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पढ़े लिखों की उत्तर प्रदेश के जेल में भी कमी नहीं, एनसीआरबी रिपोर्ट में खुलासा

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Image Credits: Economic Times

October 9, 2020

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उत्तर प्रदेश राज्य की जेलों में पढ़े-लिखे लोगों की कमी नहीं है। अधिकतर जेल ग्रेजुएट कैदियों से भरी हुई हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के अनुसार, देश में सबसे ज्यादा इंजीनियरिंग और पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री वाले कैदी उत्तर प्रदेश की जेलों में बंद हैं।

चौंकाने वाली बात ये भी सामने आयी है कि देशभर की कई जेलो में 3,740 कैदी ऐसे हैं, जिनके पास बाकायदा टेक्निकल डिग्रियां हैं।

इनमें से सबसे ज्यादा 727 (लगभग 20 प्रतिशत) उत्तर प्रदेश की जेलों में हैं। उत्तर प्रदेश के बाद महाराष्ट्र (495) और कर्नाटक (362) का नंबर आता है।

टेक्निक्ल डिग्री वाले क़ैदियों में यूपी अव्वल

टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने अपनी खबर में लिखा है कि टेक्निकल डिग्री के अलावा अगर पोस्ट ग्रेजुएट कैदियों की बात करें तब भी उत्तर प्रदेश की जेलें पहले नंबर पर है। देश में 5,282 पोस्ट ग्रेजुएट कैदी हैं, जिनमें से सर्वाधिक 2,010 उत्तर प्रदेश की जेलों में बंद हैं।

राज्य के जेल महानिदेशक आनंद कुमार ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया को बताया कि टेक्निकल डिग्रियों वाले अधिकतर कैदी दहेज के लिए प्रताड़ना या रेप के आरोपी या दोषी पाए गए हैं। वहीं कुछ आर्थिक अपराधों में आरोपी हैं।

मगर जेल प्रशासन इन क़ैदियों के हुनर को बर्बाद होने नहीं दें चाहता। इसीलिए आनंद कुमार ने इंजीनियरिंग की डिग्रियों वाले कैदी जेलों में टेक्नोलॉजी अपग्रेड करने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कुछ क़ैदियों ने जेल का रिकॉर्ड कंप्यूटराइज करने में मदद की है। जेल परिसरों के भीतर जेल रेडियो लगाने में भी इनकी अहम भूमिका रही है। कई कैदियों ने जेलों में ई-प्रिजनर सिस्टम बनाया है।

उन्होंने आगे कहा कि इन पढ़े-लिखे कैदियों में से कुछ दूसरे कैदियों को पढ़ाने का भी काम कर रहे हैं।

क़ैदियों की संख्या

भारत की जेलों में क्षमता से अधिक कैदी भरे हुए हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े भी इसकी पुष्टि करते हैं।

NCRB के मुताबिक, 2016 के बाद भारत में जेलों की क्षमता में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन यह कैदियों की संख्या में हुई बढ़ोतरी की तुलना में काफी कम है। इसके चलते देशभर की जेलों में दबाव काफी बढ़ गया है। इस मामले में उत्तर प्रदेश की जेलों के हालात देश में सबसे खराब है।

बतौर NCRB, 2016 की तुलना में दिसंबर, 2018 तक जेलों की क्षमता 3 लाख 80 हजार 876 से बढ़कर 3 लाख 96 हजार 223 हो गई। यानी जेलों की क्षमता में 4.03 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। इसी दौरान इन जेलों में बंद कैदियों की संख्या 4 लाख 33 हजार 3 से 7.64 फीसदी बढ़कर 4 लाख 66 हजार 84 हो गई।

पहले जहां जेलों में क्षमता से 13.7 फीसदी ज्यादा कैदी बंंद थे, वही अब बढ़कर 17.6 फीसदी हो गया।

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