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दिल्ली अदालत ने CAA विरोधी प्रदर्शनों पर दो टूक जवाब दे दिया है

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Image Credits: Zee News

October 28, 2020

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दिल्ली (Delhi) की एक अदालत (Court) ने मंगलवार को दंगों की साजिश के आरोपों में गिरफ्तार 27 वर्षीय छात्र आसिफ इकबाल तन्हा को जमानत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि नागरिकता संसोधन कानून (CAA) के खिलाफ मुखर आंदोलन और उसके साथ अन्य हिंसक गतिविधियां दिखाती हैं कि इनका मकसद भारत के खिलाफ असंतोष को भड़काना था। तन्हा को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों की साजिश के आरोप में गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया गया है।

यह दूसरी बार है कि जामिया मिलिया इस्लामिया के आसिफ इकबाल तनहा, जिन पर पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोप लगाया गया है , को जमानत देने से इनकार कर दिया गया है।

पुलिस के आरोप

पुलिस ने तन्हा पर जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद और जेएनयू के छात्र शारजील इमाम के साथ मुस्लिम बहुल इलाकों में चक्का जाम (सड़क नाकेबंदी) कर सरकार को “उखाड़ फेंकने” की साजिश रचने का आरोप लगाया है । पुलिस ने आरोप लगाया है कि दंगों में इस्तेमाल करने के लिए तन्हा ने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके मोबाइल फोन की सिम खरीदी। पुलिस ने कहा कि यह सिम बाद में जामिया के एक अन्य छात्र और सह-आरोपी सफोरा जरगर को मुहैया कराया गया था।

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भारत को कमज़ोर करने का काम

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, जब तन्हा के वकील सिद्धार्थ ने कहा कि जामिया कॉर्डिनेशन कमेटी और स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन आदि संगठन UAPA के तहत आतंकी संगठन घोषित नहीं किये गए हैं। इस पर अतिरिक्त सेशन जज (ASJ) अमिताभ रावत ने कहा कि भारत की एकता और अखंडता के लिए खतरा पैदा करने वाले काम, सामाजिक वैमनस्य फैलाना और लोगों में आतंक फैलाना भी आतंकी कृत्य है। उन्होंने कहा कि कानून के तहत ऐसी आतंकी गतिविधियों को समझना होगा।

जब तन्हा के वकील सिद्धार्थ अग्रवाल ने तर्क दिया कि जामिया समन्वय समिति (जो नागरिकता कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का समन्वय करती है) या छात्रों का इस्लामी संगठन यूएपीए के तहत आतंकवादी संगठन नहीं थे, तो अतिरिक्त न्यायाधीश न्यायाधीश अमिताभ रावत ने कहा: “अधिनियम जो एकता के लिए खतरा है और भारत की अखंडता, … सामाजिक शर्मिंदगी का कारण बनती है और लोगों के किसी भी हिस्से में आतंक पैदा करती है, जिससे उन्हें लगता है कि हिंसा में घिरा हुआ है, यह भी एक आतंकवादी कार्य है। ”

एएसजे रावत इस बात से सहमत थे कि इन समूहों पर यूएपीए के तहत मुकदमा नहीं चलाया गया था, लेकिन उन्होंने कहा, “हमें आतंकवादी गतिविधि को समझना होगा” अधिनियम की धारा 15 (“आतंकवादी अधिनियम”) के अनुसार।

 

विरोध करने के साथ कुछ प्रतिबंध भी है

ASJ रावत ने अपने आदेश में कहा कि देश के सभी नागरिक किसी भी कानून को लेकर अपनी राय रख सकते हैं और उनको किसी भी कानून का विरोध करने का हक है, लेकिन इस पर कुछ पाबंदियां भी हैं। उन्होंने आगे कहा कि इस मामले में यह देखा जाना चाहिए कि क्या इसमें कोई साजिश थी, जिस वजह से नागरिकता कानून(CAA) के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों की आड़ में दंगे हुए या ऐसा नहीं था। अदालत ने यह भी कहा कि प्रकटीकरण के बयानों का कोई मतलब नहीं था, लेकिन संरक्षित गवाहों द्वारा दिए गए बयानों में तन्हा के खिलाफ “पर्याप्त भड़काऊ सामग्री” है। एएसजे रावत ने जोर देकर कहा कि “असमान शब्दों में देश के सभी नागरिकों के लिए विरोध करने की स्वतंत्रता उपलब्ध है लेकिन यह उचित प्रतिबंधों के अधीन है।”

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