Sankaracharya Swaroopanand Saraswati death, Sankaracharya Swaroopanand Saraswati, Sankaracharya Swaroopanand Saraswati died,Sankaracharya Swaroopanand Saraswati died नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश, MP, Narsinghpur, Shankra charya swami swaroopa nand passes away,Sankaracharya Swaroopanand Saraswati profile

ख़बरें

Swami Swaroopanand: शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती का निधन, 99 साल की उम्र में ली आखिरी सांस

Nishant Kumar

September 12, 2022

SHARES

नरसिंहपुर: ‘क्रांतिकारी साधु’ के रूप में मशहूर द्वारका पीठ के ‘जगतगुरु शंकराचार्य’ स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का रविवार को मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले स्थित उनके आश्रम झोतेश्वर में हृदय गति रुक जाने से निधन हो गया. वह 99 साल के थे.

वह धार्मिक एवं राजनीतिक मुद्दों पर अमूमन बयान दिया करते थे और शिरडी के साई बाबा को भक्तों द्वारा भगवान कहे जाने पर सवाल उठाया करते थे. सूत्रों के अनुसार सोमवार अपराह्न करीब तीन से चार बजे उनके आश्रम परिसर में ही उन्हें भू समाधि दी जाएगी. आश्रम की विज्ञप्ति के अनुसार वह गुजरात स्थित द्वारका-शारदा पीठ एवं उत्तराखंड स्थित ज्योतिश पीठ के शंकराचार्य थे और पिछले एक साल से अधिक समय से बीमार चल रहे थे.

इसमें कहा गया है, ‘‘शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज 99 वर्ष की आयु में हृदय गति के रुक जाने से ब्रह्मलीन हुए. उन्होंने अपनी तपोस्थली परमहंसी गंगा आश्रम झोतेश्वर में दोपहर 3.21 बजे अंतिम सांस ली.’’

विज्ञप्ति के अनुसार शंकराचार्य ने सनातन धर्म, देश और समाज के लिए अतुल्य योगदान किया. उनसे करोड़ों भक्तों की आस्था जुडी हुई है.

इसमें कहा गया है कि वह स्वतन्त्रता सेनानी, रामसेतु रक्षक, गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित करवाने वाले तथा रामजन्मभूमि के लिए लम्बा संघर्ष करने वाले, गौरक्षा आंदोलन के प्रथम सत्याग्रही एवं रामराज्य परिषद् के प्रथम अध्यक्ष थे और पाखंडवाद के प्रबल विरोधी थे.

इसी बीच, आश्रम के सूत्रों ने बताया, ‘‘उन्हें नरसिंहपुर के गोटेगांव स्थित उनकी तपोस्थली परमहंसी गंगा आश्रम झोतेश्वर में कल अपराह्न करीब 3-4 बजे भू समाधि दी जाएगी.’’

उन्होंने कहा कि वह डायलिसिस पर थे और पिछले कुछ महीनों से आश्रम में अक्सर वेंटिलेटर पर रखे जाते थे, जहां उनके इलाज के लिए एक विशेष सुविधा बनाई गई थी. इसके अलावा, वह मधुमेह से पीड़ित थे और वृद्धावस्था संबंधी समस्याओं से भी जूझ रहे थे.

उनके शिष्य दण्डी स्वामी सदानंद ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि ज्योतिष एवं शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का जन्म मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के दिघोरी गांव में हुआ था. उनके बचपन का नाम पोथीराम उपाध्याय था.

उन्होंने बताया कि सरस्वती नौ साल की उम्र में अपना घर छोड़ कर धर्म यात्राएं प्रारंभ कर दी थी.

शंकराचार्य के एक करीबी व्यक्ति ने बताया कि अपनी धर्म यात्राओं के दौरान वह काशी पहुंचे और वहां उन्होंने ‘ब्रह्मलीन श्रीस्वामी’ करपात्री महाराज से वेद-वेदांग एवं शास्त्रों की शिक्षा ली. यह वह समय था जब भारत को अंग्रेजों से मुक्त करवाने की लड़ाई चल रही थी. जब 1942 में ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ का नारा लगा तो वह भी स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े और 19 साल की उम्र में वह ‘क्रांतिकारी साधु’ के रूप में प्रसिद्ध हुए.

उन्होंने कहा कि उन्हें स्वतंत्रता संग्राम के दौरान दो बार जेल में रखा गया था, जिनमें से एक बार उन्होंने नौ माह की सजा काटी, जबकि दूसरी बार छह महीने की सजा काटी. शंकराचार्य के अनुयायियों ने कहा कि वह 1981 में शंकराचार्य बने और हाल ही में शंकराचार्य का 99वां जन्मदिन मनाया गया. उनके लाखों अनुयायियों में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह भी शामिल हैं.

शंकराचार्य के समर्थकों में से एक और पूर्व कांग्रेस विधायक तथा जबलपुर की पूर्व महापौर कल्याणी पांडे ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘शंकराचार्य ने अयोध्या में राम मंदिर का ताला खुलवाने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर दबाव बनाया था.’’

उन्होंने कहा कि स्वामी स्वरूपानंद का कहना था कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कंबोडिया के अंकोरवाट मंदिर की तर्ज पर होना चाहिए. अंकोरवाट कंबोडिया में दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक स्मारक है, जो करीब 163 हेक्टेयर में फैला हुआ है.

उनके अनुयायियों ने बताया कि शंकराचार्य को उस समय भी हिरासत में लिया गया जब वह राम मंदिर निर्माण के लिए एक यात्रा का नेतृत्व कर रहे थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया और संत के अनुयायियों के प्रति संवेदना व्यक्त की.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शंकराचार्य के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा,‘‘भारतीय ज्ञान परम्परा में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के अतुलनीय योगदान को अखिल विश्व अनंत वर्षों तक स्मरण रखेगा. पूज्य स्वामी जी सनातन धर्म के शलाका पुरूष एवं सन्यास परम्परा के सूर्य थे.’’

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उनके निधन पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे महान संत पृथ्वी को आलोकित करते हैं. उनके श्रीचरणों में बैठकर आध्यात्म का ज्ञान और आशीर्वाद के क्षण सदैव याद आएंगे.

अपने मन की बात कहने के लिए जाने जाने वाले स्वामी स्वरूपानंद ने जून 2012 में उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री को गंगा नदी पर पनबिजली परियोजनाओं, बांधों और बैराजों के खिलाफ अपने रुख के बारे में बताया था.

उन्होंने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने और देश में समान नागरिक संहिता बनाने की वकालत की थी.

वर्ष 2014 में उन्होंने शिरडी के साईबाबा को भगवान कहे जाने पर सवाल उठाकर विवाद खड़ा कर दिया था. उन्होंने कहा था कि शास्त्रों और वेदों में साई बाबा का कोई उल्लेख नहीं है और हिंदू देवताओं के साथ उनकी पूजा नहीं की जानी चाहिए.

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...