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मुफ्त में कोविड-19 वैक्सीन बाँटने के वादे पर पूर्व चुनाव आयुक्त ने क्या कहा है?

तर्कसंगत

October 23, 2020

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भारतीय जनता पार्टी (BJP) के घोषणापत्र में बिहार के लोगों को एक पैसा भी खर्च किए बिना Covid-19 वैक्सीन बांटने का वादा किया गया है, जो किसी भी प्रकार से आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन नहीं है, इस मामले के जानकार लोगो ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया|

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को आने वाले चुनावों के लिए एक साथ घोषणापत्र जारी करते हुए कहा कि Covid -19 टीका  तैयार है और बिहार में सभी  को मुफ्त में प्रदान किया जाएगा। सीतारमण  जी की घोषणा के बाद विपक्ष ने भारत के चुनाव आयोग से इस मामले का खुद से आकलन  करने के लिए कहा, क्योंकि चुनाव मुश्किल से एक सप्ताह दूर हैं, और इस प्रकार की घोषणा चुनाव के परिणामों को प्रभावित करते हैं।

मामले से जानकार लोगों ने हिंदुस्तान टाइम्स को सलाह दी कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के भाग 123 (2) के तहत, “सार्वजनिक नीति की घोषणा, या अपने अधिकारों का प्रयोग  यदि इस बात को ध्यान में रखकर किया गया है कि चुनावी अधिकारों में किसी भी प्रकार से हस्तक्षेप ना हो, तो उसे आचार संहिता का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में इस बात की जानकारी दी गई है, अनुचित प्रभाव का क्या मतलब होता है।

हालांकि, आदर्श आचार संहिता में कहा गया है कि “किसी भी तरह के मुफ्त के वितरण, निस्संदेह, सभी लोगों को प्रभावित करते हैं। यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की जड़ को एक  बड़े हद तक हिला देता है और चुनाव के परिणाम को भी काफी हद तक प्रभावित करता है|

 

covid 19 bjp

 

ऐसा ही एक  मुद्दा 2019 के चुनाव के वक्त भी उठाया गया था।” मामले से परिचित एक व्यक्ति ने उल्लेख करते हुए कहा 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने न्याय योजना की घोषणा की थी जिसमें सबको 72,000 रुपये हर साल देने का वादा किया गया था,इसे चुनाव आयोग ने आचार संहिता का उल्लंघन नहीं माना था।

आयोग ने 5 मई, 2019 के अपने आदेश  के बारे में आगे बताते हुए कहा कि “संविधान में साफ तौर पर यह लिखा गया है की कोई भी राज्य अपने नागरिकों के  भलाई  के लिए  किसी भी प्रकार की योजनाएं बना सकता  है और  न्याय योजना  भी नागरिकों के  विकास के लिए ही बनाई गई है। और  यह किसी भी प्रकार से चुनाव प्रक्रिया की नियमों का उल्लंघन नहीं करती है और ना ही किसी भी नागरिक के ऊपर उसके वोट को लेकर बाव डालती है।

आयोग ने अभी बताया, ” 2019 के उदाहरण को देखते हुए, एमसीसी का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है , और ना ही यह योजना भ्रष्टाचारी सोच को बढ़ावा देती है विशेषज्ञों के अनुसार, घोषणा पत्र राजनीतिक दलों को ऐसे ऐलान करने की स्वतंत्रता देता है जो वे सरकार के रूप में नहीं कर सकते. पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त विक्रम संपत ने कहा, “राजनीतिक दलों को इस तरह के वादे करने का अधिकार है।” “यह अनुचित प्रभाव है या नहीं, यह मतदाता को तय करना है। चुनावी वादे करने वाली पार्टियों को कोई अपवाद में नहीं ले सकता।

पूर्व सीईसी एन गोपालस्वामी ने कहा कि अगर कार्यस्थल में कोई अधिकारी इस तरह की घोषणा करता है, तो उसे अनुचित प्रभाव के रूप में नहीं माना जा सकता है, हालांकि ऐसा नहीं है जब कोई राजनीतिक दल मिल कर इसे अपने घोषणा पत्र में कहता है, तो वह उल्लंघन है। गोपालस्वामी ने कहा, “मैनिफेस्टो आपको उन चीजों को कहने की अनुमति देता है जिन्हें आप अन्यथा नहीं कह सकते।”

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