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बैंक विश्लेषक संदीप खंडेलवाल ने अपने गाँव में सब्जियां उगाने के लिए अपनी लाखों की नौकरी छोड़ दी

तर्कसंगत

Image Credits: OTDS/Representational

October 26, 2020

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छह साल पहले जब संदीप खंडेलवाल ने एक निवेश बैंकर (investment banker) के रूप में अपनी नौकरी छोड़, संबलपुर (sambalpur) जिले में अपनी पुश्तैनी जमीन पर खेती (farming) करने का फैसला किया तो इस फैसले से उनके परिवार वालों को बहुत निराशा हुई.  लेकिन खेती करने के बाद जो एक आंतरिक शांति उन्हें मिलती थी और  इस व्यवसाय की स्थिरता को देखते हुए उन्होंने अपनी पुणे के मल्टीनेशनल कंपनी, जो उन्हें हर साल 16 लाख रुपए देती थी उसे छोड़ने का फैसला कर लिया|

न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक 36 वर्षीय संदीप जो पुणे के सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट से एमबीए ग्रेजुएट हैं, 7 साल काम करने के बाद वह संबलपुर  (sambalpur) जिले के बामरा ब्लॉक में अपने गांव गुरला लौट आए।  उन्हें हमेशा से खेती करने का शौक था क्योंकि उनके परिवार के पास 25 एकड़ की  पुश्तैनी जमीन थी और वह खाली थी|

शुरुआत के एक साल वो खेती को समझने के लिए ज़मीनी स्तर पर काम किया और एक साल बाद, उन्होंने एक एकड़ जमीन पर मिर्च और अदरक की खेती शुरू कर दी। शुरुआत अच्छी थी, उन्हें कुछ लाभ हुआ, जिसकी वजह खेती (farming) के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए  उनके इरादे और मजबूत हो गए|

उन्होंने कृषि तकनीकों और सिंचाई पर ज्ञान हासिल करने के लिए अपने गांव में किसानों के साथ ऑनलाइन शोध करना शुरू किया। इसके बाद, उन्होंने सब्जी की खेती के लिए ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग को अपनाया जिससे उन्हें अपने खेत से उत्पादन बढ़ाने में काफी मदद मिली। वह एक गहरे बोरवेल से पानी , निकाल कर खेतों की सिंचाई भी करते हैं और कुछ बोरवेल उनकी खुद की जमीन पर भी बने हुए हैं फसलों को बेहतर बनाने के लिए| 

वर्तमान में, वह 11 एकड़ से अधिक जमीन पर लोबिया, सेम, फूलगोभी, मिर्च, भिंडी, ककड़ी और मकई की खेती करते हैं और तीन एकड़ से अधिक जमीन पर स्थानीय तरबूज  की खेती करते हैं। संदीप फूलों की खेती और मछली पालन भी करते हैं|

 

investment banker sambalpur farming

 

दो एकड़ से अधिक जमीन पर  वह गेंदा के फूलों की खेती  करते हैं – जो स्थानीय बाजारों में, त्योहारों के मौसम के दौरान बहुत अधिक  खरीदे जाते हैं,  सालाना 300 क्विंटल फूलों का उत्पादन किया जाता है तथा 2018 में उन्होंने रोहू और कैटला मछलियों के व्यावसायिक उत्पादन के लिए लगभग 2 एकड़ भूमि में एक तालाब का निर्माण किया |

 किसान बताते हैं  2019 में मछली उत्पादन केवल छह क्विंटल था, लेकिन इस साल यह बढ़कर 35 क्विंटल हो गया है,  किसानों ने तीन चरणों में 2.5 एकड़ में 700 आम के पौधे भी लगाए हैं और व्यावसायिक उत्पादन की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

फल और सब्जियां उगाने से संदीप सालाना 15 लाख रुपये कमाते हैं, जिसमें से 7 लाख रुपये कृषि से जुड़ी जरूरतों और जमीन की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए  उपयोग में लाए जाते है   उनके फसल की मांग स्थानीय बाजारों में बहुत अधिक है। “अब तक, मुझे फसल बेचने में कभी कोई समस्या नहीं हुई क्योंकि व्यापारी मेरे दरवाजे से सब्जियां, फल और फूल खरीद कर ले जाते हैं” संदीप बताते हैं।

जब उनसे पूछा गया कि आपको कृषि के क्षेत्र में आने के लिए किस बात ने प्रेरित किया ,जब कि आपकी विशेषज्ञता तो किसी और क्षेत्र में है?  स्थायी जीवन, उन्होंने जवाब दिया, यह कहते हुए कि शहर में उनका जीवन मशीनों जैसा हो गया था। “मैं अपने परिवार के सदस्यों को फल और सब्जियां उगाते हुए देख कर, बड़ा हुआ हूँ। इसलिए मेरी खेती में रुचि स्वाभाविक थी। मुझे लगता है कि बेहतर विकास के लिए खेती ही एकमात्र रास्ता है और इसका कोई विकल्प नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि, खेती करने से  मेरे मन को जो संतुष्टि मिलती है वह मुझे मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करते हुए कभी नहीं मिली”

संदीप  खुश है कि वह वर्तमान में 22 व्यक्ति जिनमें 16 महिलाएं शामिल है, उन्हें आजीविका सहायता प्रदान कर रहे है, जो  उनके खेत में श्रमिकों के रूप में  काम करते है।

 

वह क्या खेती कर रहे है?

संदीप 11 एकड़ से अधिक भूमि पर लोबिया, सेम, फूलगोभी, मिर्च, भिंडी, ककड़ी और मकई की खेती करते हैं और तरबूज की स्थानीय किस्म तीन एकड़ से अधिक भूमि पर वह दो एकड़ जमीन पर गेंदे के फूल भी उगाते है और सालाना 300 क्विंटल फूलों का उत्पादन करते है।

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