: कर्मचारियों के वेतन से 8.64 करोड़ रुपये, “कॉर्पोरेट संचार” के तहत 100 करोड़ रुपये और  “स्वर्ण जयंती फाउंडेशन” के तहत 5 करोड़।

रिकॉर्ड बताते हैं कि एलआईसी का 100 करोड़ रुपये का योगदान 31 मार्च को किया गया था – 5 करोड़ रुपये, भी मार्च में दान कर दिए गए थे, लेकिन प्रतिक्रिया में कोई तारीख निर्दिष्ट नहीं की गई थी।

 

SBI पब्लिक सेक्टर बैंक में सबसे बड़ा दानदाता

RTI के जवाब के अनुसार SBI ने 107.95 करोड़ रुपये के योगदान के साथ सात सार्वजनिक बैंकों में सबसे ऊपर है. 31 मार्च को 100 करोड़ रुपये की पहली किश्त का भुगतान किया था। इसकी प्रतिक्रिया में, SBI ने कहा कि संपूर्ण योगदान अपने कर्मचारियों के वेतन से था। राष्ट्रीय बैंकिंग नियामक, RBI ने कहा कि इसका 7.34 करोड़ रुपये “कर्मचारियों द्वारा योगदान” से था।

इंडियन एक्सप्रेस द्वारा बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा कर्मचारियों के वेतन और संबंधित लाभों से उनके योगदान को दर्शाने वाले आरटीआई के जवाब मिले:

* केनरा बैंक ने यह बताने के अलावा कोई विवरण नहीं दिया कि उसका “कुल राशि का योगदान”  15.53 करोड़ रुपये था।

* यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (14.81 करोड़ रुपये): जो कि उसके सारे कर्मचारियों की एक दिन के प्रिविलेज लीव की राशि है।

* सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (11.89 करोड़ रु): दो दिवसीय की प्रिविलेज लीव की राशि दान में दी।

* बैंक ऑफ महाराष्ट्र (5 करोड़ रु): एक दिन का वेतन और कर्मचारियों का दो दिन का लीव इन्केशमेंट है।

* SIDBI , भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (रु 80 लाख): कर्मचारियों के वेतन से “स्वैच्छिक योगदान” के रूप में ये पैसे काटे गए।

* GIC (14.51 लाख रु): कर्मचारियों का “एक दिन का वेतन” दान में दिया ।

* IRDAI, बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण, (16.08 लाख रुपये): कर्मचारियों द्वारा “स्वैच्छिक योगदान” के रूप में दिए।

* नाबार्ड, नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट, (9.04 करोड़ रुपये): “कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों” की वेतन से लिया गया पैसा था।

* नेशनल हाउसिंग बैंक (रु 3.82 लाख): “कर्मचारी योगदान” बता कर दिया ।

एलआईसी के अलावा, जो कर्मचारी वेतन के अलावा अन्य स्रोतों से भी योगदान करते हैं, उनमें शामिल हैं: सीएसआर से 22.8 करोड़ रुपये के साथ जीआईसी; सीएसआर से 14.2 करोड़ रुपये के साथ सिडबी; और, सीएसआर से 2.5 करोड़ रुपये के साथ नेशनल हाउसिंग बैंक।

आरटीआई के सवाल अगस्त में भेजे गए थे और प्रतिक्रियाएं इसी महीने मिली थीं। EXIM बैंक, जो पूरी तरह से सरकार के स्वामित्व में है, ने RTI अनुरोध के तहत कोई विवरण नहीं दिया लेकिन 2019-20 के लिए इसकी वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि इसने कोष में 1 करोड़ रुपये का योगदान दिया।

इस वर्ष 28 मार्च को कोविद के प्रकोप के बाद पीएम CARES की स्थापना की गई थी और 31 मार्च तक 3,076.62 करोड़ रुपये का कोष था, जिसमें से 3,075.85 करोड़ रुपये को “स्वैच्छिक योगदान” के रूप में आधिकारिक वेबसाइट पर दिखाया गया था।

19 अगस्त को, द इंडियन एक्सप्रेस ने बताया था कि 38 सार्वजनिक उपक्रमों ने अपने सीएसआर फंड का उपयोग 2,105 करोड़ रुपये से अधिक का योगदान करने के लिए किया था। पांच दिन पहले, इस अखबार ने बताया कि कई केंद्रीय शिक्षण संस्थानों और नियामकों ने शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के वेतन से, और छात्रों और पेंशनरों से “स्वैच्छिक योगदान” के रूप में 21.81 करोड़ रुपये का योगदान दिया।

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