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ADR ने एक बार फिर बिहार चुनाव में दागी उम्मीदवारों का आंकड़ा बताया है

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Image Credits: Business Standard

October 11, 2020

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चुनाव आते ही दागी उम्मीदवारों को लेकर बहस शुरू हो जाती है। बिहार में इस महीने शुरू हो रहे विधानसभा चुनावों से पहले भी ऐसी चर्चा जोर पकड़ चुकी है।

ऐसे में लोगों की नज़र एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) रिपोर्ट पर जाती ही जाती है जो हर केंद्र या विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों का बही खाता जनता जनार्दन के सामने रखते है.

 

बिहार में 36 प्रतिशत दागी उम्मीदवार

इस बार भी एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने उम्मीदवारों के शपथ पत्रों का विश्लेषण कर पता लगाया है कि 2005 के बाद बिहार में चुने गए 820 विधायकों और सांसदों में लगभग 36 प्रतिशत (295) के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।

इन दागियों में से 84 भाजपा, 101 जनता दल (यूनाइटेड), 62 राष्ट्रीय जनता दल (राजद), 17 कांग्रेस और 11 लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) की टिकट से चुनाव जीते थे। इनमें सांसद और विधायक दोनों शामिल हैं।

कांग्रेस उम्मीदवारों की सम्पत्ति सबसे ज़्यादा

जनप्रतिधियों की संपत्ति की बात करें तो कांग्रेस के सांसद और विधायक सबसे धनी नजर आते हैं।

ADR के मुताबिक, 2005 से बिहार में चुने गए कांग्रेस के 46 सांसदों और विधायकों की औसत संपत्ति 4.04 करोड़ और भाजपा के 246 सांसदों और विधायकों की औसत संपत्ति 2.92 करोड़ रुपये है।

वहीं जदयू के 296 चुने हुए जनप्रतिनिधियों की औसत संपत्ति 1.42 करोड़ रुपये, राजद के 158 सासंद और विधायकों की औसत संपत्ति 2.14 करोड़ रुपये है।

अपराधियों की संख्या लोजपा में सबसे ज़्यादा

ADR के मुताबिक अगर प्रतिशत के हिसाब से देखें तो लोजपा सबसे आगे है। 2005 से पार्टी के 27 सांसदों और विधायकों में 41 प्रतिशत (11) के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं।

इसके बाद राजद के 158 में 39 प्रतिशत (64) जनप्रतिनिधियों और कांग्रेस के 46 में 37 प्रतिशत (17) जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। वहीं जनता दल (यूनाइटेड) और भाजपा के 34 प्रतिशत सांसदों और विधायकों के खिलाफ गंभीर प्रवृत्ति के आपराधिक मामले दर्ज हैं।

जानकारी देना अनिवार्य

राजनीति में अपराधियों के प्रवेश पर रोक लगाने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव लड़ने वाले सभी उम्मीदवारों के लिए अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी वाला शपथ पत्र देना अनिवार्य किया था। चुनाव आयोग को दिए जाने वाले इस शपथ पत्र में उन्हें अपनी संपत्ति की भी जानकारी देनी होती है। पिछले महीने चुनाव आयोग ने उम्मीदवारों के लिए इसे तीन बार अखबार में प्रकाशित करवाना भी अनिवार्य कर दिया था।

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