46 प्रतिशत भारतीयों ने covid-19 में घर चलाने के लिए लिया कर्ज: रिपोर्ट covid 19 economy

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46 प्रतिशत भारतीयों ने covid-19 में घर चलाने के लिए लिया कर्ज: रिपोर्ट

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Image Credits: dnaindia

November 4, 2020

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covid-19 महामारी के कारण सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था (economy) लोगों के लिए नयी चुनौतियां ला रही है. उद्योग के ठप पड़ने के कारण निम्न आय वर्ग एवं माध्यम वित्तीय वर्ग के लोग इस महामारी से ख़ास तौर पे जूझ रहे हैं. उनकी नौकरियां चली जाने के कारण उन्हें पैसे एवं घर खर्च इत्यादि समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. PTI का दावा है कि इस वर्ष तक़रीबन 46 % भारतियों को कर्जों पर निर्भर रहना पड़ रहा है. भारत की आधी आबादी कर्ज लेकर अपने घरों का नियंत्रण करने का प्रयास कर रही है. 

coronavirus से उत्पन्न हुए नौकरियों के कमी एवं वेतन में आये संकोच का सीधा असर निम्न आय वर्ग के कर्मचारियों पर देखने को मिल रहा है. होम क्रेडिट इंडिया के एक रिपोर्ट के अनुसार निम्न आय वर्ग को महामारी की मार झेलनी पड़ रही  है एवं लोगों ने अपने कर्जों के प्रतिरूप का आंकलन करते हुए बैंकों तथा अन्य प्राइवेट एंटिटिस का सहारा लेने का फैसला किया.

Economic Times के रिपोर्ट के आधार पर कोटक महिंद्रा बैंक ने होम लोन को दूसरी बार घटाकर 6.75 प्रतिशत कर दिया है जो कि 1 नवंबर से लागू होगा. भारत में किये सर्वे के मुताबिक 46 % प्रतिवादियों ने लोन का अपने गृह खर्चों के लिए इस्तेमाल किया. होम क्रेडिट इंडिया द्वारा किये इस सर्वे को सात शहरों में स्थित 1,000 प्रतिवादियों में संचालित किया गया जिससे coronavirus में हुए लम्बे समय के lockdown प्रभाव का आकलन किया जा सके. 

रिपोर्ट का ये दावा है कि लोन उधार लेने की सबसे बड़ी वजह वेतन में हुए कमी एवं देरी के चलते वित्तीय कठिनाइयों का सामना, जिससे उधारों पे निर्भरता और बढ़ गयी. सर्वे में 27 % प्रतिवादियों ने ये माना की मासिक किस्तों का भुक्तान करना उनके लिए नयी समस्यायें उत्पन्न कर यही हैं, जो कि उधारों के दूसरी सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है. तक़रीबन 14 % प्रतिवादियों ने नौकरियां चली जाने के कारण लोन उधार लिया. स्टडी का ये भी दावा है कि अन्य साधारण परिस्थितियों की अपेक्षा covid -19 के दौरान लोगों ने अपने करीबी रिश्तेदारों या दोस्तों से पैसे उधार लेना उचित समझा, ताकि नौकरी वापसी के समय वह अपने सम्बन्धियों को बिना किसी परेशानी उनके पैसे चुका दें. 

जबकि 50 % प्रतिवादियों ने अपनी नौकरियां वापस होने के पश्चात उधार की राशि चुका देने का वादा किया, 13 % ने ये माना की वे अपने लोन पूरा होने के बाद ही राशि लौटाएंगे। दोस्तों एवं रिश्तेदारों से उधारी की प्रवृत्ति मुंबई तथा भोपाल में सबसे अधिक देखी गयी जो कि कुल संख्या का 27 % प्रति शहर है. जबकि राजधानी दिल्ली में ये संख्या 26 % है, पटना में भी तक़रीबन 25 % गृहीता अपने दोस्तों एवं रिश्तेदारों पर ही निर्भर होते हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक 23 % घरों में दोस्तों या रिश्तेदारों से उधारी का फैसला ज्यादातर परिवार के पुरुष ही करते हैं.

लोगों में ये आशा की किरण है कि कोरोना महामारी से निपटने के लिए उन्हें नए अवसर प्रदान किये जाएँ ताकि नौकरियों में आयी गिरावट उनके परिवार में आयी अड़चनों को दूर भगा सके.

 

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