पहले सरकार ने कहा की आरोग्यसेतु किसने बनाया नहीं पता, मगर अब जवाब दे दिया है aarogya setu rti

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पहले सरकार ने कहा की आरोग्यसेतु किसने बनाया नहीं पता, मगर अब जवाब दे दिया है

तर्कसंगत

October 29, 2020

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कोविड-19 के प्रसार की रोकथाम के लिये बनाए गए Aarogya Setu App को लेकर फिर विवाद हो गया है. RTI में जवाब नहीं मिलने के ताजा विवाद पर केंद्र सरकार ने सफाई दी है. बयान में कहा गया है, ‘आरोग्य सेतु ऐप को रिकॉर्ड समय में तैयार किया गया था, ताकि कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग का काम लिया जा सके.”

सरकार द्वारा कोरोना महामारी के दौरान संक्रमितों और संदिग्धों का पता लगाने के लिए आरोग्य सेतु ऐप के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है। सरकार लगातार ऐप को बहुत कारगर बता रही है। उसी ऐप को लेकर चौंकाने वाली खबर सामने आई है।

दरअसल, सरकारी वेबसाइटों को डिजाइन करने वाले नेशल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) को ऐप बनाने वालों की कोई जानकारी नहीं है।

सामाजिक कार्यकर्त्ता सौरव दास ने दायर की थी अपील

सामाजिक कार्यकर्ता सौरव दास ने करीब दो महीने पहले RTI के तहत NIC से आरोग्य सेतु ऐप शुरुआती प्रस्ताव, इसको मिली मंजूरी की जानकारी, इस काम में शामिल कंपनियों, व्यक्ति और सरकारी विभागों और ऐप डेवलपमेंट से जुड़े लोगों के बीच हुए सूचना के आदान-प्रदान की प्रतियां मांगी थी।इस पर NIC और इलेक्ट्रॉनिक मंत्रालय दोनों ने ऐप बनाने वालों की जानकारी होने से इनकार कर दिया और जानकारी नहीं दी।

NIC और IT मंत्रालय की ओर से मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराए जाने के बाद दास ने सूचना आयोग में शिकायत भेज दी।

उन्होंने शिकायत में कहा कि उन्होंने आरोग्य सेतु ऐप को बनाने वाले के बारे में जानकारी के लिए NIC, नेशनल ई-गवर्नेंस डिविजन (NeGD), मुख्य सार्वजनिक सूचना अधिकारियों (CPIO) और मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी से संपर्क किया था, लेकिन वह सूचना देने में असफल रहे हैं। इससे उन्हें काफी मानसिक वेदना हुई है।

पहले सरकार ने कहा की आरोग्यसेतु किसने बनाया नहीं पता, मगर अब जवाब दे दिया है aarogya setu rti

अब सरकार ने इस पर सफाई दी है

मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘यह स्पष्ट तौर पर उल्लेख किया गया है कि आरोग्य सेतु ऐप का विकास एनआईसी ने उद्योग और शैक्षणिक क्षेत्र के स्वयंसेवी लोगों के सहयोग से किया है। इस ऐप का विकास बेहद पारदर्शी तरीके से किया गया है।’ खबरों के अनुसार सीआईसी ने एनआईसी से यह स्पष्ट करने को कहा है कि उसके पास इस बात की जानकारी क्यों नहीं है कि ऐप का विकास किसने किया है, जबकि वेबसाइट पर बताया गया है कि इस मंच का डिजाइन, विकास एनआईसी के माध्यम से हुआ है।

 

आयोग के समक्ष सुनवाई के दौरान, दास ने कहा कि एनआईसी का जवाब चौंकाने वाला था क्योंकि एनआईसी ने ही ऐप को विकसित किया था. उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने भी मोबाइल ऐप बनाए जाने और अन्य मामलों को लेकर कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई।

कोविड-19 के कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग का पता लगाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से आरोग्य सेतु ऐप को बढ़ावा दिया गया है। आरोग्य सेतु ऐप की अहमियत का अंदाजा इसी से बात से लगाया जा सकता है कि हवाई यात्राओं से लेकर मेट्रो और ट्रेनों में सफर से पहले इसे डाउनलोड करना अनिवार्य है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बार-बार लोगों से ऐप को डाउनलोड करने की अपील कर चुके हैं।

तर्कसंगत की टीम ने सौरव दास से बात कर ये जानने की भी कोशिश की कि RTI का उपयोग आम आदमी कैसे कर सकता है? किन किन मामलों में सरकार के पास जवाब न देने का अधिकार है?

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