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वीडियो देखिये, निर्भया को इन्साफ दिलाने वाली वकील से हाथरस ADM की बहस, लड़ेंगी पीड़िता का केस

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Image Credits: Zee News

October 4, 2020

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निर्भया कांड के दोषियों को मौत की सजा दिलाकर सुर्खियों में आई उत्तर प्रदेश में इटावा की वकील सीमा समृद्धि कुशवाहा अब हाथरस में हैवानियत की शिकार पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए फ्री केस लड़ेंगी । दरअसल, सीमा हाथरस कांड की पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए उसके परिवार से मिलने के लिए उसके गांव जा रही थी लेकिन उनको जिला प्रशासन ने रोक लिया।

वह शुक्रवार को परिजनों से मिलने के लिए उसके गांव गई थी, लेकिन वहां पहले तैनात पुलिस ने उन्हें गांव में नहीं घुसने दिया।

 

 

एबीपी के मुताबिक इस दौरान उनकी हाथरस के अपर जिलाधिकारी से हुई तीखी बहस सोशल मीडिया में वायरल हो गई। जब उनसे हाथरस जाने का कारण पत्रकारों ने पूछा तो उन्होने साफ किया कि वह वह हाथरस दुष्कर्म कांड मामले की पीड़िता का केस लड़ेंगी और मानवता को शर्मसार करने वाली इस मामले के लिए वह कोई भी फीस नहीं लेंगी। उन्होने कहा पीड़िता का परिवार चाहता है कि मैं उनकी वकील के तौर पर इस केस को लड़ूं, लेकिन प्रशासन मुझे परिवार से मिलने नहीं दे रहा है। प्रशासन कह रहा है कि इससे कानून व्यवस्था बिगड़ेगी। हाथरस की बेटी के शव को पुलिस ने पेट्रोल डालकर जलाया है। मैने निर्भया को न्याय दिलाया है और इसे भी न्याय दिलाऊंगी। सीमा ने बताया कि देश किसी भी प्रोफेशन की महिलाएं यह दावा नहीं कर सकती हैं कि वह सुरक्षित हैं।

सरकार ने हाथरस मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) गठित की है। इसके अलावा मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने के निर्देश दिए हैं। पुलिस ने मामले के चारों आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया है।

इधर, राज्य के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने कहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गले की हड्डी टूटने के कारण मौत होना सामने आया है। फिलहाल रेप की पुष्टि नहीं हुई है।

सीमा कुशवाहा 16 दिसंबर, 2012 को दिल्ली में हुए निर्भया गैंगरेप और हत्या मामले में निर्भया के पारिवारिक वकील थीं। उस घटना में छह दोषियों ने चलती बस में निर्भया से गैंगरेप किया था। निर्भया की सिंगापुर में मौत हो गई थी।

कुशवाहा ने डिस्ट्रिक कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ी थी। बाद में मामले के चारों दोषियों अक्षय सिंह, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और मुकेश सिंह को 20 मार्च, 2020 को फांसी दी गई थी।

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