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इनकम टैक्स रेड के बाद प्याज के थोक विक्रेताओं ने नीलामी रोक दी है

तर्कसंगत

October 28, 2020

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नासिक में प्याज (Onion) व्यापारियों (Traders) पर आयकर के छापे(Raid) के बाद, एशिया के सबसे बड़े प्याज बाजार के व्यापारियों ने प्याज के स्टॉक की नीलामी रोक दी है.

कारोबारियों के मुताबिक, केंद्रीय एजेंसियां ​​उन पर प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी का आरोप लगा रही है. “केंद्र सरकार को यह समझना चाहिए कि प्याज की कीमतें व्यापारियों की वजह से नहीं बल्कि बाजार में इसकी कमी के कारण बढ़ रही हैं. बाजार मांग और आपूर्ति पर निर्भर करता है.

लासलगांव बाजार में, प्याज कहीं भी 10,000 रुपये से 11,000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बेचा जा रहा था. थोक बाजार में पिछले साल के 20,000 से 25,000 टन दैनिक स्टॉक के मुकाबले, यह घटकर 12,000 से 15,000 टन हो गया है.

 

onion traders raid

 

भारी बारिश और बाढ़ के कारण से भी थोक बाजार में पर्याप्त मात्रा में प्याज पहुंचने में देरी हुई है. थोक विक्रेताओं (Traders) का कहना है कि देरी से जो प्याज बाजार पहुंचे हैं उनमें भी अगर अधिकांश स्टॉक खराब निकलते हैं तो उन्हें उपयोग में लाया नहीं जा सकता. नतीजा ये कि प्याज की कीमतें बढ़ती चली जाती हैं, व्यापारियों ने जोर दिया. महाराष्ट्र के खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल ने कहा कि संघीय एजेंसियों को प्याज व्यापारियों को लक्षित नहीं करना चाहिए.

“यह बाजार को और नुकसान पहुंचाता है. वे व्यापारियों (Traders) को प्रताड़ित नहीं कर सकते हैं और बढ़ती प्याज (Onion) की कीमतों के लिए उन्हें लक्षित कर सकते हैं. भुजबल ने कहा कि सरकार को कदम उठाना चाहिए और उपभोक्ताओं और किसानों की मदद करने के बजाय कीमतों को जांचना चाहिए.

 

प्याज के दाम कम हो रहे हैं

ज़ी न्यूज़ ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि प्याज की कीमतों पर सरकार के कदमों का असर दिखने लगा है. प्याज की रीटेल कीमतों  में 10 रुपये की कमी आई है. प्याज (Onion) उत्पादक क्षेत्रों में भी कीमतों में गिरावट का ट्रेंड दिखा है. रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने प्याज की स्टॉक लिमिट को भी तय कर दिया है. इसके तहत थोक और खुदरा व्यापारियों के लिए अलग-अलग स्टॉक लिमिट तय की गई है. सरकार ने थोक विक्रेताओं के लिये प्याज की स्टॉक लिमिट को 25 मीट्रिक टन और खुदरा व्यापारियों के लिये 2 मीट्रिक टन निर्धारित किया है. ये स्टॉक लिमिट शुक्रवार 23 अक्टूबर से लेकर के 31 दिसंबर 2020 तक प्रभावी रहेगी.

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