प्याज की कीमतें अचानक इतनी क्यों बढ़ रही है? onion price hike

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प्याज की कीमतें अचानक इतनी क्यों बढ़ रही है? 

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October 29, 2020

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हाल के हफ्तों में प्याज (Onion) की कीमतों (Price) में वृद्धि (Hike) ने न केवल एक औसत घर के लिए और अधिक चिंताएं पैदा कर दी हैं, बल्कि रेस्तरां के लिए दोहरी परेशानी भी पैदा कर दी है, जो चल रहे कोविद -19 महामारी के कारण संकट का सामना कर रहे हैं.

प्याज की आसमान छूती कीमतों से रेस्टोरेंट मालिक चिंतित हैं। उनका कहना है कि अगर प्याज की कीमतें दो-तीन महीने तक बढ़ती रहती हैं, तो रेस्त्रां अपने रेट लिस्ट को संशोधित करने के लिए मजबूर होंगे.

दूसरी ओर, प्याज व्यापारियों का कहना है कि यह संभावना नहीं है कि अगले तीन महीनों में ताजा प्याज का स्टॉक आ जाएगा.वे कहते हैं कि प्याज का आयात भी घरेलू मांग को पूरा नहीं करेगा.

 

दिल्ली में सेब से महंगा बिक रहा प्याज

प्याज खरीदने में लोगों के आंसू निकल रहे हैं. दिल्ली में तो यह सेब से ज्यादा महंगा हो गया है. यहां थोक बाजार में प्याज 50 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया है. इसके मुकाबले औसत क्वालिटी के सेब की कीमत 30 से 40 रुपये प्रति किलो है. आजादपुर की एपीएमसी मंडी के सूत्रों के मुताबिक, सीजनल सेब की कीमत 30 से 40 रुपये प्रति किलो है. हालांकि, अच्छी क्वालिटी के सेब की कीमत 100 रुपये प्रति किलो है.

 

प्याज की कीमतें बढ़ने की यह है वजह

पिछले एक महीने से प्याज लगातार महंगा हो रहा है. इसकी वजह यह है कि महाराष्ट्र जैसे प्याज उत्पादक इलाकों में बाढ़ से इसकी सप्लाई पर असर पड़ा है. पिछले हफ्ते हुई बारिश से सप्लाई और घट गई है. इसके चलते प्याज के भाव दिल्ली और कई दूसरी जगहों पर 70 से 80 रुपये प्रति तक पहुंच गए हैं. 

>> मानसून के देरी से आने से फसल पर काफी असर पड़ता है. मानसून की देरी और फिर तेज बारिश ने प्याज की फसलों का नुकसान किया. जिसकी वजह से इसकी कीमतों में तेजी देखी गई.

>> ज्यादा बारिश ने प्याज की फसलों को नुकसान पहुंचाया. प्याज उपजाने वाले राज्य कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार में मानसून में तेजी रही. ज्यादा बारिश की वजह से प्याज का उत्पादन प्रभावित हुआ. कम उत्पादन की वजह से प्याज की कीमतों में तेजी आई.

>> बाढ़ और सुखा के अलावा प्याज की गैरकानूनी तरीके से होर्डिंग की वजह से भी प्याज की कीमतें बढ़ती हैं. हर साल त्योहारी सीजन से पहले जमाखोर प्याज की जमाखोरी करने लगते हैं. जिसकी वजह से प्याज की कीमतें बढ़ जाती हैं. क्योंकि प्याज और आलू दोनों ही ऐसी फसल है जिसे आसानी से स्टोर कर के रखा जा सकता है.

>> मंडी में आने वाली सब्जियों की आवक यानी सप्लाई में कमी के कारण भी दाम तीन गुना से ज्यादा हो जाते हैं. क्योंकि ऐसे समय में सप्लाई तो कम होती है पर डिमांड में कमी नहीं होती.

>> प्याज के उचित स्टोरेज से उसकी कीमतों पर अंकुश रखा जा सकता है. लेकिन भारत में प्याज के भंडारण में दिक्कते हैं. एक आंकड़े के मुताबिक भारत में सिर्फ 2 फीसदी प्याज के भंडारण की ही क्षमता है. 98 फीसदी प्याज खुले में रखा जाता है. बारिश के मौसम में नमी की वजह से प्याज सड़ने लगता है. प्याज की बर्बादी की वजह से भी इसकी कीमतें बढ़ती हैं.

कब-कब प्याज की कीमतों ने रुलाया

1980 में पहली बार प्याज की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखी गई. प्याज आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गया था. 1998 में एक बार फिर प्याज की कीमतें आसमान छूने लगी. दिल्ली में इसकी कीमतें राजनीतिक मुद्दा बन गई.

2010 में प्याज की कीमतें फिर बढ़ी. 3 साल बाद 2013 में प्याज कई जगहों पर 150 रुपए किलो तक बिका. 2015 में प्याज की कीमतों ने एक बार फिर लोगों को रुलाया. इसके अलावा तकरीबन हर साल सितंबर अक्टूबर में प्याज की कीमतें बढ़ जाती हैं.

कैसे चलता है प्याज की बुआई और बाजार में आने का साइकल

भारत में प्याज की खेती के तीन सीजन है. पहला खरीफ, दूसरा खरीफ के बाद और तीसरा रबी सीजन. खरीफ सीजन में प्याज की बुआई जुलाई-अगस्त महीने में की जाती है. खरीफ सीजन में बोई गई प्याज की फसल अक्टूबर दिसंबर में मार्केट में आती है.

प्याज का दूसरे सीजन में बुआई अक्टूबर नवंबर में की जाती है. इनकी कटाई जनवरी मार्च में होती है. प्याज की तीसरी फसल रबी फसल है. इसमें दिसंबर जनवरी में बुआई होती है और फसल की कटाई मार्च से लेकर मई तक होती है. एक आंकड़े के मुताबिक प्याज के कुल उत्पादन का 65 फीसदी रबी सीजन में होती है.

प्याज की बुआई और उसके मार्केट में आने के इस चक्र में मई के बाद प्याज की अगली फसल अक्टूबर में आती है. इस बीच अगस्त सितंबर महीने में प्याज की आवक काफी कम हो जाती है. इन महीनों में प्याज के आवक में कमी की वजह से कीमतें बढ़ जाती हैं. नई फसल आने में नवंबर महीने तक का टाइम लग जाता है. इस दौरान प्याज की कीमतें आसमान छून लगती हैं.

 

क्या प्याज की बढ़ती कीमतों पर सरकार की नजर है?

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सरकार को प्याज की कीमतों में तेजी की जानकारी है. सरकार इसे काबू में करने के लिए कदम उठा रही है. उन्होंने कहा, “कई बार ग्राहकों को फल-सब्जियों की ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है, जबकि कभी-कभी किसानों के अपनी फसल की कम कीमत मिलती है. हमारा काम दोनों के बीच संतुलन बैठाना है. हम स्थिति को काबू में करने के लिए कई कदम उठा रहे हैं.”

 

​अब तक सरकार ने ये कदम उठाए हैं

सरकार ने दिल्ली और देश के दूसरे हिस्सों में प्याज की कीमतों को काबू में करने के लिए कई कदम उठाए हैं. वह नैफेड और एनसीसीएफ जैसी एजेंसियों के बफर स्टॉक से प्याज लेकर कम भाव पर बेच रही है. दिल्ली में मदर डेयरी के जरिए 23.90 रुपये की दर से प्याज बेचा जा रहा है. राज्यों को केंद्रीय बफर स्टॉक से प्याज लेकर अपने यहां इसकी आपूर्ति बढ़ाने को कहा गया है. केंद्र सरकार के पास 56,000 टन प्याज का बफर स्टॉक है. अब तक इसमें से 16,000 टन प्याज निकाला जा चुका है.

​कब तक काबू में आएंगी प्याज की कीमतें?

अगले कुछ दिनों में प्याज की कीमतें काबू में आ जाएंगी. तोमर ने कहा कि नैफेड के माध्यम से सप्लाई बढ़ाने का असर जल्द दिखेगा. व्यापारियों का कहना है कि अभी देश के ज्यादातर हिस्सों में स्टॉक में रखा प्याज बेचा जा रहा है. नवंबर से खरीफ की फसल बाजार में पहुंचने लगेगी. व्यापारियों का यह भी कहना है कि पिछली फसल का काफी प्याज स्टॉक में रखा है. लेकिन, भारी बारिश के कारण इसकी ढुलाई नहीं हो पा रही है.

सरकारी आंकड़े बताते हैं कि भारत में सालाना प्याज का उत्पादन 2.5 करोड़ मीट्रिक टन है. भारत की आवश्यकता 1.5 करोड़ मीट्रिक टन है. इस साल बारिश के कारण प्याज की फसलों में लगभग 50 फीसदी का नुकसान हुआ है. प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी का मूल कारण यही है.

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