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देखें वीडियो, परीक्षा के लिए सीबीएसई की बढ़ी रजिस्ट्रशन फीस देने में असमर्थ हैं दिल्ली के कई छात्र

तर्कसंगत

October 9, 2020

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दिल्ली की एक सरकारी स्कूल में 10 वीं कक्षा की छात्रा पूजा दक्षिण दिल्ली के मदनपुर खादर में एक सार्वजनिक शौचालय के अंदर अपने परिवार के साथ रहती है। वह उन छात्रों में से एक है जो इस साल बोर्ड परीक्षा के रजिस्ट्रेशन के लिए रजिस्ट्रशन फीस भरने में संघर्ष कर रहे हैं।

 

NDTV की एक रिपोर्ट के अनुसार , दिल्ली के सरकारी स्कूलों में वर्तमान में कक्षा 10 और 12 में तीन लाख से अधिक छात्र पढ़ रहे हैं। बोर्ड परीक्षा में बैठने के लिए दी जाने वाली रजिस्ट्रेशन फीस कक्षा 10 के लिए ₹ 1,800 और कक्षा 12 के लिए 3,100 रूपये है।

जो छात्र फीस का भुगतान करने में विफल होंगे, उनके नाम पंजीकृत नहीं होंगे और इसलिए उन्हें परीक्षाओं में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

2019 में, सीबीएसई (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) द्वारा पंजीकरण शुल्क में बढ़ोतरी के बाद दिल्ली सरकार ने परीक्षा शुल्क भरने  का बीड़ा उठाया था। हालाँकि, हालिया कोरोनावायरस महामारी के दौरान, दिल्ली सरकार ने वित्तीय संसाधनों की कमी का हवाला देते हुए पंजीकरण शुल्क का भुगतान करने से इनकार कर दिया है।

दिल्ली सरकार के सूत्रों के अनुसार, छात्रों के पंजीकरण शुल्क का भुगतान करने के लिए, 100 करोड़ की राशि होगी और यह भार राज्य सरकार वहन नहीं कर सकता क्योंकि यह पहले से ही पिछले वर्ष की तुलना में राजस्व में 91 प्रतिशत की कमी का सामना कर रहा है।

पूजा के पिता, जो पाँच व्यक्ति के परिवार में एकलौते कमानेवाले हैं, वो शौचालय का उपयोग करने पर लोगों द्वारा लगाए गए शुल्क से अपनी आजीविका कमाते हैं। पूजा की मां घरेलू मदद का काम करती हैं।

“हम इतने गरीब हैं कि बताना भी मुश्किल है। अगर हमारे पास पैसा होता तो हम इसे दे देते। यदि हम वह फीस देने में असमर्थ रही तो  वह परीक्षा नहीं दे पाएगी और हमेशा के लिए इस घर में बंध कर रह जाएगी।” पूजा के पिता ने कहा।

“हमारे पास फीस देने के लिए पैसे नहीं हैं, लेकिन मैं भविष्य में अध्ययन करना चाहती हूं। मेरी माँ पिछले 2-3 महीनों से बेरोजगार है और घर पर थी। वह अभी काम पर वापस जाने लगी है और अगले महीने वेतन प्राप्त करेगी। ”पूजा ने कहा।

हाल के घटनाक्रम में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार, 7 अक्टूबर को सीबीएसई, दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार को परीक्षा शुल्क में वृद्धि के खिलाफ एक याचिका पर नोटिस जारी किया। अभिभावक फोरम फॉर अर्थफुल एजुकेशन नामक एक एसोसिएशन द्वारा याचिका दायर की गई थी जिसमें कहा गया था कि बोर्ड ने 2019-20 में परीक्षा शुल्क में “मनमानी” वृद्धि की है और इस साल भी वही चार्ज कर रहा है जब लोगों को कोरोनोवायरस महामारी द्वारा आर्थिक रूप से प्रभावित किया गया है।

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