मेरी कहानी: जब जब मैंने निडर होकर कठिनाइयों का सामना किया तब तब मैंने खुद न्याय के करीब देखा mumbai tara kaushal

मेरी कहानी

मेरी कहानी: जब जब मैंने निडर होकर कठिनाइयों का सामना किया तब तब मैंने खुद न्याय के करीब देखा

तर्कसंगत

Image Credits: Sahil Mane

November 11, 2020

SHARES

इंसानियत और समाज के लिये सबसे घिनौनी और शर्मनाक चीज है किसी महिला के साथ रेप। बावजूद ये घटनाएं कम होने की जगह लगातार बढ़ रही हैं। क्या कभी किसी ने ये जानने की कोशिश नहीं की कि ये घटनाएं क्यों होती हैं ? क्यों कोई पुरूष ऐसा करता है ? मुंबई (Mumbai) की रहने वाली तारा कौशल (Tara Kaushal) जो पेशे से मीडिया कंसलटेंट और लेखक (media consultant and writer) हैं, उन्होने इस बारे में गहराई से सोचने का फैसला लिया। उन्होने तय किया कि वो इस मुद्दे पर रिसर्च करेंगी और आज वो इस काम को काफी गंभीरता से कर रही हैं, ताकि पुरूषों की मानसिकता (men’s mentality) को वो समझ सकें जिसके बाद लोगों को जागरूक करने के लिये उन्होंने  (Why Men Rape- An Indian Undercover Investigation) नाम की पुस्तक भी लिखी साथ ही इस मुद्दे पर डॉक्यूमेंट्री बनाकर लोगों को जागरूक करना चाहती हैं।

तारा कौशल ने यौन हिंसा से जुड़ी कई घटनाओं का सामना किया है। लेकिन उन्होंने हर बार लड़ाई लड़ी और अपमान करने वाले के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी की। उनके द्वारा लिखी पुस्तक के जरिए उन्होंने  इस समस्या से लड़ने के लिए  न जाने कितने लोगों को  प्रेरित किया। आज वह एक लेखक और एक मीडिया सलाहकार के रूप में काम  कर रही है।

जब मैं पाँच साल की थी तब मेरे माली ने मेरा बलात्कार कीया था;  माता पिता के सहयोगियों,चाचाओं और कई अजनबियों ने मेरे साथ  दुर्व्यवहार किया था।

24 साल की उम्र में, मैंने अपने उस अनुभव के बारे में `तहलका` में लिखा,  जिसके बाद मैंने यह तय कर लिया था कि यौन हिंसा से निपटने का सबसे अच्छा तरीका है, उसके बारे में आगे बढ़ कर लोगों को बताना और उसका डटकर सामना करना।

 मेरी कक्षा 12 वीं  की परीक्षा कुछ ही दिनों में होने वाली थी और तैयारी के लिए हमें स्कूल से छुट्टी दी गई थी। एक दिन जब मैं अपने विषय से जुड़ी कुछ प्रश्नों के समाधान के लिए स्कूल गई थी तब घर आते वक्त, जब अपनी सहेली से मिलने के लिए मैं उसके घर के पास गई तो उसके पिता ने भी मेरे साथ दूर व्यवहार करने की कोशिश की थी।

 कुछ हफ्ते बाद, उसी सहेली के घर, परीक्षा के बाद के एक छोटे से कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। जब मैंने उस आयोजन में मेरी सहेली के पिता के चेहरे पर डर देखा  तुम मुझे इस बात का एहसास हुआ कि अपराधी वह थे ना कि मैं और गलती उनकी थी और तभी मैंने यह फैसला किया कि मुझे इस तरह की घटनाओं से डरना नहीं है बल्कि उनका सामना करना करना है और इस मुद्दे पर निडर होकर बोलना है मैंने लड़ते हुए खुद को और सशक्त पाया। 

मैंने अपने साथ चाकू रखना शुरु कर दिया अपने बचाव के लिए। कॉलेज के दिनों के वक्त एक आदमी जिसने मुझे एकांत में चलते देखा वह अपनी स्कूटी से उतर गया और मुझे देखने के लिए एक पेड़ के पीछे चला गया। उसने देखा कि मैंने अपना चाकू निकाला और उसके स्कूटर की सीट को फाड़ डाला और वह कुछ ना कर सका क्योंकि उसे पता था कि गलती उसकी थी।

 हर बार जब मैंने लड़ाई लड़ी है और हमलावर को चोट पहुंचाई है या अपमानित किया है, तो मुझे  महसूस हुआ  है कि मैंने  उसका सामना किया और मैं डर ही नहीं ,शायद  एक छोटे पैमाने पर ही सही पर यह मेरी न्याय की भावना है, जब भी मैं इन घटनाओं से डरकर पीछे हुई हूं मुझे पराजित महसूस हुआ है और यह सिर्फ मेरी कहानी नहीं है, मेरी चाची अपने कॉलेज के वर्षों के दौरान एक बालिका छात्रावास रहा करती थी। पुलिस से बार-बार शिकायत करने के बावजूद, लोग दीवार के सामने आकर हस्तमैथुन करते थे, लड़कियों को अपमानित करते थे। मूत्र के साथ बाल्टी भरने के बाद उनके ऊपर फेंका गया तो यह घटना बंद हो गई और उन्हें अपनी करनी पर अफसोस हुआ।

यह एक समाधान भी था जिसने महिलाओं को उन कुछ शक्तियों के खिलाफ सशक्त बनाया जो पुरुष अभी भी हमारे खिलाफ  उपयोग कर सकते हैं।

मैंने जिन लोगों से बात की है, वे भी इस भावना से जुड़े हैं। समस्या के समाधान के लिए मेरा सबसे बड़ा तरीका मेरी किताब, (व्हाई मेन रेप: एन इंडियन अंडरकवर इन्वेस्टिगेशन)  उसे पूरा करने में मुझे 7 साल लग गए। 

यह इस जून में रिलीज़ किया गया था और एक बेस्ट सेलर बन गया है। दुनिया को बदलने के लिए, इसे एक बेहतर जगह बनाने के लिए, आपके लिए और मेरे लिए और पूरी मानव जाति, जरूरत है खुद के न्याय के लिए लड़ने की, आगे आकर निडर होकर बोलने की,जैसा कि माइकल जैक्सन भी कह गए हैं।

तर्कसंगत की टीम तारा जी के बेबाक जज्बे,निडर स्वभाव और समाज की इतनी बड़ी, समस्या के ऊपर ना सिर्फ अपना पक्ष रखना  बल्कि उसके लिए इतना बड़ा कदम उठाने के लिए  सलाम करती है।

यदि आपके पास भी दुनिया को बताने के लिए एक प्रेरक कहानी है, तो हमें भेजें
                                                                                                                                          [email protected]

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...