सचेत

कोरोना महामारी के समय देश में प्रायप्त नहीं है डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मचारियों की संख्या

तर्कसंगत

Image Credits: New Indian Express

October 27, 2020

SHARES

ऐसे समय में जब देश में कोविड -19 (Covid-19) महामारी अभी भी व्याप्त है, हमारे देश में अधिकांश राज्य चिकित्सक (Doctor), नर्स और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों (Health Worker) सहित चिकित्सा पेशेवरों की रिक्तियों (Vacancy) को भरने में विफल रहे हैं।

 

यूपी बिहार में बुरा हाल

न्यू इंडियन एक्सप्रेस  द्वारा प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक आबादी वाला राज्य उत्तर प्रदेश, जिसके पास कोरोना के देश में पांचवें सबसे अधिक मामले हैं, में 33% डॉक्टरों की कमी है, जबकि नर्सों के लिए 45% पद खाली पड़े हैं।

बिहार और झारखंड में डॉक्टरों की कमी भी कम बदतर नहीं है, इन दोनों राज्यों में क्रमशः डॉक्टरों के 59% और 55% से अधिक पद खाली पड़े हैं। पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, पंजाब, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में मेडिकल स्टाफ इसी तरह के महत्वपूर्ण पदों के खाली होने के कारण दबाव में हैं। भारत का कोविड-19 टैली सोमवार को 79.09 लाख तक पहुंच गया, जिसमें पिछले 24 घंटों में 45,148 ताज़ा मामले जोड़े गए।

यूपी में सरकारी क्षेत्र में डॉक्टरों के लिए कुल स्वीकृत पद 18,772 हैं। लेकिन वर्तमान में, राज्य भर में खाली पड़े 6,000 पदों के साथ केवल 12,000 डॉक्टर ही काम कर रहे हैं।

यूपी डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सचिन वैश्य ने कहा कि डॉक्टरों की भर्ती जल्द शुरू होने वाली है।

इसी तरह, राज्य भर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के लिए लगभग 10,000 नर्सिंग पद स्वीकृत हैं, जिनमें से लगभग 4,500, लगभग 45%, नर्सिंग पद खाली पड़े हैं।

बिहार में डॉक्टर की कुल स्वीकृत 13500 पदों की है मगर 8,068 डॉक्टरों की कमी है। इसी तरह नर्सों की कुल 20,000 स्वीकृत पदों के मुकाबले में 13,800 पद खाली हैं।

इस साल मार्च में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा सार्वजनिक की गई जानकारी के अनुसार, एक साल पहले तक के आंकड़ों के आधार पर, कई राज्यों में सहायक नर्सिंग मिडवाइफरी और पैरामेडिक्स जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य कर्मचारियों की भारी कमी थी।

मध्य प्रदेश, ओडिशा और राजस्थान जैसे राज्यों में भी बुलेटिन के अनुसार डॉक्टरों के कई पद खाली पड़े थे।

आंकड़ों से पता चला कि देश के उप-केंद्रों में 31 मार्च, 2019 तक 58,473 एएनएम / स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की कमी थी।

राजस्थान में  13,848 श्रमिकों की सबसे अधिक कमी थी, इसके बाद उत्तर प्रदेश और कर्नाटक जिनमें क्रमशः 10,749 और 8038 स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी थी।

 

covid19 doctor healthworker vacancy

 

मंत्रालय की रिपोर्ट

मंत्रालय के अनुसार प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल केंद्रों में, 12,823 स्वास्थ्य कर्मचारियों, 1,933 डॉक्टरों, 8,979 फार्मासिस्टों, 15,875 लैब तकनीशियनों और 7,569 नर्सिंग स्टाफ की कमी थी। सामुदायिक स्वास्थ्य देखभाल केंद्रों में 17,876 विशेषज्ञ, 1,099 जीडीएमओ, 3,266 रेडियोग्राफर, 327 फार्मासिस्ट, 627 लैब तकनीशियन, 3,372 नर्सिंग स्टाफ की कमी थी। मंत्रालय के अधिकारियों ने इस अखबार को बताया कि राज्यों में समय-समय पर रिक्त पदों को तत्काल भरने के लिए कहा जाता है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “ग्रामीण अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी एक लंबे समय से चली आ रही समस्या है और अगर किसी स्वास्थ्य सेवा के कर्मचारी महामारी के दौरान पूरी तरह से काम में नहीं होते हैं तो हालात और भी बदतर हो जाते हैं।”

उन्होंने जो कहा वह जमीन पर प्रतिबिंबित होता है। सूत्रों ने कहा कि बिहार में 9,130 ​​स्वीकृत पदों के मुकाबले 4,133 एएनएम पद खाली हैं और 4,000 स्वीकृत पदों के मुकाबले करीब 2,000 चिकित्सा सदस्यों की भी कमी है।

उत्तराखंड में डॉक्टरों की कमी  39% है। कुल 2,735 स्वीकृत पदों में से 1,072 अभी भी खली पड़े हैं केवल 1,663 डॉक्टरों काम पर हैं।

 

covid19 doctor healthworker vacancy

 

स्वास्थ्य विभाग की महानिदेशक अमिता उप्रेती ने कहा: “डॉक्टरों और अन्य चिकित्सा कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया इस अंतर को भरने के लिए फास्ट ट्रैक पर है। पिछले छह महीनों में, 400 से अधिक डॉक्टरों की भर्ती की गई। ” राजस्थान, जिसने महामारी से निपटने में काफी अच्छा काम किया है, वह भी चिकित्सा पदों की रिक्तियों को भरने के लिए भी संघर्ष कर रहा है। डॉक्टरों के कुल 14,087 पदों में से लगभग 19% पद खाली पड़े हैं। 2,692 नर्सों की कमी है।

पंजाब की स्थिति थोड़ी बेहतर है, लेकिन अन्य राज्यों से बहुत अलग नहीं है। सूत्रों के अनुसार, मार्च में कोविड-19 महामारी प्रभावित भारत से ठीक पहले, स्वास्थ्यसेवा के लगभग 6,000 पद खाली पड़े थे।

महाराष्ट्र, जो सभी राज्यों में कोविड -19 मामलों में सबसे आगे है, स्वास्थ्य विभाग में लगभग 31,000 रिक्तियां हैं। इनमें अतिरिक्त निदेशक, संयुक्त निदेशक, सहायक जिला स्वास्थ्य अधिकारी, सर्जन और नर्स के स्तर पर पद शामिल हैं।

पश्चिम बंगाल, वायरस से बुरी तरह प्रभावित एक और राज्य है जहाँ 7,500 डॉक्टरों की कमी है। डॉक्टरों के लिए छत्तीसगढ़ में 880 रिक्तियां हैं। इसमें विशेषज्ञों के लिए निर्धारित 1,593 पदों में से 1,461 पद खाली है।

 

असमान वितरण

विशेषज्ञों ने कहा कि डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की कमी नहीं है बल्कि उनका असमान वितरण भी एक समस्या है।

भारतीय मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ। रवि वानखेडकर ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि भारत में डॉक्टरों की कमी है, लेकिन बड़ी समस्या शहरी पूर्वाग्रह है, जिसे चिकित्सा शिक्षा के निजीकरण से प्रभावित किया गया है।”

उन्होंने यह भी कहा कि “स्वास्थ्य सेवा को पिरामिड के आकार का हो जहाँ और नीचे अधिक से अधिक पैरामेडिक्स होना चाहिए और शीर्ष पर डॉक्टर। हालांकि, भारत में, डंबल आकर का है जहाँ ग्रेड 4 और डॉक्टरों  ज़्यादा हैं मगर और नर्सों और तकनीशियनों की कमी है।”

 

तर्कसंगत का तर्क

कोरोना महामारी के समय हमारे देश के सामने डॉक्टर्स और स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी एक दूसरी चुनौती है. इस आपातकाल में भी जिस तरह से हमारे चिकित्साकर्मियों ने आगे बढ़ कर दिन रात काम किया है उसकी जितनी भी प्रशंसा करें कम है. मगर भविष्य में इस तरह की चुनौती का सामना करने के लिए हमें अपने स्वास्थ्य नीतियों का आंकलन करना होगा। अपने देश में डॉक्टर , नर्स और साथ ही साथ अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों की संख्या बढ़ानी होगी। निदान केवल संख्या बढ़ने से नहीं होगी उन्हें रोज़गार क उचित अवसर और वेतन भी मिलन चाहिए। आज देश में मेडिकल की पढाई जितनी महंगी हो गयी है कि कोई भी मीडिल क्लास फॅमिली अपने बच्चों को डॉक्टर बनाने की सोच नहीं सकता। कॉलेज की कमी के कारण कम्पटीशन ज़्यादा है, नतीजा ये कि कई बार अच्छे छात्र भी कम सीट की वजह से दाखिला नहीं ले पाते नतीजा ये कि देश में डॉक्टर की कमी एक समस्या बनित जा  रही है.

पहले की सरकार की गलती के कारण आज देश में डॉक्टर की कमी है हमारी शिक्षा और स्वाथ्य निति में परिवर्तन आने के बाद ही इस समस्या का पूर्ण रूप से निवारण हो सकता है. अन्यथा आगे भी हमारे देश में काबिल डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी ऐसे ही बनी रहेगी।

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...