पर्यावरण

CPCB ने बताया है कि कोरोना के बाद से भारत ने कितना बायोमेडिकल कचरा उतपन्न किया है

तर्कसंगत

Image Credits: India Water Portal

October 13, 2020

SHARES

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने जून से अब तक 18,006 टन बायोमेडिकल कचरा उत्पन्न किया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी किए गए आंकड़ों में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इसमें महाराष्ट्र का सबसे अधिक (3,587 टन) योगदान रहा है।

रिपोर्ट में ये भी बता गया है कि सिर्फ सितंबर महीने में ही देश भर में करीब 5,500 टन कचरा पैदा हुआ जो एक महीने में सबसे अधिक है।

 PPE किट, मास्क, दस्ताने

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों से मिले आंकड़ों के अनुसार जून से सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 18,006 टन कोरोना वायरस संबंधी बायोमेडिकल कचरा पैदा हुआ है। इसका निस्तारण 198 आम बायोमेडिकल अपशिष्ट उपचार सुविधाओं (CBWTFs) द्वारा किया जा रहा है। इस कचरे में PPE किट, मास्क, जूता कवर, दस्ताने, खून से दूषित वस्तुएं, ड्रेसिंग, प्लास्टर कास्ट, कॉटन स्वैब, रक्त से दूषित बिस्तर या तरल पदार्थ ब्लड बैग, सिरिंज आदि शामिल हैं।

राज्यों में सबसे आगे कौन?

राज्य्वार तरीके से अगर देखा जाए तो महाराष्ट्र ने सबसे ज़्यादा कुल मिलाकर 3,587 टन कोविड -19 बायो मेडिकल वेस्ट का उत्पादन किया, जिसके बाद तमिलनाडु 1,737 टन, गुजरात 1,638 टन, केरल 1,516 टन, उत्तर प्रदेश 1,432 टन, दिल्ली 1,400 टन, कर्नाटक 1,380 टन और पश्चिम बंगाल 1,000 टन कचरा निकाला।

CRPB डाटा के अनुसार सितंबर में दिल्ली में 382 टन कचरा पैदा हुआ है। भारत में अगस्त में 5,240 टन कचरा उत्पन्न हुआ था। जिसमें 1,359 टन महाराष्ट्र और केरल तथा कर्नाटक में 588 टन था।

जुलाई में देश ने 4,253 टन कचरे का उत्पादन किया। जिसमें महाराष्ट्र (1,180), कर्नाटक (540) और तमिलनाडु (401) शीर्ष तीन राज्य हैं। इसी तरह जून में 3,025 टन कचरा जमा हुआ था। जिसमें महाराष्ट्र 524 टन, गुजरात 350 टन, दिल्ली 333 टन था। सितंबर में, गुजरात में 600 टन बायोमेडिकल कचरा उत्पन्न हुआ, इसके बाद तमिलनाडु (543) और महाराष्ट्र (524) हैं।

दिशानिर्देश

कोरोना के बढ़ते आंकड़ों को देखते हुए CPCB ने मार्च में अस्पताल, क्वारंटाइन सेंटर, घर, नमूना संग्रहण केंद्र, लैब्स, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, शहरी स्थानीय निकायों और CBMWFF में बायोमेडिकल कचरे के बेहतर निस्तारण के संबंध में दिशा निर्देश जारी किए थे।

इसके अलावा CPCB ने मई में कचरे की निगरानी और इलेक्ट्रॉनिक मैनिफेस्ट सिस्टम से डाटा एकत्र करने के लिए COVID19BWM मोबाइल ऐप भी विकसित किया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस ऐप का इस्तेमाल करने का आदेश दिया था।

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...