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लॉकडाउन में जिन्होनें लोन मोरेटोरियम का फायदा लिया या नहीं लिया, फायदा दोनों को हो सकता है

तर्कसंगत

October 4, 2020

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लॉकडाउन के बीच लोगों को आर्थिक तौर पर राहत देने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने लोन मोरेटोरियम की सुविधा दी थी. यानी अगर मैं किसी लोन की ईएमआई भर रहा हूं तो कुछ महीने तक ईएमआई को टालने की सुविधा.  मार्च में लोगों को मोराटोरियम यानी लोन की ईएमआई तीन महीने तक न चुकाने की छूट दी थी. बाद में इसे और तीन महीने के लिए बढ़ाकर 31 अगस्त तक कर दिया गया. यानी कुल छह महीने का मोरेटोरियम पीरियड मिला. आरबीआई ने कहा था कि इन छह महीने अगर लोन की किश्त नहीं चुकाएंगे, तो इसे डिफॉल्ट नहीं माना जाएगा. हालांकि, इसके साथ एक शर्त भी थी. वो ये कि मोरेटोरियम पीरियड खत्म होने के बाद बकाया पेमेंट पर ब्याज देना पड़ेगा.

 

कोर्ट की सख्ती पर मिली राहत

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद सरकार की ओर से बैंक लोन या क्रेडिट कार्ड के मोरेटोरियम पर लगने वाले अतिरिक्त ब्याज पर राहत दी गई है. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि एमएसएमई, एजुकेशन, होम, कंज्यूमर, ऑटो लोन पर लागू चक्रवृद्धि ब्याज को माफ किया जाएगा. इसके अलावा क्रेडिट कार्ड बकाया पर भी ये ब्याज वसूली नहीं की जाएगी.

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए एक एफीडेविट में केंद्र ने बताया है कि 6 महीने की स्थगन अवधि (मोरेटोरियम पीरियड) में दो करोड़ तक के कर्जदारों पर लगने वाले “ब्याज पर ब्याज (इंट्रेस्ट ऑन इंटरेस्ट)” को माफ किया जाएगा. एफीडेविट में बताया गया है कि सरकार को इस मुद्दे का सिर्फ एक ही समाधान नजर आ रहा है जिसके तहत कंपाउंड इंटरेस्ट का भार सरकार को उठाना होगा.

बता दें पहले सरकार और आरबीआई ने इंटरेस्ट ऑन इंटरेस्ट को रद्द किए जाने के खिलाफ पैरवी की थी. क्योंकि यह दूसरे स्टेकहोल्डर्स, खासकर जमाकर्ताओं और अपना बकाया चुका चुके लोगों के लिए नुकसानदेह होता. एक विशेषज्ञ समिति की सलाह के बाद सरकार ने अपनी स्थिति बदली है.

 

लोन मोरेटोरियम न लेने वालों को भी राहत

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की खबर में कहा गया ही कि छह महीने के मोरेटोरियम की सुविधा न लेने वालों को भी सरकार राहत देने पर विचार कर रही है. वित्‍त मंत्रालय ऐसे लोगों के लिए कैशबैक जैसी स्‍कीम ला सकता है. इसके अलावा दो करोड़ रुपये तक कर्ज वाली वो MSMEs जिन्‍होंने वक्‍त पर किस्‍त भरी, उन्‍हें भी मुआवजा मिल सकता है. सरकार ऐसा इसलिए करना चाहती है ताकि इन्‍हें मोरेटोरियम का फायदा उठाने वालों के बराबर लाया जा सके. मोरेटोरियम लेने वालों को ‘ब्‍याज पर ब्‍याज’ में छूट दी जा सकती है, बशर्ते सुप्रीम कोर्ट सरकार का प्रस्‍ताव मान ले.

एक सरकारी सूत्र ने कहा, “मोरेटोरियम का विकल्‍प चुनने वाले कर्जदार को कितना फायदा हुआ, यह पता लगाया जा सकता है. सरकार इसे उन्‍हें पास कर सकती है जिन्‍होंने अपना बकाया वक्‍त पर चुकाया. कठिनाई के बावजूद जो वक्‍त पर ईएमआई भरते रहे, उन्‍हें नजरअंदाज करना गलत होगा.”

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