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अब चिड़ियाघरों के निजीकरण पर सरकार कर रही विचार, अगले बजट में हो सकती है घोषणा

तर्कसंगत

Image Credits: Patrika

October 6, 2020

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केंद्र की मोदी सरकार अब चिड़ियाघरों के निजीकरण की तैयारी में जुट गई है। इसके लिए सरकार ने पीपीपी मॉडल पर चिड़ियाघर चलाने का फैसला किया है। हिन्दुतान टाइम्स के मुताबिक पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने सोमवार को कहा कि सरकार देश में चिडिय़ाघरों का सार्वजनिक-निजी साझेदारी के माध्यम से सुधारने और उनका विस्तार करने के लिए एक योजना लाएगी।

‘वन्जीव सप्ताह 2020’ के ऑनलाइन कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि इस योजना के लिए धन आवंटित किया जाएगा और अगले साल बजट सत्र में इसकी घोषणा की जाएगी। जावडेकर ने कहा, ‘बच्चों को चिडिय़ाघर घूमना पंसद है और ऐसे में उनका अनुभव बढ़ाने के लिए इन चिडिय़ाघरों का उपयुक्त प्रबंधन किया जाना चाहिए। देश में 160 चिडिय़ार हैं। हम देशभर में चिडिय़ाघरों के उन्नयन एवं विस्तार के लिए शीघ्र ही नयी योजना लायेंगे और हम इसके लिए बजट निर्धारित करेंगे। अगले साल के बजट सत्र में उसकी घोषणा की जाएगी।’

सीजेडए के एक अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए), जो भारत के प्राणि उद्यान की देखरेख करता है, उसका बजट 12 करोड़ रुपये से कम है।

“चिड़ियाघर इतने कम बजट पर काम नहीं रह सकता। देश के 160 चिड़ियाघरों में से 10 को इस योजना के लिए चुना गया है। एक निजी सलाहकार इस बात पर काम कर रहा है कि चिड़ियाघर में पीपीपी मॉडल पर कैसे विकसित किया जा सकता है, ”अधिकारी ने कहा।

उन्होंने कहा कि इस योजना राज्य सरकारों और निगमों को शामिल किया जाएगा। इस ऑनलाइन कार्यक्रम में जावडेकर ने दिल्ली राष्ट्रीय प्राणि उद्यान के कुल आर्थिक मूल्यांकन के आधार रिपोर्ट जारी किया। एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट (टेरी) और केंद्रीय प्राणि उद्यान प्राधिकरण ने मिलकर यह रिपोर्ट तैयार की है।

सीजेडए ने चिड़ियाघर द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं का मूल्यांकन करने के लिए एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट की स्थापना की थी। लगभग 77% योगदान चिड़ियाघर की मनोरंजक और सांस्कृतिक सेवाओं से आता है, जबकि शिक्षा और अनुसंधान – अगली सबसे महत्वपूर्ण सेवा – कुल आर्थिक मूल्य में केवल 9% का योगदान है।

इस रिपोर्ट के अनुसार 2019-20 में दिल्ली के राष्ट्रीय प्राणि उद्यान के पारिस्थितिकी तंत्र का आर्थिक नजर से कुल मूल्य 422.76 करोड़ रूपये है। रिपोर्ट के मुताबिक इसका 77 प्रतिशत हिस्सा मनोरंजन और सांस्कृतिक सेवाओं से आया जो 324.33 करोड़ रूपये है।

चिड़ियाघर में 73 भारतीय प्रजातियों और स्तनधारियों, पक्षियों और सरीसृपों की 26 विदेशी प्रजातियां हैं। उभयचर और कीटों की अन्य प्रजातियों को जोड़ने के लिए योजनाएं बनाई गई हैं। 2017-18 में, चिड़ियाघर ने जानवरों के प्रबंधन के लिए 40 करोड़ रुपये खर्च किए थे।

विश्लेषण के अनुसार, दिल्ली चिड़ियाघर में आने वाले पर्यटकों की संख्या में वर्षों से लगातार वृद्धि हुई है। 2018-19 में, 19,568 और 2,692,730 विदेशी और घरेलू पर्यटकों ने चिड़ियाघर का दौरा किया था। 2018-19 में चिड़ियाघर द्वारा उत्पन्न कुल राजस्व 10.09 करोड़ रुपये था।

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