ख़बरें

FDA उल्लंघन के आरोपों के बीच एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भारत में परिचालन किया बंद, 150 कर्मचारी प्रभावित

तर्कसंगत

Image Credits: OpIndia

September 29, 2020

SHARES

मानव अधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने घोषणा की है कि वो आठ साल के सफल संचालन के बाद भारत में अपने परिचालन को रोकने का फैसला किया है. संगठन ने आरोप लगाया है कि उसके बैंक खाते को जब्त कर दिया गया था और सरकारी एजेंसी के “उत्पीड़न” का वो शिकार हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा संगठन के खातों को जब्त करने के हालिया कदम के बाद संगठन के निर्णय से लगभग 150 कर्मचारी प्रभावित होंगे. संगठन ने कहा कि वो भारत में कर्मचारियों को जाने देने को मजबूर हैं.

 

बैंक खाते फ्रीज़

एमनेस्टी ने आज बयान जारी कर आरोप लगाया है कि 10 सितंबर 2020 को भारत सरकार ने संस्था के सभी अकाउंट को फ्रीज कर दिया है. इसके बाद उसे अपने अधिकतर स्टाफ को निकालना पड़ा है और भारत में चल रहे सभी प्रोजेक्ट और शोध कार्यों पर भी रोक लगा दी है. यही नहीं संस्था ने भारत सरकार की कार्यवाई को निराधार और प्रेरित बताया है.

 

सरकार पर आरोप

एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के कार्यकारी निदेशक अविनाश कुमार ने कहा, ‘पिछले दो सालों से संस्था के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और बैंक खातों की फ्रीज करना आकस्मिक नहीं है.’ एमनेस्टी के जारी बयान में कुमार ने यह भी कहा है, ‘ कई सरकारी एजेंसियां सहति प्रवर्तन निदेशालय लगातार संस्था के काम काज उत्पीड़न किया जा रहा है.’ कुमार ने कहा, ‘ हाल में हमने दिल्ली हिंसा और जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज उठाई, जिसके बाद सरकार द्वारा कार्रवाई की गई है.’

मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए एमनेस्टी ने अपने बयान में कहा कि ये कार्रवाई बेबुनियाद और खास मकसद से लगाए गए आरोपों के आधार पर मानवाधिकार संगठनों के खिलाफ भारत सरकार की निरंतर विच-हंट की ताजा कड़ी है.

नियमों का उल्लंघन कर विदेश फंड हासिल करने के आरोपों पर संस्था ने अपने बयान में कहा कि उसने भारतीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह के कानूनों को पूरी तरह से पालन किया है.

 

पिछले आठ सालों में 40 लाख (चार मिलियन) से अधिक भारतीयों ने एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के काम का समर्थन किया है और करीब 100,000 भारतीयों ने वित्तीय योगदान दिया है.

एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया ने कहा कि इन योगदानों का विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 के साथ कोई संबंध नहीं है. भारत सरकार इसे मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बता रही है, जो इस बात का प्रमाण है कि मानव अधिकार कार्यकर्ता और संस्थाओं के प्रति कितनी दुर्भावना है.

 

FDA का उल्लंघन

वहीं केंद्र सरकार के शीर्ष अधिकारियों ने एमनेस्टी इंटरनेशनल के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि ED विदेश फंड हासिल करने में अनियमितताओं के लिए संस्था की जांच कर रही है. अधिकारियों के अनुसार, एमनेस्टी भारत में विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) के तहत पंजीकृत नहीं है जो विदेशी फंडिंग के लिए जरूरी है. इसके बावजूद एमनेस्टी इंडिया को FDI के जरिए विदेशी फंड मिला जो गैर-लाभकारी संस्थाओं के लिए निषेध है.

इससे पहले ED ने 2017 में भी एमनेस्टी के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया था, हालांकि एमनेस्टी इसके खिलाफ कोर्ट पहुंच गई और कोर्ट से उसे राहत मिली.

पिछले साल केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भी एक शिकायत के आधार पर एमनेस्टी इंडिया के खिलाफ मामला दर्ज किया था. इस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि गृह मंत्रालय की मंजूरी के बिना एमनेस्टी UK ने एमनेस्टी इंडिया को 10 करोड़ रुपये FDI के तौर पर दिए थे.

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...