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सुप्रीम कोर्ट: विरोध के नाम पर सार्वजनिक स्थानों पर कब्जा गलत

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Image Credits: Wikimedia/Wikimedia

October 8, 2020

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सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में 15 दिसंबर से करीब 100 दिन तक दिल्ली के शाहीन बाग में हुए धरना प्रदर्शन को लेकर बुधवार को बड़ा फैसला सुनाया है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि कोई भी व्यक्ति या समूह सार्वजिनक स्थानों को ब्लॉक नहीं कर सकता है और सार्वजिनक स्थानों पर अनिश्चितकाल के लिए कब्जा करना पूरी तरह से गलत है। इस तरह के प्रदर्शन से लोगों के अधिकारों का हनन होता है।

सत्तारूढ़ नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, या सीएए के खिलाफ लंबे समय से चल रहे विरोध के संदर्भ में महिलाओं द्वारा शुरू विरोध  दक्षिण दिल्ली के शाहीन बाग में 15 दिसंबर, 2019 को शुरू हुआ और 23 मार्च को समाप्त हो गया, इसलिए नहीं कि पुलिस की कार्रवाई के कारण बल्कि कोरोनोवायरस बीमारी (कोविद -19) के कारण। प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए मंच और अन्य सुविधाओं को बाद में पुलिस द्वारा नष्ट कर दिया गया था। काफी प्रयासों के बाद भी पुलिस धरना नहीं हटा सकी थी। बाद में कोरोना वायरस के कारण दिल्ली में धारा 144 लागू होने के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां से हटा दिया था।

इस प्रदर्शन के खिलाफ वकील अमित साहनी और बीजेपी नेता नंदकिशोर गर्ग ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

विरोश के साथ कर्त्तव्य

जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस अनिरूद्ध बोस और जस्टिस कृष्ण मुरारी की बेंच ने कहा कि शाहीन बाग में मध्यस्थता के प्रयास सफल नहीं हुए, लेकिन इसका कोई पछतावा नहीं है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक बैठकों पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता है, लेकिन उन्हें निर्दिष्ट क्षेत्रों में होना चाहिए। संविधान विरोध करने का अधिकार देता है, लेकिन इसे समान कर्तव्यों के साथ जोड़ा जाना चाहिए। अंग्रेजों के राज वाली हरकत अब ठीक नहीं है।

“हमें यह स्पष्ट रूप से स्पष्ट करना होगा कि सार्वजनिक तरीके और सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह से कब्जा नहीं किया जा सकता है और वह भी अनिश्चित काल के लिए। लोकतंत्र और असंतोष एक साथ हो सकते हैं, लेकिन फिर असंतोष व्यक्त करने वाले प्रदर्शनों को अकेले निर्दिष्ट स्थानों पर होना चाहिए, ”न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीश पीठ ने कहा।

जिम्मेदारों पर कारवाई

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह के शाहीन बाग जैसे विरोध प्रदर्शन स्वीकार नहीं किए जा सकते हैं। जिम्मेदार अधिकारियों को इनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। इनसे लोगों के अधिकारों का हनन होता है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में अधिकारियों को किस तरीके से कार्य करना है यह उनकी जिम्मेदारी है। प्रशासन को कोर्ट के आदेशों का इंतजार किए बिना ही रास्ता जाम कर प्रदर्शन रहे लोगों को तत्काल हटाना चाहिए।

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