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जुलाई में ही वार्षिक बजट अनुमान को पार कर गया राजकोषीय घाटा, जानें क्या रही वजह

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Image Credits: cardinfo

October 31, 2020

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केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों (अप्रैल-जुलाई) के दौरान ही पूरे साल के बजट अनुमान के आंकड़े को पार कर गया। कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन की वजह से राजस्व संग्रह में कमी के चलते राजकोषीय घाटा पूरे वर्ष के लक्ष्य के ऊपर चला गया है।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स (CGA) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-जुलाई के दौरान राजकोषीय घाटा वार्षिक लक्ष्य के 103.1 फीसद या 8,21,349 करोड़ रुपये पर रहा। पिछले साल की समान अवधि में यह वार्षिक लक्ष्य के 77.8 फीसद पर था। सरकार की आमदनी और खर्च के बीच के अंतर को राजकोषीय घाटा कहते हैं। पिछले साल अक्टूबर में राजकोषीय घाटा सालाना लक्ष्य के पार निकल गया था। 

वित्त वर्ष 2019- 20 में राजकोषीय घाटा देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के मुकाबले सात साल के उच्च स्तर 4.6 फीसद पर पहुंच गया था। पिछले वित्त वर्ष के दौरान राजस्व प्राप्ति कमजोर रही। इस साल मार्च आते-आते सरकारी आमदनी और कमजोर पड़ गई। 

CGA के आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष के शुरुआती चार माह (अप्रैल-जुलाई) के दौरान सरकार की राजस्व प्राप्ति 2,27,402 करोड़ रुपये रही। यह राशि वर्ष के बजट के वार्षिक लक्ष्य का 11.3 फीसद के आसपास है। पिछले साल इसी अवधि में कुल राजस्व प्राप्ति बजट अनुमान के 19.5 फीसद पर रही थी। 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस साल फरवरी में 2020- 21 का बजट पेश किया था। इस बजट में राजकोषीय घाटा 7.96 करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया था। यह आंकड़ा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के मुकाबले 3.5 प्रतिशत अनुमानित है। बहरहाल, कोरोना वायरस महामारी से उत्पन्न आर्थिक व्यावधान के बीच इन आंकड़ों में बड़ा संशोधन हो सकता है।

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