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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद भारत के एक भी राज्य में पूरी तरह से काम करने वाला पशु कल्याण बोर्ड नहीं है

तर्कसंगत

October 15, 2020

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एक दशक  पहले उच्चतम न्यायालय ने राज्यों को पशु कल्याण बोर्ड  (Animal Welfare Board) गठित करने के लिए एक निर्देश जारी किया था, लेकिन आज भी भारत के कई राज्यों में पशु कल्याण बोर्ड का गठन नहीं किया गया है तथा जिन राज्यों में गठित हुआ है वहां कर्मचारियों और  बजट के अभाव की वजह से सुचारु रुप से काम नहीं हो रहे हैं।

 स्क्रॉल की एक रिपोर्ट के अनुसार मई 2019 में , पशु अधिकार कार्यकर्ता गौरी मौलेखी ने सूचना के अधिकार के तहत, हर राज्य सरकार के पास आवेदन पत्र दाखिल किए जिसमें उन्होंनें पशु कल्याण बोर्ड के गठन ,बजट का अभाव, तथा नियुक्त अधिकारियों के चयन जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए उसका विवरण मांगा।

कुछ महीनों बाद उन्हें यह जवाब मिला, कि राज्य पशु कल्याण बोर्ड कुछ राज्यों में स्थापित किया गया है जैसे महाराष्ट्र,  राजस्थान और लक्ष्यदीप, लेकिन एक या दो कमियों की वजह से वह कार्य करने की स्थिति में नहीं है जैसे, बोर्ड में कोई अधिकारी नियुक्त नहीं किया गया है, बजट का सही तरीके से विभाजन नहीं किया गया है, किसी भी मुद्दे पर किसी भी प्रकार की मीटिंग के लिए कोई भी कार्यकर्ता मौजूद नहीं होता है।

इसके अतिरिक्त, कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों जैसे कर्नाटक, बिहार और पुदुचेरी को बोर्ड का  पुनर्गठन करना था, पिटीशन के अनुसार, सूचना का अधिकार के जवाब में असम, गोवा, मेघालय, पंजाब और तमिलनाडु जैसे राज्यों ने कोई विवरण नहीं दिया है।

 पशु क्रूरता निवारण अधिनियम ( Prevention of Animal Cruelty Act) और इसके नियमों को लागू करने के लिए राज्य सरकारों को पशु कल्याण बोर्ड का गठन करना चाहिए| भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 2001 से इस मुद्दे के कई आदेश जारी किए हैं। राज्य पशु कल्याण बोर्ड की स्थापना के लिए पर्यावरण मंत्रालय द्वारा भी निर्देश जारी किए गए थे। लेकिन फिर भी वे ज्यादातर राज्यों में समान रूप से गठित नहीं हुए हैं। राज्य में ऐसे बोर्ड जो न तो क्रियाशील हैं और ना ही सुचारू रूप से काम करने की स्थिति में है।

उन पर ध्यान केंद्रित करने की ज़रूरत है।

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