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ग्लोबल हंगर इंडेक्स है क्या और इसमें भारत के इतने पिछड़े होने का कारण क्या है?

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Image Credits: wikimedia

October 18, 2020

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भारत वैश्विक भूख सूचकांक 2020 में 107 देशों की सूची में 94वें स्थान पर है और भूख की ‘गंभीर’ श्रेणी में है। विशेषज्ञों ने इसके लिए खराब कार्यान्वयन प्रक्रियाओं, प्रभावी निगरानी की कमी, कुपोषण से निपटने का उदासीन दृष्टिकोण और बड़े राज्यों के खराब प्रदर्शन को दोषी ठहराया है। 2019 में भारत इस सूचकांक में 102वें और 2018 में 103वें नंबर पर था। इस साल भारत की रैंकिंग सुधरी है, लेकिन यह ध्यान रखना होगा कि रिपोर्ट में कुल देशों की संख्या कम हुई है।

 

 

क्या है रिपोर्ट में?

यह सूचकांक चार मापदंडों पर आधारित होता है और इसमें पांच साल तक के बच्चों के स्वास्थ्य का मूल्यांकन किया जाता है। ये मापदंड- अल्प पोषण, वेस्टिंग (उम्र के अनुसार वजन में कमी), स्टंटिंग (उम्र के लिहाज से लंबाई में कमी) और शिशु मृत्युदर है। बतौर रिपोर्ट भारत की लगभग 14 प्रतिशत जनसंख्या कुपोषण का शिकार है और बच्चों में स्टंटिंग दर 37.4 प्रतिशत है। यानी इन बच्चों की लंबाई इनकी उम्र की तुलना में कम है। रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश 75वें, म्यांमार 78वें और पाकिस्तान 88वें स्थान पर हैं। वहीं, नेपाल 73वें और श्रीलंका 64वें स्थान पर हैं. दोनों देश ‘मध्यम’ श्रेणी में आते हैं। चीन, बेलारूस, यूक्रेन, तुर्की, क्यूबा और कुवैत सहित 17 देश भूख और कुपोषण पर नजर रखने वाले वैश्विक भूख सूचकांक (जीएचआई) में शीर्ष पायदानों पर हैं।

क्या कारण है?

रिपोर्ट में कहा गया है कि समय से पहले जन्म और कम वजन के कारण बच्चों की मृत्यु दर विशेष रूप से गरीब राज्यों और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि खराब क्रियान्वयन प्रक्रिया, प्रभावी निगरानी की कमी और कुपोषण से निपटने के लिए दृष्टिकोण में समन्वय का अभाव अक्सर खराब पोषण सूचकांकों का कारण होते हैं। द वायर की रिपोर्ट के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति शोध संस्थान, नई दिल्ली में वरिष्ठ शोधकर्ता पूर्णिमा मेनन ने कहा कि भारत की रैंकिंग में समग्र परिवर्तन के लिए उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों के प्रदर्शन में सुधार की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा, ‘राष्ट्रीय औसत उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों से बहुत अधिक प्रभावित होता है. जिन राज्यों में वास्तव में कुपोषण अधिक है और वे देश की आबादी में खासा योगदान करते हैं। ’ उन्होंने कहा, ‘भारत में पैदा होने वाला हर पांचवां बच्चा उत्तर प्रदेश में है।  इसलिए यदि उच्च आबादी वाले राज्य में कुपोषण का स्तर अधिक है तो यह भारत के औसत में बहुत योगदान देगा।  स्पष्ट है कि तब भारत का औसत धीमी होगा। ’ मेनन ने कहा अगर हम भारत में बदलाव चाहते हैं, तो हमें उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश और बिहार में भी बदलाव की आवश्यकता होगी। न्यूट्रीशन रिसर्च की प्रमुख श्वेता खंडेलवाल ने कहा कि देश में पोषण के लिए कई कार्यक्रम और नीतियां हैं, लेकिन जमीनी हकीकत काफी निराशाजनक है।

 

ग्लोबल हंगर इंडेक्स है क्या?

वैश्विक स्तर पर भूख का आकलन करने के लिए हर साल एक रिपोर्ट जारी की जाती है। इसे आयरलैंड की गैर लाभकारी संस्था कंसर्न वर्ल्डवाइड और बर्लिन स्थित वेल्थुरहिल्फे द्वारा संयुक्त रूप से प्रकाशित किया जाता है।2018 में इस रिपोर्ट में 119, 2019 में 117 और इस साल 107 देश शामिल किए गए हैं। इसमें जिन देशों का स्कोर नीचे रहता है उनको ऊंची रैंकिंग मिलती हैं और ऊंचे स्कोर वाले देशों को निचली रैंकिंग पर रखा जाता है।

भारत को इस साल 50 में से 27.2 नंबर मिले हैं। पिछले कुछ सालों से भारत के प्रदर्शन में सुधार आया है। 2000 में भारत को इस सूचकांक में 38.9, 2006 में 37.5 और 2012 में 29.3 अंक मिले थे। रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2000 से 2018 के बीच पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में कमी आई है। इसकी वजह निमोनिया और डायरिया से होने वाली मौतों पर लगाम लगना है।

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