सप्रेक

10,000 रुपये से शुरू होने वाला यह स्टार्टअप ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बना रहा है

तर्कसंगत

October 16, 2020

SHARES

हमने अब तक कई ऐसी कहानियां पढ़ी हैं जब लोग सफलता पाने के लिए अपने जुनून का पीछा करते हैं और कड़ी मेहनत करके भी सफलता हासिल करते हैं। हमारी आज की कहानी के नायक हर्षित सहदेव ने सफलता पाने के लिए अपने जुनून का पीछा किया और लोगों को प्रेरित किया।

तर्कसंगत की टीम से बातचीत के दौरान उन्होंने अपने अनुभवों और संघर्षों को बताया।

हर्षित का बचपन ऋषिकेश और देहरादून जैसे शांत शहरों में बीता। मनोविज्ञान में परास्नातक( Masters in Psychology) करने के बाद, उन्होंने इंडस क्वालिटी फ़ाउंडेशन (Indus Quality Foundation),नई दिल्ली के साथ काम करना शुरू किया और बाद में रामकृष्ण आश्रम में ‘वैल्यू एजुकेटर’ (‘Value Educator’) के रूप में शामिल हुए। रामकृष्ण आश्रम के साथ काम करते हुए, उन्हें देश भर में यात्रा करने का अवसर मिला और इसने उन्हें भारतीय समाज की बेहतर समझ भी दी। उन्हें उत्तराखंड के पहाड़ी गांवों में काम करने का भी मौका मिला।

 

 

आपने इस सफर की शुरुआत कहां से की?

2013 में, केदारनाथ त्रासदी के बाद, हर्षित का सामना एक चुनौतीपूर्ण स्थिति से हुआ, जब आईटीबीपी (ITBP) के एक जवान ने उन्हें बताया कि उत्तराखंड का देससारी गाँव सबसे ज्यादा प्रभावित है। उन्होंने गांव का दौरा किया और सोशल मीडिया पर समस्या के बारे में पोस्ट करना शुरू कर दिया। गाँव में त्रासदी के बाद, सभी बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। यहां तक ​​कि लोगों को प्राथमिक उपचार के लिए पांच किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता। हर्षित ने सोशल मीडिया पर इन मुद्दों को व्यापक रूप से उजागर किया, इसके बाद लोगों को मदद मिलनी शुरू हुई। हर्षित मनोवैज्ञानिक और मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल हैं, 15 से ज्यादा देशों में मेंटल हेल्थ वर्कशाप कर चुके है जो कि अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।

एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद, वह कॉर्पोरेट दुनिया में लौट आए। लेकिन उनके जुनून ने उन्हें रोका नहीं।

 

 

आपने स्टार्टअप शुरू करने का फैसला किन चुनौतियों को देखते हुए किया?

वर्ष 2018 में, एक फ्रांसीसी लड़की ने हर्षित के बारे में पढ़ा और उनसे मिलने और उन गांवों का दौरा करने की इच्छा व्यक्त की, जहां हर्षित ने ‘केदारनाथ त्रासदी’ के दौरान सेवा की थी। हर्षित से बातचीत के बाद, वह भारत आई और दोनों ने स्थिति को देखने के लिए क्षेत्र के गांवों का दौरा किया। फ्रांसीसी लड़की प्राकृतिक सुंदरता और संसाधनों के बावजूद क्षेत्र में लोगों की पीड़ा को देखकर आश्चर्यचकित थी। शिक्षा और अवसरों की कमी के साथ, गांवों से लोगों का सामूहिक पलायन हुआ। दोनों ने इस क्षेत्र में लोगों की मदद के लिए एक एनजीओ शुरू करने का फैसला किया, लेकिन प्रारंभिक शोध (preliminary research) के बाद इस विचार को छोड़ दिया। उन्होंने महसूस किया कि अस्थायी मदद के बजाय, उन्हें एक स्टार्ट-अप शुरू करना चाहिए जो ग्रामीणों के लिए स्थायी रोजगार के अवसर पैदा कर सके।

 

 

आपका स्टार्टअप समाज की किस समस्या के लिए काम करता है?

हर्षित और उनके फ्रांसीसी दोस्त ने क्षेत्र में उत्पाद बेचने वाली एक कंपनी शुरू करने का फैसला किया। उन्होंने जल्द ही “हिमशक्ति” के बैनर तले अपना स्टार्टअप शुरू किया, और उनका पहला उत्पाद था “फ्लेवर्ड गॉरमेट सॉल्ट ’(Flavored Gourmet Salt)–मूल उत्तराखंड की रेसिपी से बना नमक जिसमें रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों का स्वाद शामिल था। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस स्टार्टअप की शुरुआत महज 10,000 रुपये की छोटी पूंजी से हुई थी।

नमक हिमालय की पहाड़ियों में पाए जाने वाले कई अन्य जड़ी-बूटियों से बनाया जाता है और यह इस क्षेत्र का एक पारंपरिक नुस्खा है। उन्होंने बिना किसी प्रशिक्षण, उच्च अंतरराष्ट्रीय मांग और क्षेत्र में आसान रोजगार सृजन के क्षेत्र में शून्य प्रतिस्पर्धा (zero competition) को देखते हुए इस उत्पाद के साथ शुरुआत करने का फैसला किया। हिमालय में पाई जाने वाली जड़ी-बूटियाँ औषधीय गुणों में उच्च हैं और कई विकारों को ठीक करने में मदद करती हैं। हमने अपने पहले उत्पाद ‘flavored gourmet salt ’ के साथ शुरुआत की, जो उपभोक्ताओं को मिलने वाले लाभ और इसे बनाने वाले ग्रामीणों को देखते हुए किया। “- हर्षित ने तर्कसंगत  से बातचीत  के दौरान बताया।

 

 

आगे चलकर और किन चीजो के ऊपर काम करने वाले हैं?

हर्षित ने हाल ही में Didsari Coolers के नाम से शिकंजी मसाला भी लॉन्च किया है। उन्होंने देहरादून में कई रेस्तरां और कैफेटेरिया में इसे लॉन्च किया है। उन्होंने अपने उत्पाद को अमेरिका को निर्यात भी किया है। हर्षित ने तर्कसंगत की टीम को बताया कि ब्रिटेन की सेना के लिए काम करने वाले सेफ को उनका नमक बेहद पसंद आया।

 

लॉकडाउन के वजह से आपको किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा ?

लॉकडाउन का उनके व्यवसाय पर प्रभाव पड़ा है, लेकिन अब वह वापस ट्रैक पर है। हर्षित कहते हैं, “लॉकडाउन ने ऑनलाइन रिटेलर अमेज़ॅन और फ्लिपकार्ट पर उत्पादों को  भेजने  में कठिनाइयों का कारण बना। पहाड़ से सामान ले जाने की भी समस्या थी।

हर्षित का इरादा गाँव के बड़ी संख्या में लोगों को अपने साथ जोड़ने का है। वे कहते हैं, ‘बेरोजगारी के कारण इन पहाड़ी गाँवों में बहुत अधिक प्रवास होता है। चुनौतियों के कारण लोग कृषि से दूर हो रहे हैं। हमारा उद्देश्य किसानों के लिए एक निश्चित आय तय करना है। अभी हमारे साथ जुड़े किसान हर महीने कम से कम पंद्रह हजार रुपये कमाते हैं। जैसे-जैसे हमारा कारोबार बढ़ेगा, हम और किसानों को अपने साथ जोड़ेंगे।

 

 

तर्कसंगत की टीम से बात करते हुए हर्षित ने उत्तराखंड के मसालों के बारे में भी रोचक चीजें बताइ जैसे कि उन्होंने बताया कि जिस मात्रा में मसालों का उत्पादन उत्तराखंड में होता है उतना उत्पादन भारत के किसी राज्य में में नहीं होता तथा उन्होंने वहां की हल्दी, लहसुन और अदरक के विशेष गुणों का भी बखान किया उन्होंनें बताया कि उत्तराखंड की हल्दी अपने आप में बेहद खास है क्योंकि उसकी जो गुणवत्ता है वैसी गुणवत्ता की हल्दी बहुत कम राज्यों में मिलती है और वैसा ही गुण वहां के लहसुन और अदरक में भी पाया जाता है ,उन्होंने यह फैसला किया कि यदि इस गुणवत्ता के मसालों को भारत के दूसरे राज्य या फिर दूसरे देशों में अगर बिजनेस किया जाए तो  उत्तराखंड के निवासियों को काफी मदद मिल सकती है उनके आय का एक निश्चित स्रोत बन सकता

आज, हर्षित का स्टार्टअप ‘हिमशक्ति’ धीरे-धीरे और तेजी से अपना प्रभाव बना रहा है। उनके स्टार्टअप को भारतीय प्रबंधन संस्थान(  Indian Institute of Management) का भी समर्थन प्राप्त था, और हाल ही में, प्रसिद्ध भारतीय शेफ हरपाल सिंह सोखी भी उनके उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए उनकी टीम में शामिल हुए हैं।

 

 

हर्षित का स्टार्टअप उन आगामी सामाजिक स्टार्टअप में से एक है, जो समाज के लिए काम करने के प्रति हमारे दृष्टिकोण को बदलता है और युवाओं में ‘सामाजिक उद्यमिता’ (social entrepreneurship) बारे में जागरूकता भी पैदा करता है। तर्कसंगत की टीम इनके जज्बे को सलाम करती है और उन्हें बहुत सारी शुभकामनाएं देती है कि वह इसी तरह से समाज के समस्याओं के समाधान के लिए अपना योगदान देते रहे ,उनकी कहानी वास्तव में प्रेरणा से भरी है, जो हमें एक जुनून का पीछा करने के लिए प्रेरित करती है।

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...