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असम सरकार अब राज्य भर के संस्कृत स्कूल और मदरसों को बंद करने जा रही है

तर्कसंगत

October 14, 2020

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असम राज्य में संचालित सभी मदरसे और संस्कृत स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अब जल्द ही दूसरे संस्थानों में अपने पढ़ाई की व्यवस्था करनी होगी। असम में भाजपा की अगुवाई वाली सरकार ने राज्य के सभी मदरसों और संस्कृत स्कूलों को बंद करने का फैसला किया है। इसके लिए सरकार आगामी नवंबर महीने में अधिसूचना जारी करेगी।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार शिक्षा मंत्री बिस्वा ने कहा, “सभी राज्य संचालित मदरसों को नियमित स्कूलों में परिवर्तित किया जाएगा या कुछ मामलों में शिक्षकों को राज्य संचालित स्कूलों में स्थानांतरित किया जाएगा और मदरसों को बंद कर दिया जाएगा। इसी तरह 100 संस्कृत स्कूलों को भी बंद किया जाएगा। इसके लिए नवंबर में एक अधिसूचना जारी की जाएगी।”

उन्होंने कहा कि राज्य में शिक्षा में एकरूपता लाने के लिए सरकार ने यह कदम उठाने का निर्णय किया है।

मदरसा एक शैक्षिक संस्थान होता है जहां कुरान और इस्लामी पवित्र कानून की पढ़ाई कराई जाती है। इसके साथ ही वहां गणित, व्याकरण, कविता और इतिहास भी पढ़ाया जाता है। शैक्षणिक और शोध वेबसाइट द कन्वर्सेशन पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार की रिपोर्ट है कि चार फीसदी मुस्लिम छात्र देश के मदरसों में पूर्णकालिक (फुल-टाइम) पढ़ते हैं।

 

एकसमानता के लिए किया ये फैसला

शिक्षा मंत्री बिस्वा ने कहा, “यदि हम मदरसों में धार्मिक ग्रंथ कुरान पढ़ाते हैं तो फिर बाइबल और भगवद गीता को भी पढ़ाया जाना चाहिए। इसलिए हम एकरूपता लाना चाहते हैं और इस प्रथा को रोकना चाहते हैं।”

उन्होंने कहा, “मदरसों द्वारा बड़ी संख्या में दी गई डिग्री नौकरी में भी संकट पैदा कर रही है। असम सरकार ने इस डिग्री को मैट्रिकुलेशन और हायर सेकेंडरी के समकक्ष घोषित किया है। इसने नौकरी में बड़ा फर्क पैदा किया है।”

राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड (SMEB) के अनुसार, असम में 614 मान्यता प्राप्त मदरसे हैं। एसएमईबी की वेबसाइट के अनुसार, इनमें से 400 उच्च मदरसे हैं, 112 जूनियर उच्च मदरसे हैं और अन्य 102 वरिष्ठ मदरसे हैं।

वेबसाइट के मुताबिक कुल मान्यता प्राप्त मदरसों में से 57 लड़कियों के लिए हैं, 3 लड़कों के लिए हैं और 554 सह-शैक्षिक हैं। 17 मदरसे उर्दू माध्यम से चल रहे हैं।

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