प्रदूषण फैलाने पर अब से होगी 5 साल की जेल और 1 करोड़ रुपये का जुर्माना delhi ncr pollution

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प्रदूषण फैलाने पर अब से होगी 5 साल की जेल और 1 करोड़ रुपये का जुर्माना

तर्कसंगत

October 30, 2020

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दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में बढ़ते प्रदूषण(Pollution) को देखते हुए केंद्र सरकार ने बुधवार को एक नया ऑर्डिनेंस (Ordinance) जारी किया है. इस ऑर्डिनेंस के तहत प्रदूषण फैलाने पर पांच साल की जेल और एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है. इस ऑर्डिनेंस को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद केंद्र सरकार ने बुधवार को जारी कर दिया है. इसमें दिल्ली- हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, उत्तर प्रदेश में वायु गुणवत्ता को सुधारने के लिए एक कमीशन नियुक्त करने की बात कही गई है.

द हिन्दू के मुताबिक सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में इसकी जानकारी भी दे दी है. बता दें कि सरकार ने गत सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में प्रदूषण के खिलाफ नया कानून बनाने का जानकारी दी थी. जिसके तहत यह कदम उठाया गया है.

EPCA को हटाकर लागु होगा

सरकार के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन अध्यादेश, 2020 के लिए नए आयोग का गठन किया गया है. इसके 22 साल पुराने पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (EPCA) की जगह लागू किया जाएगा.

इसे सुप्रीम कोर्ट ने भी अनुमति दे दी है। हालांकि EPCA ने दिल्ली में वाहनों को CNG पर आने के लिए कहा था, लेकिन वह खतरनाक धुएं के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं कर सका था.

इस कमीशन में 18 सदस्य होंगे और एक फुल टाइम चेयरमैन नियुक्त किया जाएगा जो कि राज्य का चीफ सेक्रेटरी या भारत सरकार का सेक्रेटरी होगा. इस कमेटी में 18 में से 10 सदस्य ब्यूरोक्रेट्स होने चाहिए बाकी 8 सदस्य एक्सपर्ट्स और एक्टिविस्ट्स होंगे. इस कमेटी में एक सलेक्शन कमेटी होगी जिसके हेड पर्यावरण मंत्री होंगे. कमेटी में कैबिनेट मंत्री के साथ तीन अन्य मंत्री होंगे. यह सेलेक्शन कमीशन तीन साल के लिए कमीशन के सदस्यों को नियुक्त करेगी.

 वायु प्रदूषण की निगरानी, ​​कानूनों को लागू करने और अनुसंधान और नवाचार शामिल है. इसके अलावा आयोग प्रदूषण बढ़ाने वाले कारणों जैस- पराली जलाना, वाहनों के धुंए और मृदा प्रदूषण पर भी ध्यान देगा. इसी तरह आयोग निगरानी के लिए उप-समितियों का गठन करेगा। यह आयोग एक केंद्रीय निकाय के रूप में कार्य करेगा.

अध्यादेश में कहा गया है कि राज्य और आयोग द्वारा जारी किए गए आदेशों के बीच टकराव की स्थिति में बाद में निर्धारित नियम को ही लागू किया जाएगा. आयोग द्वारा प्रदूषण को रोकने के लिए बनाए गए नियमों का उल्लंघन करने पर दोषियों पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना, पांच साल की जेल या दोनों से दंडित करने का प्रावधान होगा.

अध्यादेश में यह भी कहा गया है कि आयोग द्वारा जारी किए गए आदेशों के खिलाफ अपील केवल नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में ही स्वीकार्य होगी. यह आयोग केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और ISRO के साथ-साथ राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करेगा और संसद में सालाना रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा.

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