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बैंक के सीईओ ने 500 रूपये की मदद के बदले अपने मैथ्स टीचर को दिए 30 लाख के शेयर

तर्कसंगत

October 7, 2020

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अच्‍छे काम कभी न कभी फल जरूर देते हैं। मुसीबत में आप जिसकी मदद करते हैं, वो शायद आपको ताउम्र न भूल आए। आईडीएफसी फर्स्‍ट बैंक के सीईओ और एमडी वी वैद्यनाथन ने सालों बाद अपने गणित के टीचर, गुरदयाल स्‍वरूप सैनी को 30 लाख रुपये के शेयर तोहफे में दिए हैं। क्‍यों? क्‍योंकि जब कोई नहीं था, जब सैनी ने उनकी मदद की थी। वैद्यनाथन को एक इंटरव्‍यू के लिए जाना था मगर जेब में पैसे नहीं थे। सैनी ने मदद की जिसे वे आज तक नहीं भूले। जब वे इस मुकाम पर हैं तो वैद्यनाथन ने अपने टीचर का खास अंदाज में शुक्रिया अदा करने का फैसला किया।

 

The MD & CEO of IDFC First bank is V.Vaidyanathan. I have met Vaidya a few times when he was at ICICI and found him to…

Posted by Peri Maheshwer on Tuesday, 6 October 2020

 

गुरु-शिष्‍य की कहानी

सोशल मीडिया पर वायरल पोस्‍ट के अनुसार, वैद्यनाथन तब चेन्‍नई में रहा करते थे। मेसरा के बिड़ला इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी में इंज‍िनियरिंग के लिए क्‍वालिफाई हो गए थे लेकिन वहां जाकर इंटरव्‍यू देने और काउंसलिंग कराने के पैसे नहीं थे। ऐसे में गणित पढ़ाने वाले गुरदयाल सैनी ने वैद्यनाथन को 500 रुपये उधार दिए। वैद्यनाथन को न सिर्फ वहां दाखिला मिला, बल्कि उन्‍होंने कोर्स भी पूरा किया। मगर इस बीच सैनी से उनका संपर्क टूट गया। वैद्यनाथन ने कई बार अपने गुरु से संपर्क करने की कोशिश की मगर हाल तक उन्‍हें सफलता नहीं मिली थी।

 

500 रुपये की मदद के बदले 30 लाख 


इसी महीने, IDFC फर्स्‍ट बैंक ने स्‍टॉक एक्‍सचेंज में एक रेगुलेटरी फाइलिंग की है। सैनी के नाम एक ऑफिशियल नोट के मुताबिक, वैद्यनाथन ने अपने एक लाख इक्विटी शेयर (वर्तमान मूल्‍य 30 लाख रुपये) अपने टीचर को ट्रांसफर कर दिए हैं। नोटिस में लिखा गया है, “वी वैद्यनाथन ने IFDC फर्स्‍ट बैंक लिमिटेड के अपने 1,00,00 शेयर अपने पूर्व अध्‍यापक, गुरदयाल स्‍वरूप सैनी को ट्रांसफर कर दिए हैं। एक तोहफे के रूप में, बिना किसी शर्त, इसे उनके टीचर की जीवन में पहले की मदद के धन्‍यवाद की तरह देखा जाए।”

 

 

सोशल मीडिया पर वैद्यनाथन के इस कदम की खूब तारीफ हो रही है। एक यूजर ने लिखा कि ‘इस दौर में, ऐसे वक्‍त में ऐसी कहानियां विश्‍वास जगाती हैं।’ एक अन्‍य शख्‍स ने कमेंट किया, “यही असली गुरु-शिष्‍य परंपरा है जो क‍ि ऐसे वक्‍त में बड़ी दुर्लभ है।”

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