सचेत

आपके मैसेज पढ़ने के लिए एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन में छूट मिले इसके लिए भारत इन देशों के साथ मिल गया है

तर्कसंगत

Image Credits: Deccan Chronicle

October 15, 2020

SHARES

एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन आपकी पर्सनल चैट को सिक्योर करने के लिए बनाई गई है ये तो सभी जानते हैं. लेकिन इसके साथ ये भी हम सब जानते हैं कि दुनिया की किसी भी सरकार को हमारी सुरक्षा अच्छी नहीं लगती. इसके लिए हर सरकार के पास अपने अपने तर्क हैं. बहरहाल यूनाइटेड किंगडम ने अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड के साथ मिलकर इंटेलिजेंस इशूज़ की एक ग्लोबल अलायंस बनाया है. इसको नाम दिया गया Five Eyes का अब ये फाइव आईज में भारत और जापान भी शामिल हो गए हैं.

इंडिया टुडे के मुताबिक अब इस ग्रुप ने इस ग्रुप ने एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के खिलाफ़ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए एक संदेश जारी किया है. ये कहते हुए कि एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन की आड़ में ये अपने प्लेटफॉर्म पर फ़ैलने वाली चाइल्ड पॉर्नोग्राफी जैसी गैरकानूनी गतिविधि को नज़रअंदाज़ न करें.

इन सातों देशों की कोशिश है कि इन्हें एंड टू एंड एन्क्रिप्शन में बैक डोर एंट्री मिल जाए. जिससे कि ये अपराध,आतंकवाद से जुडी गतिविधियों पर नज़र रख सकें। सात सरकारों के प्रतिनिधियों ने एन्क्रिप्टेड बैकस्क्रिप्शन की आवश्यकता को केवल एन्क्रिप्टेड इंस्टेंट मैसेजिंग एप्लिकेशन के लिए ही नहीं बल्कि डिवाइस एन्क्रिप्शन, कस्टम एन्क्रिप्टेड एप्लिकेशन और एकीकृत प्लेटफार्मों में एन्क्रिप्शन के लिए भी ज़रूरी बताया है.

अपनी मांग रखते हुए दिए गए बयान में इन सात देशों ने उल्लेख किया गया है कि टेक कंपनियां स्वयं भी इस बात का आंकलन नहीं कर सकती कि कौन उनके द्वारा निर्धारित नियम और शर्तों का उल्लंघन कर रहा हैं और जिसमें यौन शोषण, हिंसक अपराध, आतंकवादी प्रचार, और हमले की योजना सहित जैसे अवैध सामग्री और गतिविधि के मामले शामिल हैं. ऐसी स्थिति में सुरक्षा कारणों से इंटेलिजेंस और दूसरे ज़रूरी विभागों के काम में दिक्कत आती है. अपने प्रेस रिलीज़ में सातों देशों ने ये मांग रखी कि वो इन सोशल मीडिया प्लेटफार्म के साथ मिल कर काम करना चाहते हैं.

इसके लिए उन्होंने कुछ उपाय भी सुझाये हैं:

  • सिस्टम डिज़ाइन में जनता की सुरक्षा को एम्बेड करें, जिससे कंपनियों को अवैध सामग्री और गतिविधि के खिलाफ प्रभावी ढंग से कार्य करने में सक्षम बनाया जा सके, ताकि सुरक्षा में कोई कमी न हो, और अपराधों की जांच और अभियोजन की सुविधा और कमजोर लोगों की सुरक्षा;
  • देश के लॉ एनफोर्समेंट एजेंसीज को पढ़ने लायक और प्रयोग में लान लायक रूप में कंटेंट मुहैय्या कराया जाए जिसकी आवश्यकता हो.

 

एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, इस बात की पुष्टि करता है कि जिन दो जनों के बीच चैट चल रही है, उनके सिवा उसे कोई और न पढ़ सके. न किसी देश की सरकार, न ही खुद वो प्लेटफॉर्म, जिस पर बातचीत हो रही है. एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन टेक्नॉलजी यूजर की प्राइवसी और पर्सनल चैट को सिक्योर करने के लिए बनाई गई है. हमें ये वॉट्सऐप, सिग्नल और आईफोन की iMessage जैसी ऐप्स में देखने को मिलती है.

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...